प्रगतिशील गुट केवल गणेशोत्सव पर ही नहीं, बल्कि ध्वनि प्रदूषण करने वाले लाउडस्पीकरों के विरुद्ध भी आवाज उठाएं!

पुणे : गणेशोत्सव में ‘डीजे’ और ध्वनि प्रदूषण का मुद्दा इस समय चर्चा में है। हिंदू जनजागृति समिति पिछले 24 वर्षों से ‘उत्सवों में डीजे या तेज आवाज वाले लाउडस्पीकर न बजाएं’ विषय पर जनजागरण कर रही है। समिति ‘उत्सवों में कुप्रथाएं रोकें’ नाम से व्यापक अभियान चला रही है।
डॉ. नरेंद्र दाभोलकर ने कुछ वर्ष पूर्व ‘गणेश मूर्तियों के नदी में विसर्जन से जल प्रदूषण होता है’ का प्रचार कर एक नैरेटिव बनाया था। साल के 365 दिन नदी को प्रदूषित करने वाले गंभीर कारणों की अनदेखी कर केवल गणेशोत्सव के 10 दिनों से ही प्रदूषण होने का दावा किया गया और कृत्रिम कुंडों का नया चलन शुरू हुआ। उसी तर्ज पर अब ध्वनि प्रदूषण का विषय भी उठाया जा रहा है।
‘डीजे’ के कारण गणेशोत्सव में होने वाला ध्वनि प्रदूषण निश्चित रूप से बंद होना चाहिए, लेकिन क्या हम साल भर ध्वनि प्रदूषण करने वाले अन्य कारणों पर विचार करेंगे? विद्यानंद बापट और प्रगतिशील गुट जो मांग कर रहे हैं, क्या वे मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने, ‘थर्टी फर्स्ट’ की रात के कार्यक्रमों और ‘सनबर्न’ जैसे बड़े म्यूजिक इवेंट्स को बंद करने की मांग करेंगे? केवल गणेशोत्सव को निशाना बनाकर हिंदू धर्म के ‘द्वैत-अद्वैत दर्शन’ को अपमानजनक शब्द कहना और त्योहारों को ‘लश्कर-उत्सव’ कहना, ध्वनि प्रदूषण की आड़ में धर्म पर आघात करने वाली मानसिकता को दर्शाता है। हम इसका कड़ा विरोध करते हैं।
भारत में संविधान का शासन है, इसलिए ध्वनि प्रदूषण के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई अवश्य होनी चाहिए; लेकिन ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ के नाम पर हिंदू धर्म पर हमला करने वालों पर भी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, यह मांग हिंदू जनजागृति समिति ने की है।
हिंदू जनजागृति समिति त्योहारों की पवित्रता और धार्मिकता बनाए रखने के लिए मंडपों में जुआ खेलना, शराब पीना, अश्लील नृत्य करना, श्री गणेश मंडप के सामने अश्लील गाने बजाना, शराब-धूम्रपान करना और जबरन चंदा वसूलने जैसे कुकृत्यों के विरुद्ध दो दशकों से जनजागरण अभियान चला रही है। इसलिए हमारी भूमिका केवल ‘डीजे विरोध’ तक सीमित न होकर ‘आदर्श और सात्विक सार्वजनिक उत्सव’ का निर्माण करना है। गणेशोत्सव धर्म-पालन, संस्कृति के संरक्षण, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक चेतना को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण मंच है, इसे इसी दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।








