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सांगली (महाराष्ट्र) में ‘हिंदू एकता आंदोलन’ का प्रदर्शन, कट्टरता फैलानेवाले मदरसों पर कार्रवाई की मांग

“दिल्ली बम विस्फोट की पृष्ठभूमि पर आतंकवादी तैयार करने वाले मदरसों पर प्रतिबंध लगाने की मांग

प्रदर्शन करते हुए हिंदू एकता आंदोलन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता

सांगली: 10 नवंबर को दिल्ली स्थित लालकिला परिसर में देश के जिहादियों द्वारा किए गए बम विस्फोट में 13 निर्दोष नागरिकों की मृत्यु हुई। इस विस्फोट की जिम्मेदारी कुख्यात आतंकवादी संगठन टी.आर.एफ. (द रेजिस्टेंस फ्रंट) ने स्वीकार की है। टी.आर.एफ. संगठन ‘लश्कर-ए-तैयबा’ का एक प्रमुख फ्रंट है। इस बम विस्फोट में डॉ. मुझम्मिल, डॉ. आदिल, डॉ. उमर नबी और डॉ. शाहीन का सहभाग बताया गया है।

दिल्ली बम विस्फोट की साजिश मदरसे में रची गई। मदरसों में कट्टरता की शिक्षा दी जाती है—ऐसा आरोप लगाते हुए देश के अवैध मदरसों पर प्रतिबंध लगाया जाए तथा वहां किस प्रकार की शिक्षा दी जाती है, इसकी जांच की जाए, इन मांगों के लिए हिंदू एकता आंदोलन की ओर से यहां के स्टेशन रोड पर हाल ही में उग्र आंदोलन किया गया। यह आंदोलन हिंदू एकता आंदोलन के प्रदेशाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक श्री नितीन शिंदे के नेतृत्व में हुआ।

इस अवसर पर हिंदू एकता आंदोलन के सांगली जिला अध्यक्ष श्री संजय जाधव, तथा रावसाहेब खोजगे, मनोज सालुंखे, सोमनाथ गोटखिंडे, राजू जाधव, रविंद्र वादवणे, प्रकाश चव्हाण आदि पदाधिकारी उपस्थित थे।

इस दौरान पूर्व विधायक श्री नितीन शिंदे ने कहा कि, दिल्ली बम विस्फोट के साथ देश के 33 स्थानों पर बम लगाने की जिहादियों की साजिश थी। विषैले पदार्थों के माध्यम से 10 लाख से अधिक हिंदुओं का नरसंहार करने की योजना थी। पकड़े गए ये सभी जिहादी देश के मदरसों में पढ़े हुए हैं। आतंकवादियों की कमर तोड़ने के लिए देश में ‘कॉम्बिंग ऑपरेशन’ (धर-पकड़ अभियान) चलाया जाना चाहिए।

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