
‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे शौर्यपूर्ण अभियानों से लेकर चौथे स्थान की आर्थिक महासत्ता बनने तक की यात्रा भारत ने तय की है; परंतु देश को अब भी आतंकवाद का संकट घेरे है । देशविरोधी विदेशी शक्तियां भी “डीप स्टेट”, नक्सलवाद, विघटनवादी तत्व, घुसपैठ, नैरेटिव (झूठा कथानक) युद्ध, लव जिहाद, हलाल जिहाद आदि माध्यमों से भारत को दुर्बल और त्रस्त करने का प्रयास कर रही हैं । ऐसे समय में भारत को ढोंगी धर्मनिरपेक्षता की नहीं; अपितु प्रभु श्रीराम, श्रीकृष्ण और छत्रपति शिवाजी महाराज की क्षात्रतेज की अत्यंत आवश्यकता है ।
सुरक्षा, संस्कृति और शौर्य के जागरण के लिए भारत का विश्वकल्याणकारी ‘सनातन राष्ट्र’ के रूप में स्थापित रहना अत्यंत आवश्यक है । इस संदेश को देशभर पहुंचाने के लिए ‘सेव कल्चर सेव भारत फाउंडेशन’ प्रस्तुत एवं ‘सनातन संस्था’ द्वारा आयोजित भव्य ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ १३ और १४ दिसंबर २०२५ को नई दिल्ली (इंद्रप्रस्थ) के ‘भारत मंडपम’ में होने जा रहा है ।
सनातन संस्था के रजत (२५ वें) महोत्सवी वर्ष एवं रामराज्य जैसे ‘सनातन राष्ट्र’ की स्थापना के लिए कार्यरत सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले के जन्मोत्सव के अवसर पर गोवा में पहला ‘शंखनाद महोत्सव’ आयोजित किया गया । इसमें २३ देशों से ३०,००० से अधिक भक्तों की अभूतपूर्व उपस्थिति रही तथा कई साधु–संतों, गोवा के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री भी इसमें सम्मिलित हुए । यह महोत्सव सफलतापूर्वक संपन्न हुआ । तत्पश्चात अब दिल्ली में होनेवाला यह महोत्सव राष्ट्र और संस्कृति के संरक्षण का शंखनाद करनेवाला होगा ।
शंखनाद महोत्सव के विविध चर्चासत्र एवं संबोधन
१३ दिसम्बर – छत्रपति शिवाजी महाराज एवं संस्कृतिरक्षण
छत्रपति शिवाजी महाराज का स्वराज्य मूलतः सनातन राष्ट्र तथा आदर्श राज्य का स्वरूप था । इसी दृष्टि से १३ दिसम्बर को ‘छत्रपति शिवाजी महाराज तथा संस्कृतिरक्षण’ विषय रखा गया है । ‘छत्रपति शिवाजी महाराज की कार्यपद्धति तथा वर्तमान भारत’ विषय पर सनातन संवाद होगा । इसमें भारत के भूतपूर्व मुख्य न्यायाधीश उदय ललित, ‘मंदिरमुक्ति संग्राम’ से संबंध अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन तथा लेखिका शेफाली वैद्य सम्मिलित होंगी ।
इसी दिन ‘संस्कृति संवाद’ भी होगा, जिसमें भारतीय संस्कृति का ह्रास करने वाले पक्षों तथा सांस्कृतिक जागरण पर चर्चा होगी । इसके साथ ‘मंदिर संवाद’ भी रखा गया है, जिसमें हिन्दू मन्दिरों के संबंध में सम्पन्न एवं शेष कार्यों पर मान्यवर मार्गदर्शन करेंगे ।
१४ दिसम्बर – राष्ट्रीय सुरक्षा
इस दिन ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ विषय पर चर्चा होगी, जिसका आधार ‘सनातन धर्म की सुरक्षा में भारत की सुरक्षा’ यह विचार है । अंतर्निहित एवं बाह्य सुरक्षा पर रणसंवाद होगा । इसमें थलसेना, वायुसेना, नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी तथा ‘रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन’ के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक सम्मिलित होंगे । नक्सलवाद एवं शहरी नक्सलवाद पर भी चर्चा होगी । साथ ही ‘भारत की प्रगति में सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं तथा व्यक्तियों का अपेक्षित योगदान’ विषय पर भी मार्गदर्शन होगा । अंततः ‘विश्वकल्याणकारी सनातन राष्ट्र की दिशा क्या होनी चाहिए ?’ इस पर परम् पूज्य स्वामी गोविंददेव गिरी मार्गदर्शन करेंगे ।
मुख्य आकर्षण
‘स्वराज्य का शौर्यनाद’: शिवकालीन शस्त्रों का भव्य प्रदर्शन

