देवस्थान इनाम कानून स्थगित करने के लिए राजस्व मंत्री का आभार!
महाराष्ट्र मंदिर महासंघ, अष्टविनायक मंदिर, विश्व हिंदू परिषद और मंदिर ट्रस्टियों के संघर्ष को बड़ी सफलता!
राज्य के राजस्व मंत्री मा. चंद्रशेखर बावनकुळे ने आज नागपुर में ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम उन्मूलन प्रारूप 2026’ इस प्रस्तावित कानून को स्थगित करने की महत्वपूर्ण घोषणा की है। हम इस मंदिर-हितैषी निर्णय का तहे दिल से स्वागत करते हैं। इस कानून के संदर्भ में मंदिर ट्रस्टियों (विश्वस्तों) के पक्ष में राज्य भर में ट्रस्टियों की बैठकों में अध्ययनपूर्ण विषय प्रस्तुत कर, पत्रकार वार्ताओं, देवस्थान भूमि संरक्षण परिषदों का आयोजन कर सरकार को सकारात्मक निर्णय लेने की दिशा देने वाले ‘महाराष्ट्र मंदिर महासंघ’, ‘अष्टविनायक मंदिर समिति’, ‘विश्व हिंदू परिषद’ और राज्य भर के समस्त मंदिर ट्रस्टियों का हम सहर्ष अभिनंदन करते हैं। यह निर्णय सभी मंदिर ट्रस्टियों और समस्त हिंदूवादी संगठनों के संगठित संघर्ष और प्रयासों की बड़ी सफलता है, ऐसा महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के संगठनकर्ता श्री सुनील घनवट ने कहा है।
महसूलमंत्री मा. चंद्रशेखर बावनकुळे यांनी ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन प्रारूप २०२६’ कायदा स्थगित केल्याबद्दल आभार!👏🏻
महाराष्ट्र मंदिर महासंघ, अष्टविनायक 🛕, विश्व हिंदु परिषद व मंदिर विश्वस्त यांच्या लढ्याला मोठे यश!🚩✊🏼या मंदिरहितैषी निर्णयाचे आम्ही मनःपूर्वक स्वागत करतो pic.twitter.com/ehk7oTVxUz
— Mandir Mahasangh (@mandirmahasangh) June 6, 2026
राजस्व मंत्री द्वारा प्रस्तुत सूत्रों पर मंदिर महासंघ की भूमिका स्पष्ट करते हुए श्री सुनील घनवट ने कहा कि , देवस्थान की इनाम भूमि पुनः मंदिरों को वापस दिलाना, वक्फ बोर्ड की तर्ज पर सरकार द्वारा वहां से अतिक्रमण हटाना, कानूनी लड़ाई के लिए प्रतिष्ठित वकीलों की सलाह लेना, और 100-200 वर्षों के पुराने कब्जों (वहीवाट) के संबंध में मंदिरों का नुकसान न होने देते हुए पास के क्षेत्र में ‘समान मूल्य’ का भूखंड मंदिर को आवंटित करने का अनिवार्य प्रावधान करना; राजस्व मंत्री के ये निर्णय अत्यंत स्वागत योग्य और मंदिर के हित में हैं। इसके साथ ही, 15 अगस्त तक की सुनवाई प्रक्रिया के लिए गठित की जाने वाली अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) की 15 सदस्यीय समिति में देवस्थान के प्रतिनिधियों को स्थान देने की भूमिका का हम स्वागत करते हैं।
🟧 06 – 06 – 2026 | 📍नागपूर | माध्यमांशी संवाद
देवस्थानांच्या अतिक्रमित जमीनी देवस्थानांना परत मिळाव्या याकरिता सरकारने महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन कायदा आणण्याचा विचार केला होता. पाच मे रोजी कायदा नागरिकांच्या सूचना व हरकतींसाठी प्रसिद्ध करण्यात आला. एक महिन्याच्या… pic.twitter.com/Y8tvmOeEmo
— Chandrashekhar Bawankule (@cbawankule) June 6, 2026
सरकार ने मंदिर हित में कई निर्णय लिए हैं, फिर भी हिंदू मंदिरों की सर्वांगीण सुरक्षा के लिए हमारे मंदिर ट्रस्टियों के प्रस्ताव में शामिल अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों को इस नई प्रक्रिया और कानून में शामिल किया जाना चाहिए, यह हमारी पुरजोर मांग है। भक्तों द्वारा अर्पित की गई निधि का उपयोग केवल हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार, मंदिरों के जीर्णोद्धार और हिंदू समाज की धार्मिक आवश्यकताओं के लिए ही किया जाना चाहिए; इसे किसी भी गैर-धार्मिक (धर्मनिरपेक्ष) या सरकारी योजनाओं पर खर्च नहीं किया जाना चाहिए। राजनीतिक साठगांठ से मंदिरों के धन का उपयोग बंद होना चाहिए । राज्य के छोटे और उपेक्षित मंदिरों के पुनर्निर्माण के लिए बड़े मंदिरों की निधि का उचित उपयोग किया जाना चाहिए और गांवों में निस्वार्थ भाव से भगवान की सेवा करने वाले गुरव, पुजारी, पुरोहित और अन्य सेवादारों के लिए प्रति माह न्यूनतम 10,000 से 15,000 रुपये मानदेय (निर्वाह निधि) शुरू की जानी चाहिए।
‘देवस्थान इनाम निर्मूलन कानून’ रद्द करने की मांग को लेकर मंदिर महासंघ द्वारा महाराष्ट्र में ज्ञापन प्रस्तुति एवं पत्रकार वार्ता
राजस्व मंत्री के साथ बैठक में राज्य के मंदिर ट्रस्टियों ने ‘देवस्थान इनाम उन्मूलन मसौदे’ का किया तीव्र विरोध
आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराने के लिए 30 जून तक समयसीमा बढ़ाने का राजस्व मंत्री का आश्वासन!

