
ओल्ड गोवा – महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी महाराज की प्रेरणा से वायंगणी, ओल्ड गोवा स्थित भव्य गोवेश्वर महाशिव मंदिर में प्राणप्रतिष्ठा और कलशारोहण समारोह अत्यंत वैदिक विधि-विधान तथा भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत और उनकी पत्नी श्रीमती सुलक्षणा सावंत ने धार्मिक विधियों में भाग लिया और पूजा सम्पन्न होने के बाद मंदिर को भक्तों के दर्शन हेतु औपचारिक रूप से खोलने की घोषणा की। मंडप में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं ने तालियों के साथ आनंद व्यक्त किया।
A sacred milestone in Goa’s spiritual journey, Pran Pratishtha of Shri Goveshwar Devasthan, inspiring faith, unity, and devotion.
Har Har Mahadev. pic.twitter.com/yJ7zKSX2vz
— Dr. Pramod Sawant (@DrPramodPSawant) February 15, 2026
समारोह में जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी महाराज, प.पू कानिफनाथ महाराज तथा देशभर के विभिन्न अखाड़ों से आए साधु-संत उपस्थित थे। सभी धार्मिक विधियां नाशिक के वेदशास्त्र संपन्न भालचंद्रशास्त्री शौचे गुरुजी और उनके सहयोगियों ने सम्पन्न कराईं।
मुख्यमंत्री ने पहले मंदिर परिसर का निरीक्षण किया और निर्माण की प्रशंसा की, तत्पश्चात उन्होंने सपत्नीक प्राणप्रतिष्ठा अनुष्ठान में सहभाग किया तथा 6 फ़ुट ऊंची शिवपिंडी का पूजन किया। उनके ही हस्तों से प्राणप्रतिष्ठा और कलशारोहण सम्पन्न हुआ। कलशारोहण के समय ध्वजारोहण भी किया गया। तीन दिन से चल रहा यह महोत्सव 15 फ़रवरी को पूर्ण हुआ। महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों से हजारों श्रद्धालु उपस्थित हुए।
गोवेश्वर महाशिव मंदिर में 12 ज्योतिर्लिंगों की स्थापना से गोवा में आध्यात्मिक पर्यटन को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा — मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत
मुख्यमंत्री ने कहा कि, गोवा की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को इतिहास में नष्ट करने के प्रयास हुए, किंतु पूर्वजों ने मंदिरों और धर्म की रक्षा की। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर प्राचीन मंदिर कभी ध्वस्त हुआ था, वहीं अब पुनः गोवेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण हुआ है।
On the sacred occasion of Mahashivratri, I had the privilege of attending the Pran Pratishtha Samaroh of Shri Goveshwar Devasthan at Ramanandacharya Dakshinpeeth Upa Peeth, Old Goa, in the august presence of Param Pujya @_Jagadguru Ji.
On this auspicious occasion, more than 300… pic.twitter.com/rlwUZP8UMs
— Dr. Pramod Sawant (@DrPramodPSawant) February 15, 2026
उन्होंने विशेष रूप से कहा, सामान्यतः 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन हेतु देशभर में अलग-अलग स्थानों की यात्रा करनी पड़ती है।
अब इस मंदिर में सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की स्थापना होने से श्रद्धालु एक ही स्थान पर दर्शन कर सकेंगे। इससे गोवा में आध्यात्मिक पर्यटन को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने महाराज के व्यसनमुक्ति, पर्यावरण संरक्षण तथा धर्मजागरण कार्यों की भी सराहना की।
गोवेश्वर महाशिव मंदिर की विशेषताएं
- मंदिर पूर्णतः पत्थर की नक्काशीदार संरचना है।
- निर्माण में चुनार पत्थर का उपयोग हुआ है।
- भवन निर्माण में कहीं भी लोहे का प्रयोग नहीं किया गया।
- एक ही परिसर में 12 ज्योतिर्लिंग स्थापित — प्रमुख आकर्षण।
During visit on the auspicious occasion of the Pran Pratishtha of the Goveswar #Mahadev Temple, Shrisatshakti (Mrs) Binda Singbal met Sanjaydasji Maharaj, National President of Sankatmochan Sena, and P. P. Kanifnath Maharaj, the Uttaradhikari (successor) of the Shri Sampradaya… pic.twitter.com/Yo6bK0hIF6
— Sanatan Sanstha (@SanatanSanstha) February 15, 2026
‘गोवेश्वर महिमा संहिता’ ग्रंथ का लोकार्पण
मंदिर में 15 फ़रवरी को जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी महाराज द्वारा लिखित ‘गोवेश्वर महिमा संहिता’ ग्रंथ का लोकार्पण गोवा के राज्यपाल पी. अशोक गजपति राजू के हाथों हुआ।
समारोह में मुख्यमंत्री, संत-महंत तथा अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
यह लगभग 1400 पृष्ठों का ग्रंथ है। इसमें गोवा की वैदिक सनातन परंपरा और धार्मिक इतिहास का विवरण है। यह गोवा के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का महत्वपूर्ण अध्याय सिद्ध होगा।
जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी महाराज ने सच्चिदानंद परब्रह्म (डॉ.) जयंत आठवले के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा, सच्चिदानंद परब्रह्म (डॉ.) आठवले और मेरे पुराने तथा घनिष्ठ संबंध हैं। हम दोनों की संकल्पना से ही ‘हिंदू जनजागृति समिति’ की स्थापना हुई है”। इस अवसर पर श्री संप्रदाय की ओर से सनातन संस्था की श्रीसत्शक्ति (सौ.) बिंदा सिंगबाळ का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री चेतन राजहंस और श्री महावीर श्रीश्रीमाळ भी उपस्थित थे।
ग्रंथ लोकार्पण के पश्चात जगद्गुरु नरेंद्राचार्यजी महाराज ने उपस्थित संतों और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया तथा सनातन संस्था के कार्य की प्रशंसा की।
सनातन संस्था की ओर से श्रीसत्शक्ति (सौ.) बिंदा सिंगबाळ ने महाराज तथा उनके उत्तराधिकारी परमपूज्य कानिफनाथ महाराज का शाल, श्रीफल और भगवान शिव का सात्त्विक चित्र देकर सम्मान किया।

इस प्रसंग में उपस्थित संतों का उल्लेख करते हुए प.पू. महाराज ने कहा, “संत कितने तेजस्वी होते हैं, यह सनातन के संतों को देखकर समझ में आता है।”
Shrisatshakti (Mrs) Binda Singbal, one of the spiritual heirs of Sachchidananda Parabrahman (Dr) Jayant Athavale, visited the magnificent Goveswar Mahadev Temple on the occasion of its Pran Pratishtha ceremony and offered obeisance to Jagadguru Ramanandacharya Narendraacharyaji… pic.twitter.com/nuL40977yA
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उन्होंने सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले के स्वास्थ्य की भी स्नेहपूर्वक जानकारी ली। बाद में उन्होंने कहा, “मुझे सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले का कार्य बहुत पसंद है। लोगों को धर्म समझ में आए, इसके लिए उन्होंने छोटी-छोटी अनेक पुस्तिकाएं लिखी हैं। वे नाणिज दो बार आ चुके हैं। मैं डॉ. आठवले से मिलने के लिए अपनी अगली गोवा यात्रा में सनातन के आश्रम में आऊंगा।”








