
नवी मुंबई – यहां के २५ मंदिरों में वस्त्रसंहिता लागू करने का संकल्प मंदिर ट्रस्टियों ने नेरूल में आयोजित एक बैठक में लिया। महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के तत्वावधान में मंदिर ट्रस्टियों और प्रतिनिधियों की यह बैठक नेरूल स्थित माता अमृतानंदमयी मठ, ब्रह्मगिरी में आयोजित की गई थी। इस अवसर पर नेरूल स्थित माता अमृतानंदमयी मठ के मठाधीश स्वामी अव्ययामृतानंद पुरी, हिंदू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र और छत्तीसगढ के समन्वयक श्री सुनील घनवट सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
सभी को संगठित होना चाहिए ! – स्वामी अव्ययामृतानंद पुरी
हमारे कार्य को अम्मा (माता अमृतानंदमयी) का आशीर्वाद प्राप्त है। सभी का संगठित होना अत्यंत आवश्यक है। ‘संघे शक्ति कलियुगे’ इस वचन के अनुसार जाति-पाति और संप्रदाय के भेद को अलग रखकर हमें एकत्र आना चाहिए।
मंदिर भक्तों के नियंत्रण में होने पर ही उनका सुव्यवस्थित संचालन संभव ! – सुनील घनवट
महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के माध्यम से अब तक १७ हजार मंदिरों का संगठन किया जा चुका है। राज्य में मंदिरों से संबंधित अनेक समस्याएं हैं। एक ओर सरकार ने एक भी मस्जिद और चर्च को अपने नियंत्रण में नहीं लिया है, फिर केवल मंदिरों को ही नियंत्रण में क्यों लिया जा रहा है? मंदिर यदि भक्तों के नियंत्रण में होंगे, तभी उनका उचित प्रबंधन संभव होगा। इसके लिए मंदिर ट्रस्टियों का संगठित होना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से २२ मार्च को महाराष्ट्र मंदिर महासंघ की ओर से सातारा में चौथी राज्यस्तरीय मंदिर महासंघ परिषद आयोजित की जाएगी। इसमें अधिकाधिक ट्रस्टियों को उपस्थित रहने का आह्वान किया गया।
हिंदू जनजागृति समिति के श्री बळवंत पाठक ने २३ और २४ मई को सनातन संस्था की ओर से मुंबई में आयोजित ‘शंखनाद रामराज्य का’ इस महोत्सव की जानकारी दी तथा सभी से इस महोत्सव में सहभागी होने का आवाहन किया।