मुंबई : ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम उन्मूलन अधिनियम’ के प्रस्तावित मसौदे को तत्काल रद्द करने की मांग को लेकर अष्टविनायक मंदिर, विदर्भ देवस्थान समिति, विभिन्न प्रमुख मंदिरों के ट्रस्टियों और महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के पदाधिकारियों की 26 मई, 2026 को मंत्रालय में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि ‘मंदिर ट्रस्टियों की मांग पर पूरी गंभीरता से विचार किया जाएगा।’ इसके साथ ही माननीय मंत्री महोदय ने राज्य भर में मंदिरों की जमीनों पर हुए अवैध अतिक्रमणों को हटाने और उक्त प्रस्तावित कानून के मसौदे पर आपत्तियां व सुझाव दर्ज कराने की अंतिम तिथि को 30 जून, 2026 तक बढ़ाने का आश्वासन दिया। यह महत्वपूर्ण जानकारी महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संगठक श्री सुनील घनवट ने दी।
🛕 महसूलमंत्र्यांच्या बैठकीत राज्यातील मंदिर विश्वस्तांनी नोंदवला ‘देवस्थान इनाम निर्मूलन प्रारुपाला’ तीव्र विरोध !
🗓 सूचना आणि हरकती यांसाठी ३० जूनपर्यंत मुदतवाढीचे महसूलमंत्र्यांचे आश्वासन !@RanjitSavarkar @ssvirendra @Ramesh_hjs
📞 7020383264
#Bill_Against_Temple_Land pic.twitter.com/QDLgSKvHuK
— Mandir Mahasangh (@mandirmahasangh) May 27, 2026
इस बैठक में स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक के कार्यकारी अध्यक्ष श्री रणजित सावरकर, हिंदू विधिज्ञ परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर, राष्ट्रीय वारकरी परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष ह.भ.प. बापू रावकर, श्री मयूरेश्वर (मोरगांव), श्री चिंतामणी (थेऊर), श्री सिद्धिविनायक (सिद्धटेक) और श्री मोरया गोसावी संजीवन समाधि मंदिर आदि का प्रबंधन देखने वाले ‘चिंचवड़ देवस्थान ट्रस्ट’ के ट्रस्टी श्री केशव विद्वांस, पाली स्थित श्री बल्लालेश्वर देवस्थान के अध्यक्ष श्री जितेंद्र गद्रे एवं उपाध्यक्ष श्री वैभव आपटे, हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री रमेश शिंदे, विदर्भ देवस्थान समिति के संस्थापक अध्यक्ष श्री अनुप जैसवाल, अमरावती के श्री पिंगळाई माता देवस्थान के श्री विनोद पाखोडे सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। प्रमुख पदाधिकारियों ने मंदिरों की भूमि पर हुए अतिक्रमण, पुजारियों और ट्रस्टियों की विस्तृत समस्याओं को राजस्व मंत्री के समक्ष रखा, साथ ही प्रस्तावित कानून की गंभीर कमियों की ओर उनका ध्यान आकर्षित किया।

मंदिर ट्रस्टियों ने पुरजोर मांग की कि ‘मंदिरों की इनामी भूमि को बेचने या हस्तांतरित करने के बजाय, महाराष्ट्र सरकार को उन जमीनों से अवैध अतिक्रमण हटाने की ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।’ इस पर सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन देते हुए राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, ‘इस अधिनियम के बारे में अधिक से अधिक ट्रस्टी अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकें, इसके लिए विभागीय आयुक्तों सहित तहसीलदार और जिलाधिकारी कार्यालयों को भी इन्हें स्वीकार करने के निर्देश दिए जाएंगे।’
प्रस्तावित कानून रद्द होने तक तीव्र विरोध जारी रहेगा! – मंदिर महासंघ
महाराष्ट्र देवस्थान इनाम उन्मूलन अधिनियम का समस्त मंदिर ट्रस्टी और महाराष्ट्र मंदिर महासंघ दृढ़ता से विरोध करते हैं। वर्तमान सरकार हिंदुत्वनिष्ठ है, इसलिए सरकार को मंदिरों के हित में कानून बनाना चाहिए। जब तक मंदिरों की इनामी भूमि को बेचने के इस प्रस्तावित कानून के मसौदे को पूरी तरह से रद्द नहीं किया जाता, तब तक हमारा विरोध जारी रहेगा। श्री सुनील घनवट ने इस अवसर पर मीडिया से बात करते हुए राज्य के सभी मंदिर ट्रस्टियों, पुजारियों, श्रद्धालुओं और आम नागरिकों से इस अध्यादेश के विरोध में जल्द से जल्द अपनी लिखित आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराने का आह्वान किया।
22 मई
देवस्थान इनाम निर्मूलन मसौदे के विरोध में हिंदू समाज आक्रामक
मुख्यमंत्री से लेकर तहसीलदारों तक पहुंचे 300 से अधिक ज्ञापन

महाराष्ट्र सरकार के राजस्व एवं वन विभाग द्वारा प्रस्तावित ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम उन्मूलन प्रारूप अधिनियम, 2026’ राज्य के हजारों हिंदू देवस्थानों की जमीनें छीनने वाला और उनके अस्तित्व को संकट में डालने वाला है। सरकार आगामी मानसून सत्र में इस कानून को पारित करने की तैयारी में है, जिसके कारण इस अन्यायी कानून के विरुद्ध महाराष्ट्र मंदिर महासंघ सहित राज्य के अष्टविनायक मंदिरों और सभी प्रमुख मंदिरों के 1,000 से अधिक ट्रस्टी, मंदिर प्रतिनिधि और हिंदू संगठन एकजुट हो गए हैं।
इस कानून के विरोध में राज्यभर के मंदिर ट्रस्टियों ने सीधे माननीय मुख्यमंत्री, माननीय उपमुख्यमंत्री, कई मंत्रियों, राज्यमंत्रियों, विधायकों के साथ-साथ सभी विभागीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों, प्रांत अधिकारियों और तहसीलदारों को एक ही समय में 300 से अधिक ज्ञापन सौंपे हैं। इन ज्ञापनों के माध्यम से एक स्वर में मांग की गई है कि हिंदू देवस्थानों के अस्तित्व को समाप्त करने वाले इस दमनकारी कानून को सरकार बिना किसी शर्त के तुरंत वापस ले। इस जन-आक्रोश का संज्ञान लेते हुए राज्य के कई विधायकों ने भी जनभावनाओं का सम्मान करते हुए मंदिर प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया है कि “वे आगामी मानसून सत्र में इस कानून का कड़ा विरोध करेंगे।”

