सातारा (महाराष्ट्र) के समस्त हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों ने ज्ञापन प्रस्तुत कर प्रशासन से मांग

सातारा – केवल सामाजिक माध्यमों के आधार पर बिना किसी ऐतिहासिक प्रमाण के तथा उपलब्ध प्रमाणों के विषय में दिशाभ्रम फैलाकर राष्ट्रविघातक लोगों ने राष्ट्रगुरु समर्थ रामदासस्वामी पर अत्यंत घृणित आरोप लगाए हैं । सामाजिक माध्यमों पर राष्ट्रगुरु समर्थ रामदासस्वामी पर लगाए जानेवाले आरोप तुरंत रोके जाएं तथा संबंधित राष्ट्र विघातक लोगों एवं समाज विघातक शक्तियों पर अपराध पंजीकृत कर उन पर तुरंत कठोर कानूनी कार्यवाही की जाए, यह मांग सातारा के समस्त हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों की ओर से जिला पुलिस अधीक्षक निखिल पिंगले को ज्ञापन प्रस्तुत कर की गई ।
इस अवसर पर ‘श्री समर्थ सेवा मंडल’के कार्याध्यक्ष पू. योगेशबुवा रामदासी, समर्थभक्त शहाजीबुवा रामदासी, श्रीसमर्थ सदन के व्यवस्थापक समर्थभक्त प्रवीण कुलकर्णी, श्री शिवप्रतिष्ठान हिन्दुस्थान, हिन्दू जनजागृति समिति, हिन्दू महासभा, सनातन संस्था, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिन्दू परिषद, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ, बजरंग दल, श्री संप्रदाय, इस्कॉन, हिन्दू विधिज्ञ परिषद आदि हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बडी संख्या में उपस्थित थे ।
ज्ञापन में कहा गया है कि,
१. ‘समर्थ रामदासस्वामी एवं छत्रपति शिवाजी महाराज कभी भी एक-दूसरे से नहीं मिले, ‘रामदासस्वामी आदिलशहा के गुप्तचर थे’ जैसे घृणित आरोपों से लेकर समर्थ रामदासस्वामी के सूर्यप्रकाश से भी स्वच्छ चरित्र पर कीचड उछालने तक ये राष्ट्रविघातक लोग पहुंच गए हैं ।
२. हाल ही के कुछ समय में आंशिक जानकारी के आधार पर दिए गए वक्तव्यों के आधार पर इन राष्ट्रविघातक लोगों ने पुनः एक बार समर्थ रामदासस्वामीजी पर कीचड उछालना आरंभ किया है ।
३. अतः इसप्रकार से राष्ट्रगुरु समर्थ रामदासस्वामी, साथ ही अन्य राष्ट्रपुरुषों एवं संतों की घृणित भाषा में आलोचना कर समाज को तोडने वालों पर कठोर कार्यवाही हो, साथ ही इसके लिए शीघ्रातिशीघ्र कठोर कानून ही बने ।
४. हाल ही के कुछ वर्षाें में इन महापुरुषों को जातियों में बांटकर उनकी अपकीर्त करने के बार-बार प्रयास किए जा रहे हैं । ये प्रयास केवल जातिगत विद्वेष से नहीं हो रहे हैं, अपितु हमारे देश के आदर्श व्यक्तित्त्वों के विषय में समाज मानस में जानबूझकर बुरे विचार प्रसारित कर उन्हें भ्रमित करने का तथा उस माध्यम से देश की विचारधारा को नष्ट करने का यह बहुत बडा षडयंत्र है ।
इस ज्ञापन में आगे कहा गया है कि श्रीसमर्थ रामदासस्वामी जी ने समाज में देवता, देश एवं धर्म के प्रति निष्ठा बढाने के लिए लोकोत्तर पद्धति का कार्य किया । समर्थ रामदासस्वामी जी ने कठोर तपस्या, प्रचंड अध्ययन एवं अपनी प्रखर साधना के बल पर समाज में जागृति लाने का एवं अध्यात्मप्रसार का कार्य किया । उन्होंने संगठन कुशलता के आधार पर धर्म एवं राष्ट्र के पुनरुत्थान का कार्य किया । उसके लिए उन्होंने पूरे देश में १ सहस्र १०० मठों की स्थापना की है । छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित हिन्दवी स्वराज के लिए यह संपूर्ण कार्य पूरक ही सिद्ध हुआ । उसके कारण ही इन दोनों महापुरुषों में एक-दूसरे के प्रति अत्यंत आत्मीयता थी, यह बात समकालीन प्रमाणों से बार-बार सिद्ध हुई है ।