१३, १४ तथा १५ दिसम्बर को ‘स्वराज्य का शौर्यनाद’ नामक प्रदर्शनी आयोजित होगी । यह ऐतिहासिक महत्व वाले शस्त्रों का दुर्लभ प्रदर्शन होगा । इसमें विशेष आकर्षण होंगे,
- छत्रपति शिवाजी महाराज के काल के 1500 से अधिक ऐतिहासिक शस्त्रों का विशाल संग्रह
- छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्वयं स्पर्श की गई और सरसेनापति हंबीरराव मोहिते को प्रदान की गई तलवार, ढाल, दांडपट्टा, कट्यार, बंदूकें,और अन्य शस्त्र
- मंगल पांडे की बंदूक और पानीपत युद्ध की तोप
- महाराणा प्रताप के काल के शस्त्र
- विजयनगर साम्राज्य के कुछ शस्त्र
- बालक और महिलाओं की सुरक्षा के लिए उपयोग में आने वाले कुछ शस्त्र
- बच्चों को प्रेरित करने हेतु कुछ शस्त्र उन्हें संभालने हेतु दिए जाएंगे
- तोप चलाने का लाइव प्रदर्शन भी होगा
प्रदर्शनी समय व स्थान
स्थान: हॉल नंबर 12
समय: प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक
प्रवेश: जनसाधारण के लिए खुला
‘वंदे मातरम्’ पर भव्य प्रदर्शनी

‘वंदे मातरम्’ इस राष्ट्रजागरण के पावन गीत को इस वर्ष 150 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर तथा सनातन संस्था की 25 वर्षों की कार्ययात्रा का सुवर्ण संगम साधते हुए, केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ में ‘वंदे मातरम्’ पर आधारित भव्य प्रदर्शनी और विशेष सत्रों का आयोजन किया है।
- 1000 जनों का सामूहिक गायन : ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रभावना का महाअभियान
- ऐतिहासिक चलचित्र प्रदर्शनी : ‘वंदे मातरम्’ का उद्भव, संघर्षगाथा और राष्ट्रनिर्माण में योगदान
- केंद्रीय संस्कृति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत का मार्गदर्शन : ‘वंदे मातरम्’ के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व पर व्याख्यान
इस प्रदर्शनी में मातृभूमि के प्रति प्रेम, राष्ट्र के लिए त्याग और स्वतंत्रता संग्राम की भावना को अनुभवात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। उपस्थित होते समय सरकारी पहचान पत्र साथ लाना अनिवार्य है।
दुर्लभ सोमनाथ ज्योतिर्लिंग अवशेष और रामसेतु की दिव्य रामशिला के दर्शन

महोत्सव में एक सहस्र वर्ष से अधिक काल से संरक्षित मूल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के अवशेषों का प्रथम बार सार्वजनिक दर्शन कराया जाएगा। इन्हें गजनी के महमूद द्वारा विध्वंस के बाद पुजारी परिवार ने तमिलनाडु में सुरक्षित रखा था। ये अवशेष कांची कामकोटि पीठ के आशीर्वाद से सनातन संस्था द्वारा प्रदर्शित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही प्रभु श्रीराम द्वारा निर्मित रामसेतु की ‘रामशिला’ (जल में तैरने वाले दिव्य पत्थर) का भी दर्शन कराया जाएगा।
‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ का उद्देश्य राष्ट्ररक्षा, संस्कृति, शौर्य और हिंदवी स्वराज्य के तेज को पुनः प्रज्ज्वलित करना है। सनातन संस्था ने अपील की है कि सभी परिवारजन, विशेषकर युवा पीढ़ी और बच्चे, इस प्रेरणादायी महोत्सव में अवश्य सहभागी हों।
कार्यक्रम का सीधा प्रसारण SanatanRashtraShankhnad.in पर देखा जा सकता है।








