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तुळजापुर में प्राचीन ब्रह्माजी की मूर्ति खंडित होने के प्रकरण की जांच कर उसकी रिपोर्ट तुरंत भेजें !

हिन्दू जनजागृति समिति की मांग के उपरांत संरक्षक मंत्री प्रताप सरनाईक का धाराशिव जिलाधिकारी को तत्परता से आदेश !

(दाएं) मंत्री श्री. प्रताप सरनाईक को ज्ञापन सौंपते हुए श्री. सुनील घनवट और साथ में श्री. अतुल अर्वेन्ला
(दाएं) मंत्री श्री. प्रताप सरनाईक को ज्ञापन सौंपते हुए श्री. सुनील घनवट और साथ में श्री. अतुल अर्वेन्ला

नागपुर – श्रीक्षेत्र तुळजापुर मंदिर में प्राचीन ब्रह्माजी की मूर्ति खंडित होने के प्रकरण में दोषी अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज किया जाए, साथ ही श्री तुळजापुर तीर्थक्षेत्र विकास योजना में मंदिर की संरचना में कोई बदलाव न करते हुए, योजना में कुलाचार (पारंपरिक अनुष्ठान), वंशपरंपरा और अन्य धार्मिक कृत्यों के लिए जगह रखी जाए, इस मांग का ज्ञापन हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से धाराशिव जिले के संरक्षण मंत्री श्री. प्रताप सरनाईक को १० दिसंबर को विधान भवन में दिया गया ।

श्री. प्रताप सरनाईक ने उसी समय तत्परता से धाराशिव के जिलाधिकारी को दूरभाष करके इस प्रकरण की जांच करने और उसकी रिपोर्ट तुरंत उन्हें प्रस्तुत करने का आदेश दिया ।

इस अवसर पर महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संगठक श्री. सुनील घनवट, हिन्दू जनजागृति समिति के सर्वश्री अतुल अर्वेन्ला और अभिजीत पोलके उपस्थित थे ।

इस ज्ञापन में कहा गया है कि श्री तुळजापुर तीर्थक्षेत्र विकास योजना  का कार्य शुरू होने से पहले ही मंदिर परिसर में अनेक उपदेवताओं की मूर्तियां हटा दी गई हैं । मंदिर की संरचना बदलने का कार्य शुरू करते समय कोई उचित सावधानी न बरतने के कारण प्राचीन ब्रह्मदेव की मूर्ति लापरवाही के कारण खंडित हो गई है ।

इससे हिन्दुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं । इस विषय में कई स्थानीय संगठनों और नागरिकों द्वारा शिकायत किए जाने के उपरांत भी दोषी शासकीय अधिकारियों पर पिछले ढाई महीने से अब तक मुकदमे क्यों दर्ज नहीं किए गए ?

इस प्रकरण की जांच करके दोषी अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमे (फौजदारी अपराध) दर्ज किए जाएं । साथ ही, योजना की धार्मिक दृष्टिकोण से समीक्षा करने के लिए धर्मशास्त्र के अध्येताओं, धर्माचार्यों और शंकराचार्य पीठों के विचार जानना अत्यंत आवश्यक है । मुख्य प्रवेश द्वार पहले की तरह ही रखा जाए । पीछे से नया द्वार बनाकर मंदिर की संरचना न बदली जाए, ऐसी मांग महाराष्ट्र मंदिर महासंघ की ओर से की गई है ।

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