इस ज्ञापन में कहा गया है कि छत्रपती शिवाजी महाराज और ऐतिहासिक राजवंशों ने मंदिरों के नैवेद्य, अन्नक्षेत्र और उत्सवों के सुचारू संचालन के लिए सैकड़ों एकड़ जमीन ‘इनाम’ के रूप में मंदिरों के नाम की थी। प्रस्तावित कानून की धारा 3 और 4 के कारण इन सभी इनामों को एक झटके में रद्द करके, भगवान को दान की गई इन जमीनों को निजी हाथों में सौंपने की साजिश रची जा रही है। इस कानून की धारा 1 (उपधारा 2) अत्यंत पक्षपातपूर्ण है, जिसके तहत वक्फ बोर्ड की जमीनों को इस कानून से पूरी तरह बाहर रखकर विशेष संरक्षण दिया गया है। एक तरफ हिंदू मंदिरों की जमीनें छीनी जा रही हैं, तो दूसरी तरफ जिस वक्फ ने हजारों हिंदुओं की जमीनों पर अवैध कब्जा कर रखा है, उसकी जमीनों को संरक्षण दिया जा रहा है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि हिंदुओं के वोटों से चुनी गई सरकार ही ऐसा धार्मिक भेदभाव कर रही है। इस मसौदे की धारा 18 के अनुसार, राजस्व अधिकारियों के किसी भी मनमाने फैसले के विरुद्ध श्रद्धालुओं या ट्रस्टियों को सिविल कोर्ट (दिवाणी न्यायालय) में जाने का अधिकार नहीं होगा; यानी हिंदुओं के लिए लोकतंत्र में अदालत के दरवाजे बंद किए जा रहे हैं। देवस्थान की जमीनों से अवैध अतिक्रमण हटाने के बजाय, 1 जनवरी 2011 से पहले के अतिक्रमणकारियों को सीधे मालिकाना हक देना देवस्थान की पवित्र संपत्ति की कानूनी लूट के समान है।
इस राज्यव्यापी आंदोलन का संज्ञान लेते हुए रत्नागिरी के पालकमंत्री ना. उदय सामंत ने “यह कानून लागू न करने” के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखने का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही, मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय समन्वयक श्री सुनील घनवट ने स्वयं माननीय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और माननीय उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से प्रत्यक्ष भेंट कर इस कानून के प्रति अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इस पर माननीय मुख्यमंत्री और माननीय उपमुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि वे जल्द ही राजस्व मंत्री के साथ इस विषय पर एक विशेष बैठक करेंगे।
अनेक स्थानों पर पत्रकार परिषद
सावंतवाडी

महाराष्ट्र शासन के राजस्व एवं वन विभाग द्वारा प्रस्तावित ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन प्रारूप अधिनियम 2026’ राज्य के हजारों हिंदू देवस्थानों के स्वायत्त अस्तित्व तथा उनकी आय के पारंपरिक स्रोतों को समाप्त करने वाला कानून है। इस कानून के प्रारूप में अनेक गंभीर कानूनी त्रुटियां हैं। यह कानून हिंदुओं के धार्मिक स्वतंत्रता और संपत्ति अधिकारों पर सीधा आघात करने वाला है, इसलिए इस कानून को किसी भी स्थिति में लागू नहीं होने देंगे, ऐसी चेतावनी सिंधुदुर्ग जिले के मंदिर ट्रस्टियों ने यहां आयोजित पत्रकार परिषद में दी।
यह पत्रकार परिषद सावंतवाड़ी नगर परिषद के पत्रकार कक्ष में आयोजित की गई। इस अवसर पर सनातन संस्था के धर्मप्रचारक सद्गुरु सत्यवान कदम, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के राज्य संयोजक श्री संजय जोशी, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के सिंधुदुर्ग जिला संयोजक श्री शिवराम देसाई, श्री यशवंत परब, हिंदू जनजागृति समिति के श्री राजेंद्र पाटील तथा श्री वीरेश माईणकर उपस्थित थे।
जलगांव

सोलापुर

पुणे में महाराष्ट्र मंदिर महासंघ और अष्टविनायक मंदिर समिति की बैठक संपन्न !

