हिंदू एकता, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक प्रतिबद्धता का संकल्प करने का आवाहन

वेंगुर्ला – हिंदू समाज में एकात्मता, संगठन और धर्मजागृति निर्माण करने के उद्देश्य से सकल हिंदू समाज की ओर से 21 जून की संध्या को तुळस स्थित उत्सव मंगल कार्यालय में भव्य सकल हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन के माध्यम से समस्त हिंदुओं से यह आह्वान किया गया कि “हिंदू समाज का संगठित होना समय की आवश्यकता है। इसके लिए हम सभी हिंदू एकता, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक प्रतिबद्धता का संकल्प करें।”
सम्मेलन का उद्घाटन ज्येष्ठ कीर्तनकार श्री सुबोध मराठे के हाथों दीपप्रज्वलन और भारतमाता की प्रतिमा के पूजन से किया गया। इस अवसर पर व्यासपीठ पर सर्वश्री गणेश गोविंद उपाख्य राजू जोशीगुरुजी, अमित गोपाल नाईक, नितीन लिंगोजी तथा हिंदू जनजागृति समिति के गोवा राज्य संगठक सत्यविजय नाईक उपस्थित थे। सम्मेलन के प्रारंभ में सभागृह के बाहर तुळस के उद्योजक श्री आनंद तांडेल ने अपनी पत्नी के साथ गोमाता का पूजन किया। तुळस, पाल, अणसूर, पेंडूर, मातोंड, होडावडा और वजराट इन गांवों के हिंदू बांधवों की संयुक्त पहल से इस सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर प्रदर्शित शिवकालीन शस्त्रों के प्रात्यक्षिकों ने सम्मेलन में विशेष उत्साह उत्पन्न किया।
इस अवसर पर श्री गणेश गोविंद उपाख्य राजू जोशीगुरुजी ने कहा, “हिंदू धर्म का पालन अपने घर से ही आरंभ होना चाहिए। संतों ने हमें जो शिक्षा दी है, उसके अनुसार आचरण करना चाहिए।”
ज्येष्ठ कीर्तनकार श्री सुबोध मराठे और श्री अमित नाईक ने भी मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम का संचालन प्रा. सचिन परुळकर ने किया, जबकि प्रस्तावना श्री नितीन लिंगोजी ने रखी।
इस सम्मेलन में वेंगुर्ला तालुका संघचालक बाबुराव खवणेकर, भाजपा जिला उपाध्यक्ष प्रसन्ना उपाख्य बालू देसाई, पंचायत समिति के सभापति शंकर घारे, जिला परिषद सदस्य सुजाता पडवळ, तुळस उपसरपंच सचिन नाईक, मातोंड सरपंच मयुरी वाडाचेपाटकर, पाल सरपंच कावेरी गावडे, अणसुर सरपंच सत्यविजय गावडे, वजराट सरपंच अनन्या पुराणिक तथा होडावडा उपसरपंच राजबा सावंत सहित बड़ी संख्या में हिंदू उपस्थित थे।
हिंदू समाज संगठित रहेगा, तो राष्ट्र अधिक सक्षम और सुरक्षित रहेगा ! – श्री सत्यविजय नाईक
इस अवसर पर श्री सत्यविजय नाईक ने कहा, “अपनी संस्कृति, परंपरा, भाषा, पर्व-उत्सव और धार्मिक मूल्यों का संरक्षण करना प्रत्येक हिंदू का दायित्व है। हिंदू समाज संगठित रहेगा, तो राष्ट्र अधिक सक्षम और सुरक्षित रहेगा। हमारे संतों ने सदैव समाज को एकता का संदेश दिया है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज्य की स्थापना कर धर्म, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा की। उनके कार्य से प्रेरणा लेकर हमें भी समाजहित में कार्यरत रहना चाहिए।”








