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सातारा में आयोजित चतुर्थ मंदिर परिषद में राज्यभर से 1,100 से अधिक मंदिर प्रतिनिधियों की उपस्थिति

  • यदि कोई हिंदू परंपराओं को तोडने का प्रयास करेगा, तो सरकार कठोर कार्रवाई करेगी !

  • मंदिरों और किलों पर हुए अतिक्रमण हटाने के लिए आवश्यकता पड़ने पर ‘बुलडोज़र’ कार्रवाई की जाएगी !

मंदिरों की सभी समस्याओं के समाधान हेतु मुख्यमंत्री के साथ बैठक कर ठोस निर्णय लिया जाएगा !- भरतशेठ गोगावले, बागवानी एवं रोजगार गारंटी मंत्री

दीपप्रज्वलन करते समय बाईं ओर से श्री. गिरीश शाह, श्री. सुनील घनवट, महंत मावजीनाथ महाराज, योगी निरंजननाथ, फल उत्पादन और रोजगार गारंटी मंत्री भरतशेठ गोगावले, सद्गुरु स्वाति खाडये, अधिवक्ता पू. सुरेश कुलकर्णी

सातारा – मंदिर सुरक्षित है तो धर्म सुरक्षित है! मंदिर महासंघ द्वारा मंदिरों को एकजुट कर बनाई गई सशक्त संरचना को सरकार का पूर्ण समर्थन रहेगा। मंदिरों के लिए भूमि खरीद या हस्तांतरण के समय स्टाम्प शुल्क में छूट देने की मांग उचित है, इसपर वित्त विभाग से चर्चा कर नीति स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। मंदिरों की भूमि हड़पने वालों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ‘एंटी लैंड ग्रैबिंग’ कानून की तर्ज पर और अधिक कठोर कदम उठाने पर विचार कर रही है। इस परिषद में पारित प्रस्तावों और मंदिरों की समस्याओं के समाधान हेतु मुख्यमंत्री के साथ विशेष बैठक आयोजित कर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा, ऐसा आश्वासन मंत्री भरतशेठ गोगावले ने दिया।

फलोत्पादन एवं रोजगार गारंटी मंत्री भरतसेठ गोगावले

महाराष्ट्र मंदिर महासंघ, मुंबई स्थित श्री जिवदानी देवी संस्था, श्री ज्योतिर्लिंग भीमाशंकर देवस्थान तथा हिंदू जनजागृति समिति के संयुक्त तत्वावधान में 22 मार्च को सातारा के स्वराष्ट्र मंगल कार्यालय, कोरेगांव रोड पर चतुर्थ ‘महाराष्ट्र मंदिर न्यास परिषद’ का आयोजन किया गया। इस परिषद में राज्यभर से 1,100 से अधिक मंदिर ट्रस्टी, प्रतिनिधि, पुरोहित, अधिवक्ता और मंदिर संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन हिंदू जनजागृति समिति की श्रीमती भक्ति डाफळे ने किया।

प्रारंभ में स्वागत करते हुए सातारा जिला समन्वयक शिवाजीराव तुपे ने कहा कि “हम सभी सनातन धर्म के प्रतीक – मंदिरों के प्रतिनिधि के रूप में यहां उपस्थित हैं। इस परिषद में लिए गए निर्णयों को व्यवहारिक स्तर पर लागू करने का संकल्प लें।” सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले के संदेश का वाचन सद्गुरु सत्यवान कदम ने किया। महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक श्री सुनील घनवट ने संगठन की कार्यप्रणाली, मंदिरों के सामने आने वाली चुनौतियों एवं भविष्य की दिशा पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।

मंदिरों का धन हिंदुओं के कल्याण में ही उपयोग हो; मंदिर की एक इंच भूमि भी ‘वक्फ’ के अधीन नहीं रहने देंगे – सुनील घनवट, राष्ट्रीय संयोजक, मंदिर महासंघ

