-
उपस्थित धर्मप्रेमियों ने किया हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का जयघोष
-
विभिन्न नारों से गूंज उठा सभागार

देहली – द्वापरयुग में जिस कुरुक्षेत्र पर भगवान श्रीकृष्ण ने अधर्मी कौरवों का नाश कर धर्म की पुनर्स्थापना हेतु पांचजन्य शंख का नाद किया, उसी रणभूमि पर सनातन संस्कृति की रक्षा हेतु आज पुनः शंखनाद किया गया । सनातन संस्कृति की रक्षा हेतु भारतवर्ष के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत संत-महंत एवं धर्मप्रेमी भारतभूमि को पुनः उसकी ‘सनातन राष्ट्र’की मूल पहचान प्राप्त कराने हेतु भारत की राजधानी में एकत्रित हुए । संतों की चैतन्यदायक उपस्थिति में तथा क्षात्रतेज जागृत करनेवाले ‘जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम’के जयघोष में देहली अर्थात् ‘इंद्रप्रस्थ’ नगरी के भारत मंडपम् में १३ दिसंबर को इस मंगलमय समारोह का आरंभ हुआ । सनातन संस्था की ओर से आयोजित तथा ‘सेव कल्चर सेव भारत फाऊंडेशन’ प्रस्तुत तथा जिसका घोषवाक्य ‘धर्मेण जयति राष्ट्रम्’ है, इस महोत्सव में उपस्थित धर्मप्रेमियों ने हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का जयघोष किया ।
देहली के सांस्कृतिकमंत्री कपिल मिश्रा, नासिक (महाराष्ट्र) के महामंडलेश्वर स्वामी पू. शांतीगिरी महाराज, ‘सेव कल्चर सेव भारत’के संस्थापक तथा पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त श्री. उदय माहुरकर, सुदर्शन समाचारवाहिनी के मुख्य संपादक श्री. सुरेश चव्हाणके, सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणियां श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी एवं श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी, हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी तथा सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. अभय वर्तक इन मान्यवरों के करकमलों से दीपप्रज्वलन हुआ ।
ऐसे संपन्न हुआ उद्घाटन समारोह !

सवेरे १० बजे कार्यक्रम का आरंभ हुआ । आरंभ में ‘गोवा में संपन्न सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ एवं ‘आनंदमय जीवन हेतु सनातन संस्था’ये वीडियो दिखाए गए । उसके उपरांत सनातन राष्ट्र स्थापना की संकल्पपूर्ति हेतु ५ मिनट तक प्रभु श्रीराम से प्रार्थना कर सामूहिकरूप से ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ नामजप किया गया । उसके पश्चात सनातन वेदपाठशाला के पुरोहित श्री. श्रेयस पिसोळकर ने शंखनाद किया । उसके उपरांत श्री गणेशजी के श्लोक का पाठ तथा मान्यवरों के करकमलों से दीपप्रज्वलन हुआ । धर्मसंस्थापना के देवता भगवान श्रीकृष्ण, इंद्रप्रस्थ नगरी के स्थानदेवता तथा नगरदेवता श्री भैरवनाथ, सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी को वंदन कर कार्यक्रम का आरंभ हुआ । देहली के वेदव्यास गुरुकुलम् वसंतकुंज के आचार्य श्री. नीलेश त्रिपाठी, उनके शिष्य श्री. राम शर्मा एवं श्री. वैभव पांडे ने व्यासपीठ पर वेद का पाठ किया । सनातन संस्था के श्री. चैतन्य तागडे ने पुष्पमाला पहनाकर तथा शॉल, श्रीफल एवं भेंटवस्तु देकर ब्रह्ममूर्तियों को सम्मानित किया । तदुपतरांत श्री गणेशवंदना तथा मान्यवरों के करकमलों से दीप्रज्वलन किया गया । श्री सोमनाथ ज्योर्तिलिंग के दिव्यांश दर्शन हेतु उसे व्यासपीठ पर लाया गया । इसके पश्चात वीडियो के द्वारा राष्ट्रगान ‘वन्दे मातरम्’का प्रस्तुतिकरण किया गया ।
श्री सोमनाथ ज्योर्तिलिंग के दिव्यांशण के भावपूर्ण दर्शन !
Divyansh Darshan of Somnath Jyotirlinga
A moment of pure divinity at the Sanatan Rashtra Shankhnad Mahotsav🙏The atmosphere is charged with divine vibrations from the sacred fragments of Somnath Jyotirlinga!
Watch Live: https://t.co/iQNDe1XlCO#Rise_For_SanatanRashtra pic.twitter.com/J3iXIAxI0D
— Sanatan Rashtra Shankhnad Mahotsav 🙏🏻☀️🚩 (@SRSmahotsav) December 13, 2025
क्रूरकर्मी मोहम्मद गजनी ने वर्ष १०२६ में १२ ज्योर्तिलिगों में से एक गुजरात के श्री सोमनाथ मंदिर का विध्वंस किया । उसने मंदिर में स्थित श्री सोमनाथ शिवलिंग खंडित किया । उस समय श्री सोमनाथ शिवलिंग कुछ भागों में बंट गया । तमिलनाडू राज्य के तंजावर के पुजारी परिवार के वेदप्रचाररत्न वेदकुलपति श्री. जी.के. सीताराम के परिवार ने १ सहस्र वर्ष से अधिक काल तक इस मूल श्री सोमनाथ ज्योर्तिलिंग के दिव्यांश सुरक्षित रखे । श्री सोमनाथ ज्योर्तिलिंग के ये दिव्यांश पहली बार ही सार्वजनिकरूप से सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव में दर्शन हेतु लाए गए । इस समय सभी ने श्री सोमनाथ ज्योर्तिलिंग के दिव्यांश के दर्शन किए । श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी एवं श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी ने व्यासपीठ पर श्री सोमनाथ ज्योर्तिलिंग के दिव्यांश का पूजन किया । इस समय उपस्थित धर्मप्रेमियों ने हाथ उठाकर ‘हर हर महादेव ।’, ‘नम: पार्वतीपते हर हर महादेव’का जयघोष किया ।
‘संकल्प रामराज्य का‘ ग्रंथ का लोकार्पण !

इस अवसर पर मान्यवरों के हस्तों गोवा में मई २०२५ में संपन्न ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’पर आधारित ‘संकल्प रामराज्य का’ इस ग्रंथ का लोकार्पण किया गया । सनातन संस्था की ओर से अब तक १३ भाषाओं के ३६९ ग्रंथों की निर्मिति की गई है तथा अब तक १ करोड से अधिक ग्रंथों का वितरण हुआ है ।
विशेषतापूर्ण !
१. इस अवसर पर ‘वन्दे मातरम्’ गीत को १५० वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओर से बनाए गए एक वीडियो का प्रसारण किया गया ।
२. संपूर्ण ‘वन्दे मातरम्’का सामूहिक गायन करते समय अनेक धर्मप्रेमियों की आंखों में भावाश्रू आए ।








