
नई देहली – हलाल प्रमाणपत्र एक षड्यंत्र है । पशुवध व्यव्यसाय में स्थापित हिन्दू एवं सिक्खों का रोजगार छीन लेने का यह षड्यंत्र है । भारत की अर्थव्यवस्था पर जिहादी नियंत्रण स्थापित करने का यह प्रयास है । यह षड्यंत्र देश पर शरिया कानून थोपने का काम करता है, साथ ही राष्ट्रविरोधी तत्त्वों को प्रोत्साहन देते हुए उन्हें संरक्षण देता है । इसका विरोध करने के लिए २८ एवं २९ सितंबर को देश के सभी राज्यों की राजधानियों में बडे आंदोलनों का आयोजन किया जानेवाला है । इन विरोध प्रदर्शनों में युवा शक्ति बडी संख्या में भाग लेगी, ऐसी जानकारी हलाल नियंत्रण मंच की ओर से आयोजित पत्रकारवार्ता में दी गई । प्रसिद्ध उद्योगपति तथा समाजसेवी हरिंदर मसुदा (सिक्का) एवं सेवानिवृत्त न्यायाधीश पवन कुमार ने इस पत्रकारवार्ता को संबोधित किया ।
The Halal Niyantran Manch, led by @sikka_harinder and retired Justice Pawan Kumar, is organising nationwide protests against Halal certification on 28 & 29 September.
HJS has consistently highlighted how Halal imposition is creating a parallel economy that threatens the Indian… pic.twitter.com/PTJERqA5yu
— HinduJagrutiOrg (@HinduJagrutiOrg) September 28, 2026
१. किसी ने ‘झटका’ मांस की दुकान खोली, तो उस पर प्राणघातक आक्रमण किया जाता है !
हरिंदर सिक्का ने बताया कि पहले हलाल प्रमाणपत्र केवल पशुओं के मांस तक सीमित था । कांग्रेस की सरकारों के साथ मिलीभगत कर कुछ मौलानाओं ने उद्येश्य पूर्ति के माध्यम से यह आदेश पारित करवा लिया कि हलाल प्रमाणपत्र के बिना किसी भी मांस का निर्यात नहीं हो सकता । हलाल का प्रमाणपत्र प्रदान करनेवाला मौलवी तभी यह प्रमाणपत्र प्रदान करता था, जब कोई मुसलमान व्यक्ति पशु की हत्या करता था । इसके कारण अनुसूचित समुदाय एवं सिक्ख समुदाय का एक बडा वर्ग, जो इस व्यवसाय में स्थापित था, वह एक झटके में बेरोजगार बन गया । रेल, एयरलाईंस, होटल्स इत्यादि ने हलाल मांस ही खरीदना आरंभ किया । सिक्ख धर्म में हलाल मांस को ‘पाप’ माना गया है । पूरे देश के हिन्दू एवं सिक्ख समुदाय को बलपूर्वक हलाल मांस खाने के लिए बाध्य बनाकर उसकी धार्मिक आस्था पर डाका डाला गया । वर्तमान सरकार इसलिए अभिनंदन के पात्र है, जिसने हमारे तत्त्वावधान में एपेडा का यह गैरकानूनी आदेश वापस लिया । इस षड्यंत्र की तीव्रता का अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि यदि किसी ने ‘झटका’ मांस की दुकान खोली, तो उस पर प्राणघातक आक्रमण किया जाता है ।
२. मुसलमान समुदाय केवल १२ प्रतिशत हलाल उत्पाद ही खरीदता है, जबकि गैरमुसलमान ८८ प्रतिशत !
