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मंचर (पुणे) मंचर की ऐतिहासिक ‘बारव’ हिन्दुओं के संघर्ष के बाद वक्फ संपत्ति सूची से हटाई गई

हिन्दुओं के निरंतर संघर्ष की विजय !

पुणे – मंचर (तहसील आंबेगाव) में स्थित १२ वीं शताब्दी में बना ऐतिहासिक ‘बारव’ तथा परिसर को वक्फ बोर्ड में की गई अवैध प्रविष्टि राजस्व विभाग ने अंततः निरस्त की । अपने प्राचीन धरोहर की रक्षा करने हेतु हिन्दुत्वनिष्ठों एवं जागरूक नागरिकों द्वारा लडी गई लंबी लडाई के कारण प्रशासन को यह अवैध प्रविष्टि हटानी पडी । ‘यह निर्णय केवल कानूनी विजय नहीं है, अपितु हमारी सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है’, ऐसा प्रतिपादन भाजपा के उद्योग प्रकोष्ठ के उत्तर पुणे जिलाध्यक्ष प्रमोद बाणखेले ने मंचर में आयोजित पत्रकार वार्ता में किया । इस पत्रकार वार्ता में भाजपा का पूर्व तहसील अध्यक्ष संदीप बाणखेले, महेश पिंगळे, गणेश बाणखेले, चैतन्य महाजन आदि मान्यवरोंसहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे ।

कुछ दिन पूर्व भाजपा सांसद प्रा. डॉ. (श्रीमती) मेधा कुलकर्णी ने बारव के स्थान पर जहां अतिक्रमण हुआ था, वहां जाकर आंदोलन किया था ।

सांस्कृतिक गौरव की रक्षा करनेवाली विजय !

मंचर के निकट की निघोटवाडी ग्रामपंचायत की कार्यकक्षा में अनुमानित ४ एकड़ क्षेत्र पर अतिक्रमण किया गया था । इस ऐतिहासिक स्थल पर अवैधरूप से वक्फ बोर्ड का नाम लगाया गया था । प्रमोद बाणखेले तथा स्थानीय हिन्दुओं ने यह स्थान पुनः सरकारी स्वामित्व की हो तथा उसके ऐतिहासिक स्वरूप का संरक्षण किया जाए, यह निरंतर मांग की थी । अब इस संघर्ष को सफलता मिली है तथा यह भूमि पुनः सरकारी ७/१२ भूमि अभिलेख पर प्रविष्ट की गई है ।

इस संघर्ष के महत्त्वपूर्ण पहलू :

१. ४ एकड़ क्षेत्र में हुआ अतिक्रमण हटाकर वक्फ बोर्ड का अवैध नाम हटाया गया है ।

२. राज्य के सांस्कृतिक मंत्री आशिष शेलार से इस ऐतिहासिक बारव तथा वहां स्थित शिलालेख का रक्षण हो; इसके लिए इस स्थान को पुरातत्त्व विभाग को हस्तांतरित करने की मांग की गई है ।

ऐतिहासिक स्थलों की रक्षा के लिए हिन्दू समाज सजग रहे ! – प्रमोद बाणखेले

इसविषय में श्री. प्रमोद बाणखेले ने कहा, ‘‘यह विजय हमारे इतिहास एवं गौरव के रक्षण की दृष्टि से एक प्रेरणादायक उदाहरण है । भविष्य में भी ऐसे ऐतिहासिक स्थलों की रक्षा करने के लिए हिन्दू समाज को सजग रहना समय की मांग है ।’’


9 मार्च

मंचर (पुणे) के पांडवकालीन बारव परिसर में धर्मांधों ने किया अतिक्रमण

अवैध दरगाह का निर्माण कर उस स्थान को ‘वक्फ’ के रूप में किया घोषित

सांसद प्रा. डॉ. (श्रीमती) मेधा कुलकर्णी के नेतृत्व में आंदोलन

(‘बारव’ अर्थात सीढियोंवाला कुआं । वह अधिकांश चतुष्कोनीय अथवा अष्टकोनीय आकार का होता है ।)