महाराष्ट्र की सांस्कृतिक अस्मिता तथा करोडों हिंदुओं की श्रद्धा के केंद्र रहे अष्टविनायक देवस्थानों की सैकडों एकड भूमि को संकट में डालने वाले ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन प्रारूप अधिनियम, 2026’ को राज्य सरकार बिना किसी शर्त के तत्काल वापस ले, इस मांग को लेकर 18 मई को पुणे के सारसबाग में ‘श्री अष्टविनायक मंदिर समिति’ और महाराष्ट्र मंदिर महासंघ की ओर से एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में महाराष्ट्र में प्रस्तावित मंदिर भूमि संबंधी कानून का विरोध करने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में अष्टविनायक मंदिर समिति की ओर से श्री मयूरेश्वर (मोरगांव), श्री चिंतामणि (थेऊर), श्री सिद्धिविनायक (सिद्धटेक), श्री मोरया गोसावी संजीवन समाधि मंदिर आदि का प्रबंधन देखने वाले ‘चिंचवड देवस्थान ट्रस्ट’ के ट्रस्टी श्री केशव विद्वांस, श्री बल्लाळेश्वर देवस्थान (पाली) ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री जितेंद्र गद्रे, ट्रस्ट के डॉ. पिनाकिन कुंटे, ‘श्री विघ्नहर गणपति देवस्थान ट्रस्ट, ओझर’ के ट्रस्टी श्री गणेश टेंभेकर तथा महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक श्री सुनील घनवट आदि उपस्थित थे।
यह कानून हिंदू मंदिरों को नष्ट करने का षड्यंत्र है ! – डॉ. पिनाकिन कुंटे, ट्रस्टी, श्री बल्लाळेश्वर देवस्थान, पाली
यह कानून हिंदू मंदिरों और संस्कृति की मूल आत्मा को नष्ट करने का एक बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र है। एक ओर देश में रक्षा और रेलवे के बाद सबसे अधिक भूमि रखने वाले ‘वक्फ बोर्ड’ के कानून को छूने का साहस सरकार नहीं दिखाती, वहीं दूसरी ओर हिंदू मंदिरों की भूमि हड़पकर उसे बिल्डरों और भ्रष्ट राजनेताओं को सौंपने का प्रयास किया जा रहा है।
देवभूमि की रक्षा के लिए सभी हिंदुओं को संगठित होकर इस कानून का कड़ा विरोध करना आवश्यक है।
हिंदू देवस्थानों को पूरी तरह कमजोर कर नष्ट करने का सुनियोजित षड्यंत्र – केशव विद्वांस, ट्रस्टी, चिंचवड देवस्थान ट्रस्ट
इस कानून की संपूर्ण संरचना को देखते हुए स्पष्ट होता है कि भविष्य में हिंदू देवस्थानों को पूरी तरह कमजोर कर समाप्त करने की यह एक सुनियोजित साजिश है। वर्तमान में अधिकांश मंदिरों की आय अत्यंत कम हो चुकी है। विशेष बात यह है कि चिंचवड देवस्थान की भूमि पर अनेक शासकीय कार्यालय और पिंपरी-चिंचवड क्षेत्र के कई उद्यान बने होने के बावजूद सरकार की ओर से देवस्थान को कोई आर्थिक प्रतिफल (भाड़ा अथवा आय) नहीं दिया जाता। इतना ही नहीं, पूर्व में जिन लोगों को देवस्थान की भूमि भोगवटेदार अथवा उपयोगकर्ता के रूप में दी गई थी, उनसे भी देवस्थान को कोई आय प्राप्त नहीं होती तथा कई भूमियों से तो देवस्थान का नाम तक हटा दिया गया है।
हिंदू देवस्थान भूमि का संरक्षण होने पर धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा – जितेंद्र गद्रे, अध्यक्ष, श्री बल्लाळेश्वर देवस्थान ट्रस्ट, पाली
देश की आर्थिक वृद्धि में प र्यटन का अत्यंत महत्त्वपूर्ण योगदान है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पर्यटन में धार्मिक पर्यटन की हिस्सेदारी 65 प्रतिशत है। यदि देवस्थान की भूमि पर श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क वाहन पार्किंग, निवास व्यवस्था तथा ‘थीम पार्क’ जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी, जिससे देवस्थान, हिंदू धर्म और देश – तीनों का विकास होगा। वर्तमान में देवस्थान भूमि का प्रश्न अत्यंत गंभीर बन चुका है। छिपे हुए (‘हिडन’) देवस्थानों की खोज कर एक व्यापक आंदोलन खड़ा करना आवvश्यक है।
सरकार तत्काल देवस्थान भूमि पर हुए सभी अतिक्रमण हटाए – गणेश टेंभेकर, ट्रस्टी, श्री विघ्नहर गणपति देवस्थान ट्रस्ट
वास्तव में सरकार को हिंदू संस्कृति की आधारशिला माने जाने वाले देवस्थानों की भूमि को अधिक सशक्त बनाने और मंदिरों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी करने के लिए प्रयास करना चाहिए; किंतु इसके विपरीत सरकार स्वयं ही देवस्थान की भूमि हड़पने का प्रयास कर रही है, जो अत्यंत निंदनीय है। वर्तमान में अधिकांश देवस्थानों के पास बहुत कम भूमि शेष रह गई है। इसलिए सरकार को तुरंत कदम उठाकर देवस्थान भूमि पर हुए सभी अतिक्रमण हटाने चाहिए।
मंदिरों पर हो रहे अन्याय को रोकने हेतु वक्फ बोर्ड की भूमि मूल धारकों को लौटाई जाए – सुनील घनवट, राष्ट्रीय संयोजक, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ
वर्तमान तथाकथित धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था में केवल हिंदुओं को प्रभावित करने वाला यह कानून बनाया जा रहा है, जबकि देश में दूसरी-तीसरी सबसे अधिक भूमि (महाराष्ट्र में 1 लाख एकड़ तथा देशभर में 39 लाख एकड) रखने वाले वक्फ बोर्ड की भूमि को इस कानून से पूरी तरह बाहर रखकर सुरक्षित किया गया है।
इस अन्याय को रोकने के लिए वक्फ बोर्ड की भूमि मूल धारकों को लौटाने की मांग करते हुए, इस अन्यायपूर्ण मसौदे को पूरी तरह निरस्त करने हेतु 5 जून से पहले अधिकाधिक आपत्तियां विभागीय आयुक्तों के समक्ष दर्ज कराने, अधिवक्ताओं की समिति गठित करने तथा गुजरात और कर्नाटक की तरह 14 वर्ष के कठोर दंड का प्रावधान रखने वाला ‘एंटी लैंड ग्रैबिंग एक्ट’ महाराष्ट्र में लागू करने के लिए सभी हिंदुओं को संगठित होकर लोकतांत्रिक और कानूनी संघर्ष खड़ा करना आवश्यक है।
18 मई
देवस्थान इनाम उन्मूलन कानून के विरुद्ध एकजुट हुए अष्टविनायक मंदिर!

