८ महीने में ३ स्मरण पत्र देने के बावजूद प्रशासन की अनदेखी; आज तक कोई कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की!

सोलापुर : उजनी जलाशय और भीमा नदी क्षेत्र में भयंकर प्रदूषण के कारण सोलापुर के 5 लाख से अधिक नागरिकों के स्वास्थ्य पर हो रहे जहरीले प्रभावों का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अत्यंत गंभीरता से संज्ञान लिया है। बार-बार याद दिलाने के बावजूद महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच रिपोर्ट प्रस्तुत न करने के कारण, आयोग ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रधान सचिव को 23 अक्टूबर 2026 को दोपहर 1 बजे नई दिल्ली में आयोग के समक्ष आवश्यक जांच रिपोर्ट के साथ स्वयं या मामले की पूरी जानकारी रखने वाले अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होने का सशर्त समन जारी किया है।
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🚨 Ujani Pollution: @India_NHRC Summons @mpcb_official Chairman & State Health Secretary!
⛔️ Despite 3 reminders in 8 months, officials failed to report on toxic water affecting 5 Lakh+ Solapur citizens.
⛔️Ignored reminders on Mar 24, May 19 &… pic.twitter.com/EfEf6Dpq7l— Surajya Abhiyan (@SurajyaAbhiyan) September 24, 2026
सुराज्य अभियान के महाराष्ट्र समन्वयक श्री अभिषेक मुरुकटे द्वारा आयोग में की गई शिकायत के अनुसार, पुणे और सोलापुर से प्रतिदिन 4,262 मिलियन लीटर (MLD) बिना प्रक्रिया किया हुआ (अनुपचारित) सीवेज उजनी बेसिन में छोड़ा जा रहा है, जिससे पानी में मैंगनीज का स्तर सुरक्षित सीमा से 51 गुना बढ़ गया है। प्रशासन की इस लापरवाही के कारण नागरिकों के संवैधानिक ‘जीने के अधिकार’ (Right to Life) का सीधा उल्लंघन होने की बात शिकायत में कही गई है।
इस गंभीर मामले में आयोग ने 6 फरवरी 2026 को पहली बार संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन उसके बाद 24 मार्च, 19 मई और 14 जुलाई 2026 को तीन रिमाइंडर भेजने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने कोई कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report) प्रस्तुत नहीं की। अंततः प्रशासन के इस गैरजिम्मेदाराना रवैये पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 13 के तहत, वरिष्ठ अधिकारियों को उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने समन में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि 16 अक्टूबर 2026 से पहले अधिकारियों ने आवश्यक रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी, तो ही उन्हें व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी जाएगी।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सुराज्य अभियान के सोलापुर समन्वयक श्री दत्तात्रेय पिसे ने कहा, “तीन-तीन रिमाइंडर भेजने के बावजूद प्रदूषण बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई ध्यान न देना प्रशासन की संवेदनहीनता का भयानक उदाहरण है। अब मानवाधिकार आयोग के इस कड़े नोटिस के बाद कम से कम 16 अक्टूबर तक संबंधित एजेंसियों को आयोग के सामने वास्तविक स्थिति रखनी चाहिए। उजनी के पानी और नागरिकों का तत्काल ‘हैवी मेटल्स’ (घातक धातुओं) के लिए स्वास्थ्य परीक्षण किया जाना चाहिए, जहर प्रभावित गांवों को सुरक्षित पानी की आपूर्ति की जानी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”