मंचर (जिला पुणे) – यहां ऐतिहासिक पांडवकालीन बारव है । इस स्थान पर प्रत्यक्षरूप से शिलालेख, गोमुख एवं पत्थर में की गई कलाकारी है तथा यह वास्तु हिन्दू पद्धति के होने के स्पष्ट प्रमाण हैं । तब भी इस स्थान पर अवैध दरगाह बनाकर उसे ‘वक्फ’ के रूप में घोषित किया गया है । पुणे के जिलाधिकारी, साथ ही पुणे ग्रामीण पुलिस से इसकी बार-बार शिकायत कर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई, उल्टे निर्माणकार्य का आकार बढाया गया । प्रांताधिकारी को जो स्थान पिछले ६ महिने पूर्व खाली दिखाई दिया, अब उस पर कब्रस्तानसदृश्य निर्माणकार्य किया गया है । केवल इतना ही नहीं, अपितु इस स्थान पर वर्ष २०२१ में मृतक हुए व्यक्ति की कब्र दिखाई गई है । ६ महिने पूर्व जिस कब्रस्तान का कोई अस्तित्व नहीं था, उस कब्रस्तान में वर्ष २०२१ में मृत्यु हो चुके व्यक्ति की कब्र कैसे हो सकती है ?

दरगाह के स्थान का अवलोकन करती हुईं सांसद प्रा. डॉ. (श्रीमती) मेधा कुलकर्णी

प्रशासन द्वारा इस गंभीर घटना की अनदेखी करने के विरोध में भाजपा की सांसद प्रा. डॉ. (श्रीमती) मेधा कुलकर्णी ने स्थानीय हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के साथ घटनास्थल जाकर आंदोलन किया ।

कब्र के स्थान का अवलोकन करती हुईं सांसद प्रा. डॉ. (श्रीमती) मेधा कुलकर्णी

इस आंदोलन मबें सर्वश्री प्रमोद बाणखेले, संदीप बाणखेले, गणेश बाणखेले, अक्षय चिखले, महेश पिंगळे, चैतन्य महाजनसहित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिन्दू परिषद एवं बजरंग दल के अनेक कार्यकर्ता बडी संख्या में उपस्थित थे ।

भूमि के कागदपत्रों की पडताल करती हुईं सांसद प्रा. डॉ. (श्रीमती) मेधा कुलकर्णी

इस प्रकरण में उपमंडल पुलिस अधिकारी ने पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक एवं प्रांताधिकारी से बातचीत कर ८ दिन में कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है । सांसद (श्रीमती) मेधा कुलकर्णी ने यदि यह कार्रवाई नहीं हुई, तो इस आंदोलन को और कडा करने की चेतावनी दी है ।

पुलिस का दमनतंत्र तथा हिन्दुओं की आस्था की अवमानना !

आंदोलन के समय एक क्षोभजनक घटना हुई । सांसद (श्रीमती) कुलकर्णी ने इस स्थान पर हिन्दू देवता का चित्र लगाने का प्रयास किया, तब पुलिस ने उनके हाथ से देवता का चित्र छीन लिया । उन्होंने पुलिस से यह प्रश्न करते हुए कहा, ‘‘उन्हें (मुसलमानों को) यहां दर्गाह बनाने से तथा हरा रंग लगाने से कोई नहीं रोकता, तो मुझे ‘ॐ’ लिखने के तथा देवता का चित्र लगाने से क्यों रोका जा रहा है ?

हिन्दू सहिष्णु हैं; परंतु उनकी सहिष्णुता का अंत न देखिए !

सांसद (श्रीमती) कुलकर्णी ने इस समय प्रशासन को बताया कि हिन्दू कभी भी कानून-व्यवस्था नहीं बिगाडते अथवा किसी की भूमि नहीं हडपते; परंतु धर्मांधों द्वारा श्री गणेश विसर्जन शोभायात्रा पर किया जानेवाला पथराव तथा हिन्दुओं की धरोहरों पर होनेवाले अतिक्रमण अब सहन नहीं किए जाएंगे । हिन्दू आक्रामक नहीं होता; परंतु उसकी सहिष्णुता का कोई अंत न देखें ।’’

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