पुणे : “महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान और करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र, अष्टविनायक देवस्थानों की सैकड़ों एकड़ भूमि को खतरे में डालने वाले ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम उन्मूलन प्रारूप अधिनियम, 2026’ को राज्य सरकार बिना किसी शर्त के तुरंत वापस ले,” ऐसी मांग आज यहां आयोजित अष्टविनायक मंदिरों के ट्रस्टियों की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई। राजस्व और वन विभाग द्वारा आगे बढ़ाया गया यह मसौदा हिंदू मंदिरों की स्वायत्तता और उनके आय के ऐतिहासिक स्रोतों को जड़ से खत्म करने की एक सुनियोजित साजिश है। एक तरफ अल्पसंख्यक संस्थानों (वक्फ) को कानूनी सुरक्षा कवच देना और दूसरी ओर हिंदुओं के पवित्र मंदिरों की संपत्ति निजी हाथों में सौंपना—यह सरकारी भेदभाव अष्टविनायक मंदिर कभी स्वीकार नहीं करेंगे। ‘चिंचवड देवस्थान ट्रस्ट’ के ट्रस्टी श्री केशव विद्वांस ने अष्टविनायक मंदिरों की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से स्पष्ट किया कि सभी अष्टविनायक मंदिर इस प्रस्तावित कानून का कड़ा विरोध करते हैं।
🚩Immediately revoke the proposed law to grant Devasthan lands to occupants; otherwise, an intense state-wide mass agitation will be launched! – Shri. Sunil Ghanwat, Maharashtra Mandir Mahasangh
If Waqf properties are being protected, why are Hindu temple lands being handed out?… pic.twitter.com/8M28HhO4Sa
— Sunil Ghanwat 🛕🛕 (@SG_HJS) May 6, 2026
पुणे में आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में अष्टविनायक मंदिर समिति की ओर से श्री मयूरेश्वर (मोरगांव), श्री चिंतामणि (थेउर), श्री सिद्धिविनायक (सिद्धटेक), श्री मोरया गोसावी संजीवन समाधि मंदिर आदि का प्रबंधन देखने वाले चिंचवड देवस्थान ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री केशव विद्वांस, श्री बल्लालेश्वर देवस्थान (पाली) ट्रस्ट के श्री जितेंद्र गद्रे, उपाध्यक्ष श्री वैभव आपटे, श्री विघ्नहर गणपति देवस्थान ट्रस्ट ओझर के अध्यक्ष श्री बालकृष्ण कवड़े, श्री गणपति देवस्थान महड के ट्रस्टी श्री किरण काशीकर और महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संगठक श्री सुनील घनवट उपस्थित थे।
राज्य के सभी देवस्थानों पर मंडरा रहे इस संभावित संकट के कारण अब महाराष्ट्र का सांस्कृतिक और धार्मिक गौरव माने जाने वाले पवित्र अष्टविनायक मंदिर भी इसके विरोध में आगे आए हैं और उन्होंने इस कानून का पुरजोर विरोध किया है।
चिंचवड देवस्थान ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री केशव विद्वांस ने कहा कि , “छत्रपति शिवाजी महाराज, पेशवा और ऐतिहासिक राजवंशों ने मोरगांव, सिद्धटेक, पाली, महड, थेउर, लेण्याद्रि, ओझर और रांझाणगांव के इन अष्टविनायक मंदिरों में त्रिकाल पूजा-अर्चना, महाप्रसाद, अखंड अन्नक्षेत्र, नैवेद्य और वार्षिक उत्सवों के सुचारू संचालन के लिए सैकड़ों एकड़ जमीन ‘इनाम’ (उपहार/अनुदान) के रूप में दी थी। कानूनी नियमों के अनुसार, मंदिर की ‘मूर्ति’ ही एक ‘कानूनी व्यक्ति’ (Juristic Person) है और इन जमीनों की एकमात्र मालिक है; लेकिन इस प्रस्तावित कानून की धारा 3 और 4 के कारण एक झटके में ये ऐतिहासिक इनाम रद्द हो जाएंगे और देवता की जमीनें काश्तकारों, मिरासदारों या पुजारियों के नाम पर निजी संपत्ति के रूप में स्थानांतरित कर दी जाएंगी।”
“इसके परिणामस्वरूप, जिन जमीनों का उपयोग पीढ़ियों से केवल गणपती बाप्पा के धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए किया जाता रहा है, उनका व्यावसायीकरण हो जाएगा। वहां कमर्शियल मॉल या होटल खड़े हो जाएंगे और भू-माफियाओं के गिरोह मंदिरों की जमीन हड़प लेंगे। आय का मूल स्रोत नष्ट होने के कारण, ये स्वाभिमानी देवस्थान भविष्य में सरकारी अनुदान पर निर्भर और लाचार हो जाएंगे, ऐसी गंभीर और जायज आशंका पैदा हो गई है।”
श्री बल्लालेश्वर देवस्थान (पाली) ट्रस्ट के श्री जितेंद्र गद्रे ने कहा कि , “इस मसौदे की धारा 1 (उपधारा 2) अत्यंत पक्षपातपूर्ण और निंदनीय है, जिसके तहत वक्फ बोर्ड के नियंत्रण वाली जमीनों को इस कानून से पूरी तरह बाहर रखकर विशेष संरक्षण दिया गया है। केवल हिंदू मंदिरों की जमीनों का ‘उन्मूलन’ करना और अन्य धर्मों के संस्थानों को संरक्षण देना, संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत ‘समानता के अधिकार’ का सीधा उल्लंघन है। धर्मनिरपेक्षता की नीति का पालन करने वाले राज्य में बहुसंख्यक हिंदू समाज और उनके मंदिरों के साथ ऐसा सौतेला व्यवहार अत्यंत आपत्तिजनक है।”
“इस कानून की धारा 18 के अनुसार, राजस्व अधिकारियों (तहसीलदार या कलेक्टर) द्वारा लिए गए किसी भी मनमाने फैसले के खिलाफ श्रद्धालुओं या देवस्थान के ट्रस्टियों को सिविल कोर्ट (दिवानी न्यायालय) में जाने की अनुमति नहीं होगी, जो कि एक अलोकतांत्रिक प्रावधान है। अदालत के दरवाजे बंद करके सरकार प्रशासनिक तानाशाही थोपना चाहती है। इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि देवस्थान की जमीनों से अवैध अतिक्रमण हटाने के बजाय, 1 जनवरी 2011 से पहले के अतिक्रमणकारियों को सीधे मालिकाना हक देना देवस्थान की पवित्र संपत्ति की कानूनी लूट के समान है।”
इस अवसर पर सभी मंदिरों की ओर से सरकार के समक्ष मांगें रखते हुए मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय समन्वयक श्री सुनील घनवट ने कहा कि, “सबसे पहले, हिंदू देवस्थानों के अस्तित्व को खतरे में डालने वाले इस दमनकारी मसौदे को सरकार बिना किसी शर्त के तुरंत और हमेशा के लिए रद्द करे। आम श्रद्धालुओं, ग्रामीणों और सुदूर क्षेत्रों के मंदिरों तक इस विषय को पहुंचाने के लिए आपत्तियां दर्ज कराने की समय-सीमा कम से कम दो महीने बढ़ाई जाए। गुजरात राज्य की तर्ज पर महाराष्ट्र में भी कड़ा ‘भूमि कब्जा निषेध अधिनियम’ (Anti-Land Grabbing Act) लागू कर देवस्थान की जमीनों को विशेष कानूनी संरक्षण दिया जाए। देवस्थान की जमीनों के अवैध हस्तांतरण या बिक्री को हमेशा के लिए रोकने के लिए, 7/12 के दस्तावेजों पर ‘गैर-हस्तांतरणीय’ और ‘देवस्थान भूमि: प्रतिबंधित सत्ता प्रकार’ का स्पष्ट और कानूनी उल्लेख अनिवार्य किया जाए।”
श्री घनवट ने मंदिर महासंघ की ओर से चेतावनी देते हुए कहा कि , “मंदिरों की भूमि केवल जमीन का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह हिंदू संस्कृति और आस्था की पवित्र विरासत है। यदि सरकार ने हिंदू समाज की भावनाओं को कुचलकर इस कानून को जबरन लागू करने का प्रयास किया, तो धार्मिक संगठनों, संप्रदायों, सभी मंदिर ट्रस्टियों, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ और करोड़ों गणेश भक्तों को साथ लेकर पूरे महाराष्ट्र में तीव्र जन-आंदोलन छेड़ा जाएगा।”
मुख्यमंत्री तथा उप-मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रस्तुत
देवस्थान इनाम निर्मूलन अधिनियम के विषय में राजस्व मंत्री (महसूलमंत्री) की उपस्थिति में मंदिर ट्रस्टियों की बैठक लें – ‘महाराष्ट्र मंदिर महासंघ’ के निवेदन पर मुख्यमंत्री के प्रशासन को निर्देश

