- अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण के लिए कांग्रेस का वंदे मातरम् को किनारे करने का लंबा इतिहास रहा है, इसलिए इसके प्रसार का उनका विरोध कोई आश्चर्य की बात नहीं, बल्कि वही पुरानी तुष्टिकरण राजनीति दर्शाता है।
- कांग्रेस जहां वोट-बैंक के लिए बार-बार राष्ट्रीय प्रतीकों से समझौता करती रही है, वहीं सनातन संस्था पिछले 25 से अधिक वर्षों से निस्वार्थ आध्यात्मिक मार्गदर्शन, धर्माधारित अभियान, सामाजिक उत्थान और राष्ट्रजागरण में निरंतर कार्य करते हुए लाखों लोगों को सकारात्मक सेवा से प्रेरित कर रही है।
- ‘द क्विंट’ के एक पक्षपाती और अप्रमाणित लेख के आधार पर बिना तथ्यों की स्वतंत्र जांच किए केंद्र सरकार और सनातन संस्था पर हमला करना कांग्रेस की राजनीतिक अवसरवादिता, जानबूझकर फैलाए गए भ्रम और नैतिक दिवालियापन को दर्शाता है। – सम्पादक, हिन्दुजागृति

नई दिल्ली – केंद्र सरकार द्वारा ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ के लिए ₹63 लाख की अनुदान राशि दिए जाने पर कांग्रेस द्वारा किए गए विरोध को लेकर सनातन संस्था ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे पाखंड बताया है। संस्था का कहना है कि, कांग्रेस का इतिहास राष्ट्रीय प्रतीकों को वोट-बैंक राजनीति के लिए कमजोर करने का रहा है, इसलिए ‘वंदे मातरम्’ के प्रसार का विरोध करना आश्चर्यजनक नहीं है।
सनातन संस्था पिछले 25 वर्षों से निस्वार्थ भाव से आध्यात्मिक मार्गदर्शन, धर्माधारित अभियान, सामाजिक उत्थान और राष्ट्रजागृती का कार्य कर रही है, जिससे लाखों लोग प्रेरित हुए हैं।
दिसंबर में हुआ था महोत्सव का आयोजन
13–15 दिसंबर 2025 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित यह भव्य कार्यक्रम सनातन संस्था और सेव कल्चर सेव भारत फाउंडेशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था।
इस कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालु, संत-महंत, विभिन्न हिन्दू संगठनों के प्रतिनिधि तथा केंद्रीय मंत्री उपस्थित रहे।
महोत्सव में..
- बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के अमर गीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर सांस्कृतिक मंत्रालय द्वारा विशेष प्रदर्शनी लगाई गई थी।
- हजारों देशभक्तों द्वारा सामूहिक वंदे मातरम् का गायन हुआ।
- छत्रपति शिवाजी महाराज कालीन शस्त्रों की प्रदर्शनी भी लागई गई थी।
- इसके साथ सनातन संस्था के रजत महोत्सव से जुडे आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए थे।
इसका मुख्य उद्देश्य थाआध्यात्मि क जागृति, सनातन धर्म रक्षा तथा हिन्दुओं की समस्याओं के समाधान पर चर्चा।

‘द क्विंट’ की रिपोर्ट का हिन्दू विरोधी प्रपोगैंडा
विवाद तब शुरू हुआ जब ‘द क्विंट’ नामक पोर्टल ने “मुसलमानों को हटाने की मांग करनेवाले कार्यक्रम को मोदी सरकार ने ₹63 लाख दिए” शीर्षक से लेख प्रकाशित किया।
संस्था के अनुसार, ‘द क्विंट’ ने लेख में संदर्भ से हटाकर वक्तव्यों को प्रस्तुत किया गया। वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ हेतु दी गई अनुदान योजना की जानकारी छुपाई गई। कार्यक्रम को असंवैधानिक बताने का प्रयास किया गया। इसके बाद कांग्रेस व वामपंथी नेताओं ने सरकार पर “हेट स्पीच” को समर्थन देने का आरोप लगाया।
कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक का आरोप
18 फरवरी को नई दिल्ली में हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक ने ₹63 लाख की फंडिंग की आलोचना करते हुए कहा कि, कार्यक्रम में ‘हिंदू राष्ट्र’ की बात कर संविधान को कमजोर करने तथा अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा भडकाने जैसे भाषण हुए।
उन्होंने यह भी कहा कि “सनातन” शब्द का दुरुपयोग किया गया है और भाजपा-आरएसएस पर देश की धर्मनिरपेक्ष संरचना नष्ट करने का आरोप लगाया। उन्होंने महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने का भी आरोप लगाया।
सनातन संस्था का उत्तर

सनातन संस्था के प्रवक्ता अभय वर्तक ने सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा, ‘कार्यक्रम शांतिपूर्ण, भक्तिमय और सांस्कृतिक था। संविधान विरोधी कोई भाषण नहीं हुआ। वक्ताओं ने केवल हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों और उनके समाधान पर चर्चा की।’
उन्होंने कहा कि, कार्यक्रम को सभी सरकारी अनुमतियां प्राप्त थीं और आंशिक अनुदान वंदे मातरम् की विरासत के प्रचार हेतु था।
वर्तक ने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए कई ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख किया, जैसे =
- 1984 सिख दंगे
- ‘हिंदू आतंकवाद’ की झूठी थ्येयरी
- आपातकाल में स्वतंत्रता पर अंकुश
- तुष्टीकरण की राजनीति
‘जिन्होंने स्वयं संविधान-विरोधी कार्य किए, वही आज धर्मनिरपेक्षता का पाठ पढा रहे हैं।’
उन्होंने आगे कहा कि, सनातन संस्था के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।
अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने सरकारी अनुदान नियमों पर दी स्पष्टता

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय पहचान को संरक्षित करने हेतु सरकार अनुदान दे सकती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि, संविधान का अनुच्छेद 27 इस मामले में लागू नहीं होता, इसलिए ₹63 लाख की सहायता देना असंवैधानिक नहीं है।








