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श्री देव बोडगेश्वर जत्रोत्सव में ‘जायंट व्हील’ जैसे व्यापार स्थानीय हिंदुओं को ही दिए जाएं – हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों की मांग

म्हापसा स्थित हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों की श्री देव बोडगेश्वर मंदिर समिति से मांग

श्री देव बोडगेश्वर मंदिर समिति के पदाधिकारियों को ज्ञापन सौंपते समय ‘गोमंतक मंदिर महासंघ’ एवं अन्य हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के सदस्य

म्हापसा: म्हापसा के प्रसिद्ध श्री देव बोडगेश्वर जत्रोत्सव में ‘जायंट व्हील’ और इस प्रकार की मनोरंजन सेवाएं केवल स्थानीय हिंदुओं को ही देने की मांग ‘गोमंतक मंदिर महासंघ’ और अन्य हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों ने 2 दिसंबर को श्री देव बोडगेश्वर मंदिर समिति को सौंपे गए ज्ञापन में की है।

इस दौरान ‘गोवा हिंदू युवाशक्ति’, ‘स्वराज्य गोमंतक’, ‘विश्व हिंदू एकता संगठन’, ‘गोंयची नारीशक्ति’, ‘समर्थन संगठन-गोवा’, ‘शिवराज्य प्रतिष्ठान-गोवा’, ‘हिन्दू जनजागृति समिति’ और ‘गोमंतक मंदिर महासंघ’ इन संगठनों के पदाधिकारी अमेय नाटेकर, सिद्धार्थ मांद्रेकर, सूजन नाइक, विनोद वरखंडकर, जयेश थळी, गोविंद गोवेकर, नितिन आगरवाडेकर आदि उपस्थित थे।

ज्ञापन में कहा गया है कि, पिछले कुछ वर्षों से जत्रोत्सव में ‘जायंट व्हील’ और अन्य मनोरंजन सेवाएं तथा लगभग आधी से अधिक दुकानें योजना बनाकर कुछ विशेष समूहों द्वारा कब्जे में ली जा रही हैं।

दिल्ली में हुए बम विस्फोट के पश्चात राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न गंभीर रूप से सामने आया है। हाल ही में जांच एजेंसियों ने मंदिर के प्रसाद के माध्यम से आतंक फैलाने की साजिश उजागर की है। ऐसी परिस्थितियों में मंदिर की पवित्रता बनी रहे, जत्रोत्सव में ‘जायंट व्हील’ और ऐसे व्यवसाय केवल स्थानीय हिंदू समाज को ही दिए जाएं, तथा व्यापार के अनुमति देने से पहले प्रत्येक आवेदक की विस्तृत जांच अनिवार्य की जाए—इस प्रकार की मांगें ज्ञापन में की गई हैं।

इसके साथ ही धर्मरक्षा के लिए कार्य करने वालों को प्रोत्साहन मिले, इस हेतु तालुका या राज्य स्तर पर उल्लेखनीय धर्मरक्षण कार्य करनेवालों का जत्रोत्सव में सम्मान करने की मांग भी की गई है। ज्ञापन सौंपने से पूर्व उपस्थित प्रतिनिधियों ने श्री देव बोडगेश्वर के दर्शन कर प्रार्थना की।

प्रसारमाध्यमों से बातचीत करते हुए प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों ने कहा, “संस्कृति और वर्षों पुरानी परंपराओं का संरक्षण, स्थानीय नागरिकों की आजीविका की रक्षा तथा गोवा के बहुसंख्यक हिंदू समाज के हितों की रक्षा—इन्हीं उद्देश्यों को ध्यान में रखकर यह मांग की गई है।”

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