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जयपुर में ३ दिवसीय सम्मलेन का आयोजन
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वक्ताओं ने भारत-विरोधी कथानकों की खुले आम पहचान कराई !
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तीन दिनों में कुल 42 सत्र आयोजित
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राजनेता, विचारक, रक्षा विशेषज्ञ और हिन्दुत्वनिष्ठ व्यक्तित्व हुए सम्मिलित
जयपुर (राजस्थान) – हमारे शत्रु कहीं बाहर नहीं हैं, इसे हमें समझ लेना आवश्यक है । स्वतंत्रतापूर्व काल में इतिहासकारों ने सत्य को छिपाए बिना इतिहास लिखा; परंतु स्वतंत्रता के उपरांत मार्क्सवाद के प्रभाव में आकर इतिहास को विकृत बनाया गया । हमारी वास्तविक परंपराओं तथा सांस्कृतिक दृष्टि को हटाकर नई विकृति रची गई । जेएनयु एवं अलीगढ जैसे विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों से मूल भारतीय इतिहास ही गायब हुआ । उसके कारण आज हमें यह समझ लेना होगा कि हमारे शत्रु हमारे विचारविश्व में ही छिपे हुए हैं, ऐसा प्रतिपादन प्रसिद्ध इतिहासकार एवं राज्यसभा सासंद (राष्ट्रपति द्वारा नामनिर्देशित) मीनाक्षी जैन ने किया । ७ से ९ नवंबर की अवधि में जयपुर में आयोजित प्रसिद्ध ‘जयपुर डायलॉग २०२५’सम्मेलन में ‘शत्रुबोध’ इस विषय पर आयोजित सत्र में सांसद मीनाक्षी जैन ऐसा बोल रही थीं ।
#TJD The Jaipur Dialogues!
Participated at @JaipurDialogues annual summit – Shatrubodh.@satyanveshan @TeamNimittekam @MajiDevDutta @HinduJagrutiOrg pic.twitter.com/ecdGc7pSHg
— 🚩 Ramesh Shinde 🇮🇳 (@Ramesh_hjs) November 8, 2025

- सांसद मीनाक्षी जैन ने दीपप्रज्वलन कर इस सम्मेलन का उद्घाटन किया । सम्मेलन के पहले दिन मुख्य सभागारसहित विभिन्न स्थानों पर कुल १४ सत्र आयोजित किए गए । इस अवसर पर जयपुर डायलॉग के अध्यक्ष संजय दीक्षित द्वारा लिखित ‘ऑल रिलिजेंस आर् नॉट सेम ’, इस अंग्रेजी पुस्तक के ‘सभी धर्म समान नहीं’ इस हिन्दी संस्करण का लोकार्पण किया गया ।
- जयपुर में आरंभ हुए तीन दिवसीय ‘जयपुर डायलॉग्स 2025’ सम्मेलन की शुरुआत राज्यसभा सांसद एवं इतिहासकार डॉ. मीनाक्षी जैन ने दीपप्रज्वलन कर की। उन्होंने कहा कि “हमारे शत्रु कहीं बाहर नहीं, बल्कि हमारे विचारविश्व में ही छिपे हैं”, और स्वतंत्रता के बाद इतिहास को मार्क्सवादी दृष्टिकोण से विकृत किया गया।
- पहले दिन आयोजित 14 सत्रों में राष्ट्र, संस्कृति और शिक्षा क्षेत्र में बढ़ रही भारत-विरोधी गतिविधियों पर चर्चा हुई।
- ‘संस्कृति के शत्रुओं की पहचान’ सत्र में वक्ताओं ने झूठे कथानकों को उजागर करना ही सच्ची देशसेवा बताया।
- ‘शिक्षा के द्वारा हो रही भारतविरोधी घुसपैठ’ सत्र में डॉ. मीनाक्षी जैन, एस्थर धनराज व अन्य वक्ताओं ने विदेशी विचारधाराओं के प्रभाव को पहचानने की आवश्यकता बताई।
- ‘देश के आंतरिक शत्रुओं का बोध’ सत्र में ‘ब्रेकिंग इंडिया’ और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ जैसी प्रवृत्तियों पर चर्चा हुई।
- ‘लालफीताशाही, भ्रष्टाचार और नागरिक संस्कारों के अभाव’ पर वक्ताओं ने नैतिक शिक्षा को आवश्यक बताया।
- ‘वेदिक गणना और भारतीय कालक्रम’ सत्र में भारतीय परंपराओं की वैज्ञानिकता पर प्रकाश डाला गया।
- ‘सनातन और सोशल मीडिया का प्रभाव’ सत्र में हिन्दुत्व के नाम पर फैल रहे भ्रामक नैरेटिव्स की आलोचना की गई।
- अंतिम सत्र में युवा पीढ़ी पर विदेशी प्रभावों और अश्लीलता के प्रसार पर चिंता व्यक्त की गई, तथा स्वदेशी सामाजिक माध्यमों की निर्मिति की मांग की गई।
08 नवंबर 2025, जयपुर, राजस्थान।
'द जयपुर डायलॉग्स एनुअल समिट 2025' में 'शत्रुबोध' थीम पर अपने विचार रखने का अवसर मिला। राष्ट्रवादियों के इस महाकुंभ में मिलने वाला स्नेह, आशीर्वाद और समर्थन वास्तव में प्रेरणा-दायक रहा। विचारों का अदन-प्रदान और राष्ट्र संबंध मुद्दों पर गहरी चर्चा… pic.twitter.com/7aseoFRK0R— Vishnu Shankar Jain (@Vishnu_Jain1) November 9, 2025
द्वितीय दिन