राज्य के राजस्व विभाग द्वारा ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन अधिनियम’ की रूपरेखा प्रसारित की गई है तथा इस विषय में सुझाव तथा आपत्तियां मांगी गई हैं । राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने आगामी अधिवेशन में यह कानून लाने की बात कही है, परंतु अधिनियम के विषय में राज्य के मंदिरों के ट्रस्टियों में ही असंतोष है । ‘देवस्थानों की इनामी भूमि की बिक्री नहीं की जानी चाहिए’, यह ‘महाराष्ट्र मंदिर महासंघ’ की भूमिका है । इस विषय में महासंघ के राष्ट्रीय समन्वयक श्री . सुनील घनवट ने १४ मई को मंत्रालय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भेंट कर मंदिरों के ट्रस्टियों की भूमिका प्रस्तुत की । इस पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राजस्व मंत्री की उपस्थिति में राज्य के मंदिरों के ट्रस्टियों की बैठक लेने के निर्देश प्रशासन को दिए ।
The proposed 'Maharashtra Devasthan Inam Abolition Draft Act 2026' poses a major difficulty for temple lands and their management. Millions of temple trustees across the state are strongly opposing this law.
In this regard, a memorandum was submitted to the Hon. Chief Minister… pic.twitter.com/eQl42s2t0m
— Sunil Ghanwat 🛕🛕 (@SG_HJS) May 15, 2026
‘देवस्थान इनाम निर्मूलन अधिनियम’ का प्रस्तावित कानून निरस्त करें – ‘महाराष्ट्र मंदिर महासंघ’ की उपमुख्यमंत्री से मांग

‘देवस्थान इनाम निर्मूलन अधिनियम’ का प्रस्तावित कानून निरस्त किया जाए, इस मांग के लिए ‘महाराष्ट्र मंदिर महासंघ’ के राष्ट्रीय समन्वयक श्री. सुनील घनवट ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से १४ मई को मंत्रालय में भेंट कर उन्हें निवेदन किया । उपमुख्यमंत्री ने भी राजस्व मंत्री के साथ बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए हैं ।
मंदिर ट्रस्टियों की भूमिका समझेंगे – राजस्व मंत्री (महसूलमंत्री)
राज्य के राजस्व विभाग द्वारा ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन अधिनियम’ की रूपरेखा प्रसारित की गई है तथा इस विषय में सुझाव तथा आपत्तियां ५ जून तक मांगी गई हैं । इस कानून के माध्यम से मंदिरों की भूमि की बिक्री होने वाली होने के कारण राज्य के मंदिरों के ट्रस्टियों में इस अधिनियम के विषय में असंतोष है । इसलिए मंदिर ट्रस्टियों की भूमिका सरकार को समझनी चाहिए, ऐसी मांग ‘महाराष्ट्र मंदिर महासंघ’ की ओर से राष्ट्रीय समन्वयक श्री. सुनील घनवट ने राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे से की । इस पर २१ मई को राज्य के मंदिरों के ट्रस्टियों के साथ बैठक लेने का आश्वासन राजस्व मंत्री ने दिया है । १४ मई को सुनील घनवट ने मंत्रालय में चंद्रशेखर बावनकुले से भेंट कर यह मांग की ।
राज्य सरकार के महसूल एवं वन विभाग द्वारा प्रस्तावित ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन प्रारूप अधिनियम 2026’ के कारण देवस्थान की भूमियों का अस्तित्व संकट में आ गया है। महाराष्ट्र मंदिर महासंघ ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि, यह कानून हिंदू देवस्थानों का अस्तित्व समाप्त करने और भूमाफियाओं की झोली भरने की साजिश है।
इस कानून का विरोध करने तथा इसे रद्द करने की मांग के लिए मंदिर महासंघ द्वारा महाराष्ट्र में अनेक स्थानों पर ज्ञापन प्रस्तुति हो रही है।
कोल्हापुर में पत्रकार वार्ता
हिंदू देवस्थानों के अस्तित्व पर आघात करने वाले ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन प्रारूप अधिनियम’ को तत्काल वापस लिया जाए ! – सुनील घनवट, राष्ट्रीय संयोजक, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ

कोल्हापुर – महाराष्ट्र शासन के महसूल एवं वन विभाग द्वारा प्रस्तावित ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन प्रारूप अधिनियम २०२६’ राज्य के हजारों हिंदू देवस्थानों के स्वायत्त अस्तित्व तथा उनके आय-स्रोतों को जड़ से समाप्त करने वाला है। इस कानून के मसौदे में अत्यंत गंभीर कानूनी त्रुटियां हैं और यह हिंदू देवस्थानों के धार्मिक एवं संपत्ति अधिकारों पर सीधा प्रहार करने वाला है। देवस्थान मालिकाना अधिकारों के विरोध में बने इस मसौदे का हम तीव्र विरोध करते हैं तथा सरकार इसे बिना किसी शर्त के तुरंत वापस ले, ऐसी मांग कोल्हापुर में आयोजित पत्रकार परिषद में मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक श्री सुनील घनवट ने की। यदि सरकार इस हिंदूविरोधी कानून को लागू करने का प्रयास करेगी, तो पूरे महाराष्ट्र में तीव्र जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा, ऐसी चेतावनी भी श्री घनवट ने दी।
इस अवसर पर मंदिर महासंघ के कोल्हापुर जिला समन्वयक श्री प्रसाद कुलकर्णी, संयोजक श्री प्रमोद सावंत, सहसंयोजक श्री अशोक गुरव, राधाकृष्ण मंदिर के विश्वस्त श्री हसमुखभाई शाह, लक्ष्मीनारायण मंदिर के विश्वस्त श्री राजेंद्र शर्मा तथा श्री संजय देवणे उपस्थित थे।
इस अवसर पर श्री हसमुखभाई शाह ने कहा, “इस कानून का मसौदा तैयार करने से पहले सरकार ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया है। मंदिरों को अपना पक्ष रखने का अवसर तक नहीं दिया गया। जिन लोगों ने देवस्थानों को इनामी भूमि प्रदान की थी, उनका उद्देश्य मंदिरों का निर्वाह सुचारु रूप से चलता रहे, यही था। यह कानून केवल हिंदू मंदिरों पर लागू किया गया है, अन्य धर्मों के धार्मिक स्थलों पर नहीं। ऐसे में ‘धर्मनिरपेक्ष’ व्यवस्था वाले देश में यह कैसे स्वीकार्य हो सकता है ? यह प्रस्तावित कानून बहुसंख्यक हिंदुओं पर सीधा आघात है। इसलिए सरकार को यह प्रस्तावित कानून तुरंत वापस लेना चाहिए।”
श्री अशोक गुरव ने कहा, “मंदिरों और देवस्थानों का दैनंदिन कार्य निर्विघ्न रूप से चलता रहे, इसके लिए देवस्थान की भूमि उसी देवस्थान के स्वामित्व में रहनी चाहिए। इतना ही नहीं, सरकार को मंदिरों के पुजारियों के लिए निश्चित वेतन व्यवस्था भी प्रारंभ करनी चाहिए, ऐसी हमारी मांग है।”
विविध स्थानों पर ज्ञापन प्रस्तुति
1. रायगड

