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महाराष्ट्र मंदिर महासंघ की सफलता : अमरावती में श्री मारोती संस्थान की भूमि को कुळ कानून के तहत हडपने का प्रयास विफल

देवस्थान की भूमि की रक्षा के लिए प्रयास करने वाले ट्रस्टी और महाराष्ट्र मंदिर महासंघ का अभिनंदन!

अमरावती – अचलपुर तालुका के मौजा काकडा स्थित श्री मारोती संस्थान (श्रीराम और हनुमान मंदिर) के स्वामित्व वाली कृषि भूमि को कुळ कानून के अंतर्गत खरीदने का प्रयास कानूनी लड़ाई के कारण विफल हो गया। महाराष्ट्र मंदिर महासंघ और संस्थान के ट्रस्टियों द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों के बाद अचलपुर के तहसीलदार सुदर्शन शहारे ने 30 जुलाई 2026 को आवेदन खारिज करते हुए देवस्थान के पक्ष में निर्णय दिया।

1. संस्थान के स्वामित्व वाली कृषि भूमि को कुळ कानून के तहत खरीदकर प्राप्त करने के लिए पंजाबराव महादेवराव पाटील और अन्य लोगों ने तहसीलदार के समक्ष आवेदन किया था। संस्थान के ट्रस्टियों तथा महाराष्ट्र मंदिर महासंघ ने इसका कानूनी विरोध किया। महासंघ की ओर से राज्य पदाधिकारी अनुप जयस्वाल, मयुर दीक्षित और सुरेंद्र प्रजापती ने विस्तृत आपत्ति दर्ज कराई। वहीं, संस्थान की ओर से प्रकाश बोंडे, अनिल बोंडे, गजानन बोंडे, हरीश पाटील, रामेश्वर बोरकर, राहुल वैद्य, सुनील बोंडे, देवानंद ठाकरे, प्रशांत बोंडे, सुरेश बोंडे, अविनाश बोंडे, विलास बोंडे, राधेश्याम नाथे, रामदास पांडे, प्रकाश अलाटकर सहित अन्य लोगों ने अपना पक्ष रखा।

2. कृषि भूमि की कुळ खरीद का मामला पहले ही 30 नवंबर 1966 को समाप्त किया जा चुका था। इस तथ्य की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया। पुराने निर्णय का संदर्भ देते हुए तथा नए सिरे से दाखिल किए गए कुळ कानून के तहत खरीद संबंधी मामले को तत्काल रद्द कर उसे दफ्तरी दाखिल (प्रकरण बंद) करने की मांग महाराष्ट्र मंदिर महासंघ ने की।

3. दोनों पक्षों के साक्ष्यों और दस्तावेजों की जांच करने के बाद तहसीलदार ने अंतिम आदेश पारित किया। न्यायाधिकरण द्वारा पहले ही आदेश पारित किया जा चुका था और उसके रद्द होने का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं था। परिणामस्वरूप तहसीलदार ने निष्कर्ष दर्ज किया कि “आवेदकों को उक्त भूमि खरीदने का अधिकार प्राप्त नहीं होता” और आवेदकों की मांग को खारिज कर दिया।

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