- ‘जयपुर डायलॉग्स 2025’ के दूसरे दिन ‘शत्रुबोध’ विषय पर भारतविरोधी कथानकों व षड्यंत्रों पर तीखी चर्चा हुई। वक्ताओं ने ‘हंगर’ व ‘हैप्पीनेस इंडेक्स’ में भारत को नीचे दिखाने को शत्रुराष्ट्रों की चाल बताया।
- भारत में ‘हलाल अर्थव्यवस्था’ (Halal Economy) इस शत्रूबोध के अंतर्गत हुए चर्चासत्र को हिन्दू जनजागृति समिति के श्री रमेश शिंदे के साथ श्री जय आहूजा, डॉ. ओमेंद्र रत्नू तथा श्री देवदत्त माझी ने संबोधित किया ।
हलाल मांस नहीं चाहिए, अतः हिन्दू खाटिक (कसाई) समाज को जागरूक करें ! – रमेश शिंदे

इस अवसर पर श्री रमेश शिंदे ने कहा कि,
१. प्रत्येक स्थान के मुसलमान हलाल उत्पादों की मांग करते हैं; परंतु एक भी हिन्दू ‘हलाल उत्पाद नहीं चाहिए’, इस प्रकार ईक्षा नहीं दर्शाता एवं न ही ऐसी मांग करता है । यदि किसी मुसलमान से कहा जाए कि ‘तुझे ५० रुपये कम दाम में झटका मांस देता हूं’, तो भी वह उसे अस्वीकार कर देता है । इसके विपरीत, हिन्दू को झटका हो या हलाल, इससे कोई लेना-देना नहीं होता ।
२. दूसरी ओर, हिन्दू मांस का व्यापार करने के लिए तैयार ही नहीं होते । इसमें उन्हें कुछ कठिनाइयां होने का पता चला । यदि यह व्यवसाय किया, तो विवाह के लिए लडकियां नहीं मिलतीं । कुछ स्थानों पर यह एक अनुचित धारणा भी है कि जानवरों को मारने पर हमें पाप लगता है । इसलिए जो हिन्दू व्यापारी मांस बेचते हैं, वे मुसलमानों द्वारा मारे गए जानवर ही लाकर उनका मांस बेचते हैं ।
३. खाटिक समाज के कई लोग अशिक्षित एवं धर्मशिक्षित न होने के कारण उनका इस विषय पर मार्गदर्शन होना आवश्यक है । जब इस्लाम नहीं था, तब भी लोग मांसाहार करते ही थे । तब यदि हिन्दू लोग जानवरों की हत्या करते थे, तो क्या उन्हें पाप नहीं लगता था ? इसलिए इस संदर्भ में हिन्दुओं को मार्गदर्शन देना आवश्यक है ।
४. इस संपूर्ण भयावहता को आंकडों के रूप में देखें, तो केवल मुर्गी तथा बकरी के मांस का कुल व्यापार १० सहस्र (हजार) करोड रुपये का है। इसमें से अधिकांश मांस का उत्पादन हलाल पद्धति से होता है ।
‘हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति’ के माध्यम से हिन्दुत्वनिष्ठ संगठन किस प्रकार एकत्रित होकर हिन्दू धर्म की रक्षा का कार्य कर रहे हैं, इस विषय में भी श्री शिंदे ने इस अवसर पर जानकारी दी ।
इस समय चिकित्सक (आधुनिक वैद्य) डॉ. रत्नू ने कहा कि हलाल मांस स्वास्थ्य की दृष्टि से हानिकारक है तथा झटका मांस सुरक्षित है ।
तृतीय दिवस
- ‘जयपुर डायलॉग्ज 2025’ का तीन दिवसीय राष्ट्रवादी विचारमंथन का 9 नवंबर को समापन हुआ।
- सम्मेलन का केंद्रबिंदु विषय ‘शत्रुबोध’ (शत्रु की पहचान) और ‘आत्मबोध’ (स्वयं की चेतना) रहा।
- सत्रों में धर्मांतरण, भ्रष्टाचार, शिक्षा, रक्षा, राजनीति और संस्कृति जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
- ‘सिविलाइजेशन शत्रुबोध’ सत्र में वक्ताओं ने इतिहास के विकृतिकरण का विरोध किया और हिन्दू इतिहास पुनर्लेखन की मांग की।
- कुछ सत्रों में राजकीय नीतियों और विभाजनकारी राजनीति की आलोचना की गई।
- ‘शत्रु पहचान’ सत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा नीति निर्धारण में स्पष्ट रणनीति अपनाने का सुझाव दिया गया।
- इस अवसर पर ‘वर्ल्ड फास्ट एआई फॉर सनातन’ नामक एप का लोकार्पण हुआ।
- ‘आत्मनिर्भर रक्षा’ सत्र में विशेषज्ञों ने तकनीक आधारित आधुनिक युद्ध और मेक इन इंडिया की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
- शिक्षा सत्र में वक्ताओं ने भारतीय शिक्षा प्रणाली के पुनरुद्धार और गुरुकुल परंपरा की पुनर्स्थापना पर बल दिया।
🇮🇳 #TJD2025 | Day 3 – “Shatrubodh” 🔥
The Jaipur Dialogues Annual Summit 2025 (#TJD2025) concluded on 9th November 2025 after three days of intense deliberations across 42 sessions, focused on the themes #Shatrubodh (awareness of adversaries)Highlights of Day 3
🇮🇳 India’s… pic.twitter.com/armLPNjVK5— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) November 10, 2025









