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महाराष्ट्र में धर्मांतरण विरोधी कानून हुआ पारित

आखिरकार हिंदू संगठनों की मांग पूरी

…अब सही मायनों में ‘लाडली बहनों’ की रक्षा होगी !

मुंबई – राज्य सरकार द्वारा विधानमंडल अधिवेशन के दौरान दोनों सदनों में ‘महाराष्ट्र धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ पारित किया गया। इस सराहनीय निर्णय के लिए हिंदू जनजागृति समिति राज्य सरकार का हृदय से अभिनंदन करती है। हिंदू समाज द्वारा लंबे समय से इस कानून की मांग की जा रही थी, जिसके अनुसार अब राज्य में यह कानून पारित हो गया है। हमें आशा है कि इस कानून से देश भर में हिंदू युवतियों को फंसाकर होने वाले ‘लव जिहाद’ और आर्थिक प्रलोभन देकर हिंदू समाज के बड़े पैमाने पर होने वाले ‘धर्मांतरण’ पर निश्चित रूप से रोक लगेगी। कानून तो पारित हो गया है, लेकिन अब इसे सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। इससे पहले राज्य सरकार ने ‘लाडली बहनों’ को आर्थिक सुरक्षा देने वाली योजना पेश की थी, और अब उन्हें सही मायनों में सुरक्षा देने वाला कानून लाकर सरकार ने ‘लाडली बहनों’ को सुरक्षित कर दिया है। यह प्रतिक्रिया हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने दी है।

हिंदू जनजागृति समिति पिछले 20 वर्षों से संघर्ष करते हुए ‘लव जिहाद’ की समस्या के बारे में देश भर में जागरूकता पैदा कर रही है। जब ‘लव जिहाद’ शब्द बोलना भी मुश्किल था, तब 2006 में समिति ने इस विषय पर अपना पहला ग्रंथ प्रकाशित किया था। ‘लव जिहाद’ और ‘धर्मांतरण’ के विषय पर समिति के वक्ताओं ने हजारों व्याख्यान दिए; सैकड़ों सभाओं के माध्यम से जन जागरूकता फैलाई गई; प्रदर्शनियों के जरिए लोगों को जागरूक किया गया; श्रद्धा वालकर जैसे मामलों के दौरान सैकड़ों आंदोलन किए गए; हिंदू जनसंघर्ष मोर्चे के माध्यम से हजारों की संख्या में रैलियां निकाली गईं। इतना ही नहीं, ‘लव जिहाद’ में फंसी सैकड़ों युवतियों की समिति द्वारा ‘काउंसलिंग’ भी की गई। परिणामस्वरूप 12 राज्यों में लव जिहाद विरोधी कानून बनाए गए और 3 राज्यों में ये कानून बनने की प्रक्रिया में हैं। अब ऐसा कानून बनाने वाला महाराष्ट्र 13वां राज्य बन गया है।

हिंदू जनजागृति समिति के राज्य संगठक श्री. सुनील घनवट ने इस विषय में बताया कि प्रलोभन देकर किए जाने वाले धर्मांतरण के कारण पूर्वोत्तर भारत के 7 राज्यों में से 5 राज्य ईसाई बहुल हो गए हैं। कुल मिलाकर भारत के 9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हिंदू ‘अल्पसंख्यक’ हो गए हैं, जिससे यह समझ आता है कि ‘धर्मांतरण’ की समस्या कितनी गंभीर है। राज्य सरकार ने यह कानून बनाया, इसके लिए सरकार को पुनः बधाई। लेकिन यह कानून समाज तक पहुंचे, इसके लिए सरकार को इसके प्रचार-प्रसार के प्रयास करने चाहिए। राज्य के हर स्कूल में इस कानून के बारे में जागरूकता पैदा की जाए और आदिवासी बहुल इलाकों में इस पर प्रबोधन हो, इसके लिए सरकार को योजना बनानी चाहिए, ऐसा आह्वान भी श्री. घनवट ने समिति की ओर से किया है।

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