ताजमहल में तेजो महालय मंदिर होने का प्रकरण
प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) – ताजमहल को तेजोमहालय मंदिर घोषित किए जाने की मांग करनेवाली याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ६ जुलाई को केंद्र सरकार एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से उनका पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया ।
यह याचिका ‘अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान’ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पू. हरि शंकर जैन सहित पांच लोगों द्वारा प्रविष्ट की गई है । याचिका में मांग की गई है कि ताजमहल परिसर के भीतर ‘अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजोमहालय मंदिर’ स्थित होने की घोषणा की जाए ।
The Allahabad High Court issued notices to the Centre and the ASI on a plea challenging an Agra court’s refusal to order a survey of the Taj Mahal.
Read More At: https://t.co/OnFMZAnuxJ#allahabadhc #legalnews #latestnews #judiciary #tajmahal pic.twitter.com/Av7wkvE9A0— LawChakra (@LawChakra) July 7, 2026
अधिवक्ता आयुक्त नियुक्त करने की मांग
सुनवाई के समय वरिष्ठ अधिवक्ता पू. हरि शंकर जैन ने तर्क दिया कि परिसर का वीडियो रिकॉर्डिंग एवं फोटोग्राफी कराने तथा एक अधिवक्ता आयुक्त नियुक्त करने के लिए निचले न्यायालय में आवेदन किया गया था; किंतु निचले न्यायालय ने उस आवेदन को अनुचित रूप से निरस्त कर दिया । इसके पश्चात पुनर्विचार याचिका भी सुनवाई योग्य न मानते हुए अस्वीकार कर दी गई । उन्होंने कहा कि इस पूरे विवाद के उचित समाधान के लिए परिसर का सर्वेक्षण एवं वीडियो रिकॉर्डिंग कराना अत्यंत आवश्यक है ।
वर्ष २०१५ से मुख्य प्रकरण लंबित
ताजमहल से संबंधित यह मूल वाद वर्ष २०१५ में प्रविष्ट किया गया था, जो अभी भी आगरा की दीवानी न्यायालय में लंबित है । इस वाद में ताजमहल परिसर में ‘अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजोमहालय मंदिर’ होने की घोषणा करने की मांग की गई है । इस प्रकरण के लंबित रहने के समय अधिवक्ता आयुक्त नियुक्त करने का आवेदन भी प्रस्तुत किया गया था, जिसे दोनों जिला न्यायालयों ने निरस्त कर दिया ।
6 जुलाई
‘ताजमहल’ के ‘तेजोमहालय’ होने की पुष्टि हेतु सर्वेक्षण करने के लिए हिन्दुओं द्वारा प्रयागराज उच्च न्यायालय में याचिका
१०९ साक्ष्यों का दावा

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) – यहां स्थित ‘ताजमहल’ ‘तेजोमहालय’ है, यह निश्चित करने हेतु इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की गई है । यह याचिका ‘भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान’ के पक्ष से अधिवक्ता पू. हरि शंकर जैन तथा रंजना अग्निहोत्री सहित ५ व्यक्तियों ने प्रस्तुत की है । अधिवक्ता पू. हरि शंकर जैन वाराणसी के ज्ञानवापी प्रकरण में भी हिन्दुओं के पक्ष से न्यायालयीन संघर्ष कर रहे हैं ।

१. इस याचिका में याचिकाकर्ताओं ने ‘ताजमहल’ को भगवान शिव को समर्पित ‘तेजोमहालय’ होने के १०९ हिन्दू साक्ष्य/प्रतीक भी प्रस्तुत किए हैं । इस याचिका द्वारा आगरा के जिला न्यायालय के प्राचीन आदेश को चुनौती दी गई है । उस आदेश में ताजमहल के हिन्दू प्रतीकों के सत्यापन हेतु सर्वेक्षण करने से अस्वीकार कर दिया गया था ।
“109 Hindu features in Taj Mahal prove it is Lord Shiva’s Tejo Mahalaya.”
– Petition in Allahabad HC
— News Arena India (@NewsArenaIndia) July 4, 2026
२. यह प्रकरण वर्ष २०१५ में आरंभ हुआ था । उस समय आगरा के दीवानी न्यायालय में एक दीवानी वाद प्रस्तुत किया गया था । उसके द्वारा यह प्रतिपादित किया गया था कि ताजमहल परिसर वास्तव में तेजोमहालय, अर्थात तेजोलिंग महादेव मंदिर है, जहां भगवान महादेव नागनाथेश्वर विराजमान हैं । साथ ही हिन्दुओं को ताजमहल में पूजा करने की अनुमति प्रदान करने की भी मांग की गई थी ।
३. इसके पश्चात पुनः वर्ष २०१९ में याचिकाकर्ताओं ने आवेदन प्रस्तुत कर ताजमहल का निरीक्षण करने तथा उसकी संरचना के छायाचित्र लेने एवं चलचित्र (वीडियो) निर्माण हेतु एक ‘अधिवक्ता आयुक्त’ की नियुक्ति करने की मांग की थी । तथापि, याचिकाकर्ता ताजमहल की पहचान स्थापित करने वाले राजस्व अभिलेख (रेवेन्यू रिकॉर्ड्स) प्रस्तुत करने में असमर्थ रहे, यह कहते हुए न्यायालय ने वह मांग अस्वीकार कर दी थी ।
स्रोत : हिंदी सनातन प्रभात








