
कोल्हापुर : महाराष्ट्र की पहचान माने जाने वाले ‘गोकुल’ (कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ) द्वारा धर्म-आधारित ‘हलाल’ प्रमाणपत्र लेने का एक अत्यंत संतापजनक मामला सामने आया है। यदि यह हलाल प्रमाणपत्र तत्काल रद्द नहीं किया गया, तो उत्पादों के बहिष्कार सहित तीव्र जन-आंदोलन छेड़ा जाएगा। साथ ही, आवश्यकता पड़ने पर सीधे ‘गोकुल’ मुख्यालय पर भव्य मोर्चा निकालने की चेतावनी हिन्दू जनजागृती समिति और समस्त हिन्दूवादी संगठनों ने दी है। इस मांग का एक विस्तृत ज्ञापन संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा गोकुल के प्रशासनिक मंडल, कोल्हापुर के जिलाधिकारी डॉ. विजय राठौड़ और जन सुराज्य शक्ति पार्टी के विधायक श्री. अशोक माने को सौंपा गया।

इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने गोकुल के हलाल प्रमाणपत्र की प्रति भी जलाई। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि एक धर्मनिरपेक्ष देश में सरकारी प्रमाणपत्रों की उपेक्षा कर लिया गया यह निर्णय बहुसंख्यक हिन्दू ग्राहकों की भावनाओं को आहत करने वाला है, इसलिए प्रशासन को इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए इस प्रमाणपत्र को रद्द करना चाहिए।

खाड़ी देशों में उत्पादों को निर्यात करने के लिए इस प्रमाणपत्र की अनिवार्यता होने का कारण गोकुल प्रशासन भले ही दे रहा हो, लेकिन यह हठ पूरी तरह से समझ से परे है। जब देश के भीतर और राज्य में ही गोकुल के दूध की भारी मांग है और अभी तक गोकुल का दूध पूरे भारत में भी नहीं पहुंचा है, तो केवल मुस्लिम देशों को ही उत्पाद बेचने की इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है? यह बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब भारत सरकार की आधिकारिक संस्थाएं जैसे ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण’ (FSSAI) और ‘खाद्य एवं औषधि प्रशासन’ (FDA) अस्तित्व में हैं, तो फिर अलग से धर्म-आधारित प्रमाणपत्र की क्या आवश्यकता है? यह देश के धर्मनिरपेक्ष संविधान और सरकारी संस्थाओं का स्पष्ट अपमान है। हलाल प्रमाणीकरण के अवैध होने के कारण ही उत्तर प्रदेश में इस पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है।

हलाल प्रमाणपत्र के माध्यम से देश में एक अत्यंत घातक और समानांतर अर्थव्यवस्था खड़ी की जा रही है। यह प्रमाणपत्र देने वाली ‘जमीयत उलेमा हिंद’ जैसी संस्थाएं इस माध्यम से मिलने वाले धन का उपयोग जिहादी आतंकवादियों के अदालती मुकदमे लड़ने के लिए करती हैं। ऐसे में गोकुल का दूध पीने वाले हिन्दू ग्राहकों का खून-पसीने का पैसा अप्रत्यक्ष रूप से देश विरोधी गतिविधियों और आतंकवादियों की रिहाई के लिए क्यों इस्तेमाल हो? यदि यह दूध ‘हलाल’ प्रमाणित है, तो इसके लिए बहुसंख्यक हिन्दू अपना पैसा क्यों दें? इस राष्ट्रीय संकट को गंभीरता से लेते हुए मांग की गई है कि इस प्रमाणपत्र को तत्काल रद्द किया जाए और जिस तत्कालीन अध्यक्ष एवं संचालक मंडल के कार्यकाल में यह निर्णय लिया गया, उसकी गहन जांच की जाए।
इस बीच, गोकुल के प्रशासकों ने शिष्टमंडल को आश्वासन दिया है कि इस पूरे मामले पर प्रशासनिक मंडल की आगामी बैठक में विस्तृत चर्चा कर उचित निर्णय लिया जाएगा। इस गंभीर विषय पर प्रशासन से जवाब मांगने के लिए कोल्हापुर के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी बड़ी संख्या में एकत्र हुए थे। इस अवसर पर हिन्दू जनजागृती समिति के श्री. शिवानंद स्वामी, महाराजा प्रतिष्ठान के श्री. निरंजन शिंदे, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के श्री. राजू यादव, हिन्दू एकता आंदोलन के श्री. गजानन तोडकर सहित बजरंग दल, मंदिर महासंघ, मराठा तितुका मेलवावा, हिन्दू महासभा, मानवाधिकार संगठन, पॉजिटिव वॉच और हिन्दू विधिज्ञ परिषद के कई प्रमुख पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे।
28 मई
कोल्हापुर : दूध से लेकर घी तक… ‘गोकुल’ उत्पादों पर ‘हलाल’ प्रमाणपत्र; हिंदू समाज में बढा आक्रोश
करोड़ों हिंदुओं के भरोसे वाले ‘गोकुल’ को आखिर ‘हलाल’ प्रमाणपत्र की आवश्यकता क्यों ?