लोकशाहीविरोधी मसुदे का रायगड जिले के अनेक मंदिर न्यासियों (ट्रस्टियों) ने तीव्र निषेध किया है और मांग की है कि सरकार प्रस्तावित अधिनियम को बिना शर्त वापस ले। इस विषय में रायगढ़ के मंदिर न्यासियों ने 20 और 21 मई को सुधागढ़ तहसील कार्यालय में तहसीलदार श्री उत्तम कुंभार को ज्ञापन सौंपा।

यह ज्ञापन सौंपते समय अष्टविनायक में से एक पाली स्थित ‘श्री बल्लाळेश्वर देवस्थान’ के अध्यक्ष श्री जितेंद्र गद्रे के नेतृत्व में, ‘श्री उद्धर रामेश्वर देवस्थान’ के अध्यक्ष श्री प्रदीप तुकाराम लांगी, बल्लाळेश्वर देवस्थान के उपाध्यक्ष श्री वैभव आपटे, ‘रामवाडी देवस्थान’ के श्री राजू पातेंरे, ‘विष्णु देवस्थान’ के श्री योगेश उपाध्ये, ‘पाली देवस्थान’ के श्री प्रमोद पावगी, ‘मारुति देवस्थान’ के अध्यक्ष श्री अभिजित चांदोरकर, ‘मरी माता मंदिर’ के अध्यक्ष श्री संजय घोसाळकर और ‘महाकाली देवस्थान’ के न्यासी श्री महादेव पिंपले तथा महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के प्रतिनिधि श्री राजेंद्र पावसकर सहित 60 से अधिक भक्तगण एवं धर्मप्रेमी उपस्थित थे।
2. छत्रपति संभाजीनगर
महाराष्ट्र सरकार के प्रस्तावित ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन प्रारूप अधिनियम 2026’ के विरोध में महाराष्ट्र मंदिर महासंघ की ओर से छत्रपती संभाजीनगर के जिलाधिकारी कार्यालय में ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन अपर जिलाधिकारी संभाजी अडकुणे को दिया गया।

इस अवसर पर मंदिर महासंघ के साथ ह.भ.प. अरुण महाराज पिंपले, छत्रपती शिवराय प्रतिष्ठान, श्री घृष्णेश्वर मंदिर देवस्थान ट्रस्ट, श्री भद्रा मारुति संस्थान, श्री दशमेश नगर विकास संस्था दशमेशनगर, श्री संत काशी विश्वनाथ बाबा संस्थान बीड बायपास के पदाधिकारी उपस्थित थे।
3. जालना

जालना में जिलाधिकारी श्रीमती आशिमा मित्तल को भी ज्ञापन सौंपा गया। इस अवसर पर मंदिर महासंघ, श्री बालाजी मंदिर देवस्थान, श्री नर नारायण मंदिर, श्री अमृतेश्वर महादेव मंदिर और श्री राम मंदिर के पदाधिकारी उपस्थित थे।
4. कोल्हापुर में विविध स्थानों पर दिया गया ज्ञापन
‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन प्रारूप अधिनियम, 2026’ को निरस्त करने की मांग को लेकर महाराष्ट्र मंदिर महासंघ की ओर से मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन कोल्हापुर के जिलाधिकारी डॉ. विजय राठौड़ को सौंपा गया।
इस अवसर पर चंदगढ के भाजपा विधायक शिवाजीराव पाटील भी उपस्थित थे। उन्होंने आश्वासन दिया कि मंदिर महासंघ की मांग उचित है और इस विषय में वे शासन के समक्ष अपनी भूमिका रखेंगे।

कोल्हापुर में ज्ञापन सौंपते समय मंदिर महासंघ के सह-संयोजक श्री अशोक गुरव, ‘जोतिबा देवस्थान’ के पुजारी श्री रणजीत चौगुले एवं श्री ओंकार बनकर, माणगांव स्थित मारुति मंदिर के पुजारी श्री कृष्णात गुरव, श्री हरि पुजारी, उद्धव बालासाहेब ठाकरे पक्ष के उपजिल्हा प्रमुख श्री संभाजीराव भोकरे, ‘महाराजा प्रतिष्ठान’ के संस्थापक श्री निरंजन शिंदे, शिवसेना के उपजिल्हा प्रमुख श्री किशोर घाटगे, ‘नमो नमो’ के जिलाध्यक्ष श्री विक्रमसिंह जरग, सर्वश्री शशी बीडकर, तानाजी आंग्रे, भीमराव पाटील, दत्तात्रय गावडे, हिंदू महासभा के श्री प्रशांत पाटील तथा हिंदू जनजागृति समिति के श्री शिवानंद स्वामी उपस्थित थे।
अ. शाहूवाडी

शाहूवाड़ी के नायब तहसीलदार श्री प्रदीप जाधव ने ज्ञापन स्वीकार किया। इस अवसर पर मंदिर महासंघ के समन्वयक श्री प्रसाद कुलकर्णी, नगरसेवक श्री महेश कोठावळे, पूर्व नगरसेवक श्री उदयसिंह कोकरे-देसाई, सर्वश्री दिलीप गुरव, विजय गुरव, प्रशांत निळकंठ, रमेश पडवळ, जितेंद्र पंडित, अनंत डोणे, विजय मोरबाळे आदि उपस्थित थे।
आ. हातकणंगले

यहां तहसीलदार सुशील बेल्हेकर को ज्ञापन सौंपा गया। इस अवसर पर पुजारी सर्वश्री प्रशांत खोत, रामचंद्र जाधव, अजित कोळी, राहुल कारंडे, भाजपा के श्री अभिजित अरवाडे, श्री रावसाहेब चौगुले, श्री पंकज बुढ्ढे, श्री शिवप्रतिष्ठान हिंदुस्थान के श्री दीपक कोळी, सर्वश्री सचिन डोंगरे, नितीन शिंगे, ऋषिकेश बनकर तथा हिंदू जनजागृति समिति के श्री संतोष सणगर उपस्थित थे।
इ. गडहिंग्लज

