-
४०० से अधिक धर्माभिमानी हिंदुओं की उत्स्फूर्त उपस्थिति
-
हिंदुओं को संगठित होने का आवाहन

देवगड – हिंदू धर्म, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से सकल हिंदू समाज पडेल मंडल की ओर से २२ मार्च २०२६ को तालुका के पडेल कैंटीन स्थित हरदेव निवास के सामने मैदान में एक भव्य सकल हिंदू सम्मेलन आयोजित किया गया।
सम्मेलन में उपस्थित मान्यवर वक्ताओं ने देव, देश और धर्म पर बढ़ते आघातों के बारे में हिंदुओं को जागरूक करते हुए इनके संरक्षण के लिए हिंदुओं को संगठित होने का आह्वान किया। इस सम्मेलन में ४०० से अधिक धर्मप्रेमी हिंदू उपस्थित थे।

अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए हिंदुओं द्वारा किए गए संघर्ष के स्मरण के साथ-साथ बढते धर्मांतरण, लव जिहाद, मंदिरों का सरकारीकरण, गोहत्या और लैंड जिहाद जैसे विषयों पर समाज में जागरूकता निर्माण करना इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य था। इस कार्यक्रम का आयोजन विभिन्न हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों द्वारा किया गया था।
कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता के रूप में श्री श्रीनिवास पेंडसे (संगमेश्वर) तथा मुख्य अतिथि के रूप में हिंदू जनजागृति समिति के डॉ. रविकांत नारकर (पडेल, देवगड) उपस्थित थे।
हिंदुओं को संगठित होने का संदेश
श्री पेंडसे ने अपने मार्गदर्शन में वर्तमान युद्ध जैसे वैश्विक हालात और हिंदुओं की मानसिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आने वाले समय में हिंदू समाज का संगठन करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसके लिए जाति-पंथ और संप्रदाय के भेद भूलकर हिंदू इस एक पहचान के अंतर्गत सभी को एकजुट होना चाहिए।
धर्मरक्षा के लिए संगठित प्रयास आवश्यक
डॉ. नारकर ने हिंदू धर्म पर हो रहे विभिन्न आघातों जैसे बड़े पैमाने पर हो रहे धर्मांतरण, लव जिहाद, मंदिर सरकारीकरण, गोहत्या और भूमि जिहाद जैसे विषयों को आंकड़ों सहित प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इन सभी समस्याओं का समाधान धर्माधिष्ठित हिंदू राष्ट्र की स्थापना में है और इसके लिए पूरे हिंदू समाज को एकजुट होकर कार्य करना चाहिए।
उन्होंने सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले के चरणों में प्रार्थना की कि सभी हिंदुओं को संगठित होने के लिए भक्ति, शक्ति, बुद्धि और प्रेरणा प्राप्त हो।
इस अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी की मेघा बहन तथा संत निरंकारी मंडल के डॉ. अजित टुकुरल ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सम्मेलन का उद्देश्य डॉ. पूजा मालपेकर ने स्पष्ट किया। पडेल स्थित श्री रवळनाथ मंदिर के अध्यक्ष श्री केवल ठाकूर देसाई ने भी अपने विचार रखे।