मंदिर महासंघ ने 17,000 मंदिरों का संगठन तैयार किया है। यह मंदिरों तथा सरकार के बीच सेतु का कार्य करता है। राज्य में मंदिरों की भूमि हड़पने के कई मामले सामने आए हैं, जिनके विरुद्ध महासंघ सक्रिय है। उदाहरणस्वरूप, सोमेश्वर मंदिर की 50 करोड़ रुपये की भूमि मात्र 960 रुपये में बेची गई। ऐसे मामलों को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मंदिरों के 100 मीटर के दायरे में शराब एवं मांस की बिक्री प्रतिबंधित होनी चाहिए तथा इसे बढ़ाकर 500 मीटर किया जाना चाहिए। ‘वक्फ बोर्ड’ के नियंत्रण में लाखों एकड़ भूमि हिंदुओं के अधिकारों का हनन है। भविष्य में एक इंच भूमि भी वक्फ के अधीन न रहे, इसके लिए संगठित प्रयास आवश्यक हैं।

मंदिर सुरक्षित रहेंगे तो ही देश, देव एवं धर्म सुरक्षित रहेंगे ! — योगी निरंजननाथ महाराज

उन्होंने कहा कि मंदिरों का सरकारीकरण तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए ट्रस्टियों को सजग रहना चाहिए। मंदिरों का आर्थिक प्रबंधन पारदर्शी होना चाहिए। आषाढ़ी वारी जैसे धार्मिक आयोजन उत्कृष्ट प्रबंधन का उदाहरण हैं। कोरोना काल में मंदिरों द्वारा किए गए अन्नदान से यह सिद्ध होता है कि मंदिर सामाजिक कार्यों में भी अग्रणी हैं।

समाज में मंदिर अर्थव्यवस्था के महत्व पर बोलते हुए श्री संदीप सिंह ने कहा कि “दुनिया के कई शहर उद्योगों से बने और उनके बंद होने पर समाप्त हो गए; लेकिन अयोध्या, काशी, उज्जैन और तिरुपति जैसे शहर हजारों वर्षों से मंदिरों के कारण जीवित हैं।”

उपस्थित मंदिर विश्वस्त एवं भक्त

भारत के मंदिर विकास के प्रमुख केंद्र (डेवलपमेंट हब) हैं ! — गिरीश शाह, मंदिर अध्ययनकर्ता

उन्होंने कहा कि मंदिर तथा गोशाला मिलकर देश के विकास को नई दिशा दे सकते हैं। गोबर एवं गोमूत्र से 300 से अधिक उत्पाद बनाए जा रहे हैं। युवाओं को मंदिरों से जोड़ना आवश्यक है। मंदिर सेवा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के केंद्र बन सकते हैं। बड़े मंदिरों को छोटे मंदिरों की आर्थिक सहायता करनी चाहिए।

मंदिरों में आने वाले भक्तों को धर्मशिक्षा दी जाए, तो रामराज्य दूर नहीं ! — सद्गुरु स्वाती खाडये, सनातन संस्था

उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में मंदिर धर्मशिक्षा, कला एवं संस्कृति के केंद्र थे। आज तीर्थस्थल पर्यटन केंद्र बनते जा रहे हैं। भक्तों को सही तरीके से पूजा तथा धर्माचरण की शिक्षा देना आवश्यक है।

श्री सुरेश कौदरे, ह.भ.प. बबनराव सापते, ह.भ.प. विठ्ठल स्वामी वडगांवकर, उदय शेकडे, पुरुषोत्तम कुलकर्णी, जगदीश पिसाळ महाराज, विशाल महाराज पाटेश्वर, अधिवक्ता विद्यानंद जोग, दिलीप देशमुख, विजयराव गाढवे, बाबासाहेब पाटील, महंत मावजीनाथ महाराज, महंत सोहम भारती, विलास पुंड, अरविंद देठे, अमल मलगुंडे, भरत पाटील, अवधूत बोडस, अशोक खोडकुंभे, कैलास पनपालिया, अतुल ठाकरे आदि।

परिषद की विशेष घटनाएं

अहिल्यानगर जिले के मढी गांव के सरपंच एवं श्री कानिफनाथ देवस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री संजय मरकड तथा शनिशिंगणापुर के श्री ऋषिकेश शेटे को देवस्थान में भ्रष्टाचार उजागर करने के लिए सम्मानित किया गया।

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