गडहिंग्लज में प्रांताधिकारी कार्यालय में ज्ञापन सौंपते समय मंदिर महासंघ के गडहिंग्लज तालुका सह-संयोजक श्री सुभाष चोथे, शिवसेना के श्री संजय संकपाळ, धर्मप्रेमी श्री राहुल खोत तथा हिंदू जनजागृति समिति के श्री वामन बिलावर उपस्थित थे।
ई. शिरोळ

शिरोळ में निवासी नायब तहसीलदार श्रीमती क्रांति पाटील ने ज्ञापन स्वीकार किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के सांगली जिला समन्वयक श्री संजय घाटगे, दत्त मंदिर के प्रमुख विश्वस्त श्री भगवंत जांभळे, सनातन संस्था की साधिका अधिवक्ता (सौ.) मनीषा माने, ‘स्वामी समर्थ संप्रदाय’ के श्री रवींद्र महात्मे, वारकरी संप्रदाय के श्री विलास महात्मे तथा हिंदुत्वनिष्ठ श्री विनायक सावंत आदि उपस्थित थे।
5. सांगली

यहां जिलाधिकारी कार्यालय में निवासी उपजिलाधिकारी डॉ. स्नेहल कनिचे ने ज्ञापन स्वीकार किया। इस अवसर पर ‘हिंदू एकता आंदोलन’ के प्रदेशाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक श्री नितीनराजे शिंदे, मिरज शहराध्यक्ष श्री सोमनाथ गोटखिंडे, जिल्हा उपाध्यक्ष श्री राजू जाधव, सर्वश्री दत्तात्रय भोकरे, अवधूत जाधव, सचिन भोसले, विजयसिंह राजपूत, ‘श्री ज्ञानगिरी मठ’ के श्री शिवप्रसाद सातपुते, श्री वीरभद्र मंदिर के ट्रस्टी श्री अशोक कबाडे, ‘गोकुळनंदन गोशाला’ के श्री नितेश जाधव, ‘गवळी समाज श्रीकृष्ण मंदिर’ के श्री मनोज गवळी, श्री राजू गवळी, हिंदू जनजागृति समिति के श्री संतोष देसाई, मंदिर महासंघ के श्री संजय घाटगे, गोंधळी समाज के श्री नितीन बोरावत तथा अधिवक्ता सुमेध ठाणेदार उपस्थित थे।


चंदगड के विधायक शिवाजीराव पाटील (टोपी पहने हुए) को ज्ञापन सौंपते हुए मंदिर महासंघ के पदाधिकारी, मंदिर ट्रस्टी और हिंदुत्वनिष्ठ


6. अहिल्यानगर

इस अन्यायपूर्ण मसौदे को तत्काल वापस लेने की मांग को लेकर महासंघ की ओर से प.पू. स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक संग्राम जगताप को ज्ञापन सौंपा गया।

ज्ञापन में कहा गया है कि, प्रस्तावित कानून के कारण देवस्थान इनाम भूमियों पर मंदिरों का स्वामित्व समाप्त हो जाएगा और भूमि वहिवाटदारों (कब्जाधारकों) के नाम हो जाएगी, जिससे मंदिरों का आधार ही नष्ट हो जाएगा।
उपस्थित मान्यवर
इस अवसर पर मंदिर महासंघ के जिला संयोजक श्री भरत शिंदे, सहसंयोजक श्री गणेश पलंगे, मंदिर ट्रस्टी श्री ओम पांडे, हिंदू जनजागृति समिति के जिला संघटक सर्वश्री बापू ठाणगे, रामेश्वर भूकन, मुकुल गंधे, हिंदुत्वनिष्ठ अमोल हुंबे, संजय जोशी, चैतन्य शेकडे आदि उपस्थित थे।
7. ओरोस (कुडाळ)

8. खेड

महाराष्ट्र मंदिर महासंघ तथा तालुका के विभिन्न देवस्थानों की ओर से इस विषय में खेड के तहसीलदार संतोष सोनवणे को ज्ञापन सौंपा गया। इस अवसर पर खारी स्थित श्री हनुमान मंदिर के विनोद बहुतुले; सुसेरी स्थित श्री खेमनाथ देवस्थान के प्रभाकर दिवाळे, श्रीधर गवळी, दीपक भांबड; कोरेगांव स्थित श्री देव धावजी बाबा काळकाई देवस्थान के प्रकाश मोरे; चोरवणे गावठाण स्थित श्री रामवरदायिनी देवस्थान के प्रवीण सावंत; श्री मांडवे स्थित श्री भैरी जोगेश्वरी देवस्थान के सुरेश मोरे; वरवली स्थित श्री सोमजाई देवस्थान के संतोष यादव; जैतापुर स्थित श्री चंडकाई देवस्थान के दुर्गेश शेलार; बिजघर स्थित श्री शंकर पार्वती काळकाई देवस्थान के सुनील भोसले; पुजारी भगवान जंगम; घोगरे देवस्थान के संजय जाधव; अधिवक्ता हेमंत वडके; धर्मप्रेमी विनय माळी; हिंदू जनजागृति समिति के विलास भुवड; सनातन संस्था की सौ. स्नेहल तोडकरी तथा मंदिर महासंघ के जिला संयोजक सुरेश शिंदे सहित अनेक मंदिरों के ट्रस्टी उपस्थित थे।
9. सोलापूर में आंदोलन तथा ज्ञापन प्रस्तुति


अ. अक्कलकोट

आ. तुळजापूर

इ. बार्शी

ई. मिरज

10. कागल (कोल्हापूर)

11. राजापूर

‘देवस्थान इनाम निर्मूलन कायदा’ रद्द करें; अन्यथा तीव्र आंदोलन करेंगे – ‘हिंदू एकता आंदोलन’ की चेतावनी

कोल्हापुर– ‘हिंदू एकता आंदोलन’ संगठन ने चेतावनी दी है कि हिंदू मंदिरों के अस्तित्व और भक्तों की श्रद्धा को खतरे में डालने वाले ‘देवस्थान इनाम निर्मूलन कानून’ को रद्द किया जाए, अन्यथा तीव्र आंदोलन किया जाएगा। इस मांग के लिए 19 मई को जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए निवासी उपजिलाधिकारी गजानन गुरव को ज्ञापन सौंपा गया। इस आंदोलन को ‘अखिल महाराष्ट्र गुरव समाज सुधारक मंडल’ ने भी अपना समर्थन घोषित किया है।
इस अवसर पर ‘हिंदू एकता आंदोलन’ के सर्वश्री दीपक देसाई, विलास मोहिते, हिंदूराव शेलके, अनिकेत पवार, साथ ही अर्चना जाधव, पूजा शिंदे, अंजलि जाधव सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।