कोल्हापुर – पश्चिम महाराष्ट्र के प्रसिद्ध ‘कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ’ अर्थात ‘गोकुल’ के कुछ उत्पादों ने ‘हलाल’ प्रमाणपत्र प्राप्त किया है । गोकुल के घी, मक्खन तथा दूध पाउडर जैसे उत्पादों के लिए यह प्रमाणपत्र लिया गया है । इस संदर्भ में सामाजिक माध्यमों पर प्रमाणपत्र की एक प्रति प्रसारित हुई है, जिसमें १९ मार्च २०२५ को प्रमाणपत्र लागू होने तथा १८ मार्च २०२८ तक मान्य होने की जानकारी दिखाई दे रही है । इस विषय को लेकर सामान्य हिन्दू ग्राहकों तथा हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों द्वारा तीव्र असन्तोष व्यक्त किया जा रहा है ।
Gokul Milk Union’s products including ghee, butter, and milk powder have reportedly received Halal certification, leading to fresh discussions on social media and in political circles. After the information became public, many people started raising questions and sharing… pic.twitter.com/5jUq9JlAWa
— Pune Mirror (@ThePuneMirror) May 28, 2026
पूर्णतः शाकाहारी दुग्ध उत्पादों के लिए हलाल प्रमाणपत्र की आवश्यकता ही क्या है ?’ ऐसा प्रश्न सामाजिक माध्यमों पर पूछा जा रहा है । विरोधकों का आरोप है कि चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ के पुत्र नावेद मुश्रीफ द्वारा ‘गोकुल’ के अध्यक्ष रहते हुए यह निर्णय लिया गया ।
आखाती देशों में निर्यात हेतु प्रमाणपत्र – चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ
इस विषय पर पत्रकारों के प्रश्न का उत्तर देते हुए चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने कहा, “यह प्रमाणपत्र वर्ष २०२२ में ही लिया गया था । अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए यह एक तकनीकी एवं गुणवत्ता संबंधी मानक है । गोकुल का घी, मक्खन तथा दूध पाउडर बडी मात्रा में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, तुर्किये, जॉर्डन तथा सीरिया जैसे देशों में निर्यात किया जाता है । इन देशों के व्यापार नियमों के अनुसार ‘हलाल प्रमाणपत्र’ के बिना खाद्य उत्पादों की बिक्री की अनुमति नहीं मिलती, इसलिए यह प्रमाणपत्र लिया गया है ।”
‘हलाल’ प्रमाणपत्र क्या होता है ?
इस्लाम के अनुसार ‘हलाल’ का अर्थ है जो वैध या अनुमत हो । पहले ‘हलाल’ केवल मांस तक सीमित था, किन्तु अब गृह उपयोग की वस्तुएं, औषधियां, सौंदर्य प्रसाधन आदि अनेक वस्तुओं के लिए भी ‘हलाल’ प्रमाणपत्र लिया जाता है । अर्थात् यह प्रमाणित किया जाता है कि संबंधित उत्पाद इस्लामी मानकों के अनुसार है । इसके लिए कुछ इस्लामी संस्थाएं कार्यरत हैं एवं उनके द्वारा स्वीकृत प्रमाणपत्र को ‘हलाल’ प्रमाणपत्र कहा जाता है ।
कुछ लोगों का मत है कि ‘हलाल’ प्रमाणन के माध्यम से अलग आर्थिक व्यवस्था को बढावा देने का प्रयास किया जा रहा है । वहीं समर्थकों का कहना है कि यह मुख्यतः मुस्लिम उपभोक्ताओं की धार्मिक आवश्यकताओं तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार मानकों को ध्यान में रखकर किया जाता है ।
स्रोत : हिंदी सनातन प्रभात








