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भारतीय अर्थव्यवस्था को खोखला करने वाली ‘हलाल अर्थव्यवस्था’ को उखाड फेंकना आवश्यक – हिन्दू जनजागृति समिति

‘हलाल टैक्स’ हिंदुओं की जेब से वसूला जाने वाला ‘जज़िया कर’ ही है! – रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिंदू जनजागृति समिति

पत्रकार वार्ता के दौरान (बाएं से) श्री योगेश केरकर, श्री निरंजन शिंदे, वक्तव्य देते हुए श्री रमेश शिंदे, श्री शिवानंद स्वामी, श्री संभाजीराव भोकरे, श्री गजानन गुरव तथा पीछे खड़े श्री अशोक गुरव और श्री किशोर घाटगे

कोल्हापूर – ‘कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ’ यानी ‘गोकुल’ द्वारा ‘हलाल सर्टिफिकेट’ (प्रमाणपत्र) लेने की बात सामने आई है। हलाल प्रमाणपत्र देने वाली संस्था ‘जमीयत उलेमा हिंद’ 700 से अधिक आतंकवादियों के मुकदमे लड़ रही है और यह पैसा प्रमाणपत्र लेने वालों के माध्यम से इकट्ठा किया जा रहा है। सामान्य किसानों को अंधेरे में रखकर ‘गोकुल’ का पैसा ‘हलाल’ के लिए इस्तेमाल करना लाखों किसानों के साथ सरासर धोखाधड़ी है। वर्ष 2013 में शुरू हुई हलाल अर्थव्यवस्था आज वैश्विक स्तर पर 2.1 ट्रिलियन अमेरिकन डॉलर (179.6 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच चुकी है। हिंदुओं की जेब से वसूला जाने वाला ‘हलाल टैक्स’ वास्तव में हिंदुओं के लिए ‘जज़िया कर’ ही है। भारतीय अर्थव्यवस्था को विकलांग बनाने वाली इस ‘हलाल अर्थव्यवस्था’ को नष्ट करना अनिवार्य है और इसके लिए भारत देश ‘हलाल-मुक्त’ होना चाहिए, यह दृढ़ प्रतिपादन हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने किया।

वे कोल्हापुर में आयोजित एक पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर ‘हिंदू एकता आंदोलन’ के श्री. गजानन गुरव, ‘महाराजा प्रतिष्ठान’ के संस्थापक श्री. निरंजन शिंदे, ‘मराठा तितुका मेळवावा’ के श्री. योगेश केरकर, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी के उपजिला प्रमुख श्री. संभाजीराव भोकरे, हिंदू जनजागृती समिति के श्री. शिवानंद स्वामी, शिवसेना के श्री. किशोर घाटगे और महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के उपजिला प्रमुख श्री. अशोक गुरव उपस्थित थे।

श्री. रमेश शिंदे ने कहा कि, महाराष्ट्र देश का 5वां सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य है। राज्य में कुल उत्पादन में 2.5 मिलियन (25 लाख) लीटर दूध की कमी है, ऐसे में हमें दूध निर्यात करने की क्या आवश्यकता है? दुनिया के 192 देशों ने ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण’ (FSSAI) को मान्यता दी है। जब FSSAI किसी खाद्य पदार्थ की सभी जांच करने के बाद प्रमाणित करता है कि ‘इसमें मांस से संबंधित कोई सामग्री नहीं है’, तो उस पर भरोसा न करके धर्म आधारित ‘हलाल’ प्रमाणपत्र की क्या आवश्यकता है? 

शुरुआत में केवल ‘मांस’ तक सीमित रहने वाला ‘हलाल सर्टिफिकेट’ आज दूध, तुलसी अर्क, चीनी, डेटिंग ऐप्स, आवासीय परिसरों (हाउसिंग प्रोजेक्ट्स) और शेयर बाजार जैसी लगभग हर उपयोगी वस्तु और सेवा तक पहुंच चुका है। हिंदुओं द्वारा खरीदी जाने वाली लगभग हर वस्तु अब हलाल प्रमाणित है और हिंदुओं का पैसा हलाल के लिए खर्च हो रहा है। हलाल में केवल मुसलमानों की धार्मिकता का विचार किया गया है। इसमें हिंदुओं के लिए पवित्र गोमाता से संबंधित किसी भी उत्पाद का उपयोग (जैसे गाय का मांस) नहीं किया जाएगा, इसकी कोई गारंटी नहीं दी जाती।

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