सेवानिवृत्त न्यायाधीश पवन कुमार ने बताया कि अब हलाल प्रमाणपत्र का यह षड्यंत्र केवल मांस तक सीमित नहीं रहा है । मौलानाओं ने मुसलमान समुदाय को इसलिए प्रेरित किया कि वे नित्य जीवन में उपयोग की जानेवाली वस्तुएं जैसे की औषधियां, सौंदर्य प्रसाधन, खाने-पीने का समान, भवन इत्यादि की तभी खरीद करें, यदि वो हलाल प्रमाणित होंगे । कांग्रेस की सरकारें इस हिन्दूविरोधी एवं राष्ट्रविरोधी षड्यंत्र का अंग बनीं । उन्होंने ‘जमियत उलेमा-ए-हिन्द’ सहित ४ इस्लामी संस्थाओं को हलाल प्रमाणपत्र प्रदान करने का संविधानविरोधी अधिकार प्रदान किया, जिन मौलवियों से यह प्रमाणपत्र प्रसारित करने के लिए बडा शुल्क वसूलते हैं । मुसलमान समाज को इस समान की केवल १२ प्रतिशत ही खरीद करता है, जबकि शेष ८८ प्रतिशत ग्राहक गैरमुसलमान हैं । उनके परिश्रम की कमाई का बडा भाग इन संस्थाओं के पास जा रहा है, जो इस पैसों का उपयोग धर्मांतरण, लव जिहाद, आतंकियों की सहायता जैसे राष्ट्रविरोधी कामों के लिए करते हैं ।
अब हमने यह निर्णय लिया है कि,
१. देश के सभी राज्यों में इस वर्ष के अंत तक ‘हलाल नियंत्रण मंच’ की स्थापना की जाएगी, जिसमें समाज के सभी घटकों का समावेश किया जाएगा ।
२. केंद्रीय मंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्री तथा स्थानीय स्वराज संस्थाओं के प्रमुखों के मिलकर हम उन्हें हलाल नियंत्रण की दिशा में अर्थपूर्ण कदम उठाने का अनुरोध करेंगे ।
३. विचारगोष्ठियां एवं जनसभाओं का आयोजन कर इस षड्यंत्र के संबंध में जागरूकता लाई जाएगी ।
४. सिक्ख समाज एवं अनुसूचित जाति/जनजातियों के नेतृत्व
हलाल व्यवस्था के विरुद्ध जनजागरण में हिन्दू जनजागृति समिति की अग्रणी भूमिका
हलाल प्रमाणन के मुद्दे पर बढती जनजागरूकता और जनभागीदारी उन संगठनों द्वारा वर्षों से किए जा रहे जागरूकता प्रयासों का परिणाम है, जिन्होंने लगातार इस विषय को सार्वजनिक मंचों पर उठाया है। हिंदू जनजागृति समिति (HJS) इस अभियान में अग्रणी रही है और वर्ष 2019 से हलाल थोपे जाने के विरोध में आंदोलन का नेतृत्व करती आ रही है। HJS ने इस विषय पर व्यापक शोध और आंकड़ों के आधार पर ‘हलाल जिहाद? – भारतीय अर्थव्यवस्था पर आक्रमण’ नामक पुस्तक का संकलन एवं प्रकाशन भी किया।
वर्षों से समिति द्वारा जनजागरण अभियान, सार्वजनिक व्याख्यान, चर्चाएं, व्यापारियों एवं कानूनी विशेषज्ञों के साथ बैठकें, प्रतिनिधिमंडल आदि के माध्यम से हलाल प्रमाणन की धर्म-आधारित व्यवस्था के विरुद्ध कार्रवाई की मांग उठाई जाती रही है। इन निरंतर प्रयासों के माध्यम से इस विषय को व्यापारियों, उद्यमियों, उपभोक्ताओं और व्यापक समाज के सामने लाने में सहायता मिली है।
नागरिकों की बढ़ती भागीदारी और विभिन्न राज्यों की राजधानियों में विरोध-प्रदर्शन आयोजित किए जाने की पहल से संकेत मिलता है कि यह विषय समाज के व्यापक वर्ग का ध्यान आकर्षित कर रहा है। समिति हलाल प्रमाणन व्यवस्था तथा रोजगार, उपभोक्ता की पसंद, धार्मिक स्वतंत्रता और भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके कथित प्रभावों के संबंध में जनजागरूकता बढ़ाने की पहल का स्वागत करता है।








