आगामी विधानसभा सत्र में कडा, गैर-जमानती कानून बनाने की मांग को लेकर महाराष्ट्र के 75 से अधिक स्थानों पर ज्ञापन सौंपे गए

पिछले दो वर्षों से संपूर्ण महाराष्ट्र में ‘लव जिहाद’ और ‘अवैध धर्मांतरण’ जैसी गंभीर समस्याओं के विरोध में कानून बनाने के लिए हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों ने जनआक्रोश मोर्चे निकाले। उस समय सरकार ने इस विषय की गंभीरता को समझते हुए ‘लव जिहाद’ के विरुद्ध कठोर कानून बनाने का आश्वासन दिया था। किंतु दुर्भाग्यवश आज भी ये घटनाएं बंद नहीं हुई हैं, बल्कि उनकी तीव्रता और क्रूरता बढ़ती जा रही है। अब सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन को पूरा करने का समय आ गया है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों की तर्ज पर दोषियों को आजीवन कारावास की सजा देने वाला कठोर एवं गैर-जमानती ‘लव जिहाद’ तथा अवैध धर्मांतरण विरोधी कानून आगामी अधिवेशन में तत्काल पारित किया जाए, ऐसी मांग हिंदू जनजागृति समिति ने राज्य सरकार से की है।
राज्यभर में ज्ञापन प्रस्तुति
इस संदर्भ में समिति ने माननीय मुख्यमंत्री एवं माननीय गृहमंत्री को राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 75 से अधिक स्थानों पर स्थानीय जिला एवं तहसील प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों के माध्यम से ज्ञापन सौंपे। रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, नाशिक, छत्रपति संभाजीनगर, पुणे, सातारा, सांगली, सोलापुर, बीड, धाराशिव, बुलढाणा, अकोला, यवतमाल, अमरावती, वाशिम, चंद्रपुर, नागपुर आदि जिलों में बड़ी संख्या में महिलाओं एवं हिंदुत्वनिष्ठ कार्यकर्ताओं ने एकत्र होकर ज्ञापन के माध्यम से उपरोक्त मांगें रखीं।
जत (सांगली)

रत्नागिरी

चिपळूण

खेड


येवला (नाशिक) के तहसीलदार को हिंदू जनजागृति समिति की महिला शाखा ‘रणरागिणी’ की महिला प्रतिनिधि तथा हिंदुत्वनिष्ठ संगठनओं के प्रतिनिधि ज्ञापन सौंपते हुए

सिंधुदुर्ग

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र से लापता 1,78,000 से अधिक महिलाओं एवं बालिकाओं की खोज के लिए ‘विशेष अभियान’ चलाया जाए तथा उनमें से ‘लव जिहाद’ के मामलों की अलग से नोंद की जाए। ‘लव जिहाद’ की घटनाएं अभी भी व्यापक रूप से हो रही हैं। इसकी गंभीरता को देखते हुए प्रत्येक जिले में पुलिस उपाधीक्षक (DySP) स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में ‘लव जिहाद विरोधी विशेष दल’ गठित किया जाए तथा ऐसे मामलों का निपटारा 6 माह के भीतर हो, इसके लिए फास्ट ट्रैक न्यायालय स्थापित किए जाएं। इस विषय में विदेश से आने वाले धन, जिहादी नेटवर्क एवं तस्करी की गहन जांच कर सहायता करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही धर्मांतरण अथवा अंतरधार्मिक विवाह से पूर्व कम से कम 60 दिन पहले जिला कलेक्टर के समक्ष आवेदन करना और पुलिस जांच अनिवार्य किया जाए, ऐसी मांग भी समिति ने अपने ज्ञापन में की है।


महाराष्ट्र राज्य भी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात और हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर लव जिहाद विरोधी कानून लागू करे। महाराष्ट्र छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि है, जहां परस्त्री को माता के समान माना जाता है। इस अधिवेशन में ऐतिहासिक निर्णय लेकर महाराष्ट्र को ‘लव जिहाद मुक्त’ एवं ‘धर्मांतरण मुक्त’ बनाया जाए, यही हमारी अपेक्षा है।








