नंदुरबार में हिन्दुत्ववादी संगठनों की गृह विभाग से मांग

नंदुरबार – नंदुरबार में समस्त हिन्दुत्ववादी संगठनों ने सेवानिवृत्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारी राकेश मारिया के आपराधिक कृत्यों की जांच करने की मांग की है । इस संबंध में उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री को ज्ञापन सौंपा । इस अवसर पर हिन्दुत्वनिष्ठ श्री. मयूर चौधरी, श्री. सुमित परदेशी, जयेश भोई, भूषण पाटील, चेतन गवळी, कु. अश्लेषा पवार, भावना कदम तथा हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. राहुल मराठे उपस्थित थे । इस ज्ञापन पर २५० से अधिक नागरिकों के हस्ताक्षर हैं ।
राकेश मारिया एवं सुनील माने पर लगाए गए प्रमुख आरोप
१. महाराष्ट्र राज्य के गृह विभाग की छवि को देशभर में धूमिल करने वाले एंटीलिया विस्फोटक तथा उसके पश्चात मनसुख हिरेन हत्या प्रकरणों में राकेश मारिया के निकट सहयोगी सुनील माने को पुलिस बल से निष्कासित कर दिया गया है । मालेगांव प्रकरण के निर्णय में न्यायालय ने आतंकवाद विरोधी दल (ATS) की खिंचाई की थी, जिसमें सुनील माने समाहित थे । उन पर वर्ष २००६ के मुंबई लोकल बम विस्फोट प्रकरण में अमानवीय यातना देने का भी आरोप था ।
२. दाभोलकर हत्या प्रकरण में, उस समय बंदी बनाए गए पहले व्यक्ति नागोरी एवं खंडेलवाल ने गंभीर आरोप लगाया था कि राकेश मारिया ने उन्हें झूठा बयान देने के लिए २५ लाख रुपये की बात भी (रिश्वत) की थी । इसके साथ ही, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने कहा था कि मुंबई ATS ने नकली (फर्जी) ‘फॉरेंसिक’ रिपोर्ट प्राप्त की थी । इस प्रकरण में यह भी प्रमाण न्यायालय के सामने आया है कि सुनील माने अनाधिकृत रूप से जांच में समाहित थे तथा निर्दोषों को फंसाने का प्रयास कर रहे थे ।
३. वर्ष २००९ में नासिक में, राकेश मारिया एवं सुनील माने ने पत्रकार परिषद आयोजित कर दावा किया था कि एक कार्यकर्ता के पास से पिस्तौल मिली है । उसके उपरांत आरोपपत्र (Chargesheet) में इन दोनों का कोई उल्लेख नहीं था, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि पुलिस ने एक निर्दोष व्यक्ति को बंदी बना लिया था ।








