लव जिहाद विरोधी कानून बनाने की युवतियों की जनप्रतिनिधियों से मांग !

मुंबई – स्त्रियों पर बढ़ते अत्याचारों की पृष्ठभूमि में उनमें आत्मबल एवं शौर्य की भावना जागृत करने के उद्देश्य से हिन्दू जनजागृति समिति की रणरागिणी शाखा ने विजयदशमी के निमित्त राज्यभर में विभिन्न स्थानों पर ‘शस्त्रपूजन’ तथा ‘स्वसंरक्षण प्रशिक्षण’ प्रत्यक्ष उपक्रमों का आयोजन किया । इन उपक्रमों के माध्यम से स्त्रियों को शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक स्तरों पर सक्षम बनाना, उनमें संगठनात्मक शक्ति का संवर्धन करना तथा अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने हेतु उनके मनोबल में वृद्धि का प्रयत्न किया गया ।

जळगाव में भारतीय जनता पार्टी के विधायक श्री. सुरेशमामा भोळे को युवतियों ने ‘महाराष्ट्र में शीघ्रातिशीघ्र लव जिहादविरोधी कानून लाया जाए’ इस विषय का निवेदन प्रस्तुत किया । इसी प्रकार राज्य के अन्य अनेक जनप्रतिनिधियों को भी निवेदन प्रस्तुत किए जा रहे हैं, ऐसी सूचना हिन्दू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ राज्य संघटक श्री. सुनील घनवट ने प्रसिद्धिपत्र के माध्यम से दी । इस उपक्रमों को राज्यभर से स्त्रियों एवं युवतियों का उत्स्फूर्त प्रतिसाद प्राप्त हुआ । अनेक महिलाओं ने स्वसंरक्षण प्रशिक्षण सीखने का संकल्प प्रकट किया ।
१. रणरागिणी शाखा ने राज्यभर में आयोजित कार्यक्रमों में तलवार, दांडपट्टा, भाले, कट्यार आदि पारम्परिक शस्त्रों का पूजन किया ।



२. ‘मैं हूं दुर्गा’ इस संकल्पना पर आधारित इन कार्यक्रमों ने स्त्रियों को उनकी सुप्त शक्ति का बोध कराया । इस अवसर पर रणरागिणी शाखा की कार्यकर्त्रियों ने स्वसंरक्षण प्रशिक्षण के प्रात्यक्षिक प्रस्तुत किए । इसमें कराटे, लाठीकाठी एवं जुडो जैसे प्रशिक्षण प्रकार सम्मिलित थे ।
स्त्रियों को मानसिक तथा आध्यात्मिक रूप से भी सशक्त करने का रणरागिणी शाखा का उद्देश्य ! – कुमारी प्रतीक्षा कोरगावकर, रणरागिणी शाखा
रणरागिणी शाखा की कुमारी प्रतीक्षा कोरगावकर ने कहा –
‘आज की स्त्री अबला नहीं, अपितु दुर्गा का ही रूप है । समाज में स्त्रियों पर हो रहे अन्याय और अत्याचार रोकने हेतु केवल कानून पर निर्भर न रहकर, प्रत्येक स्त्री को अपने रक्षण के लिए सक्षम होना – यह समय की आवश्यकता है । रणरागिणी शाखा स्वसंरक्षण प्रशिक्षण के माध्यम से यही शौर्य एवं धैर्य स्त्रियों में जागृत कर रही है । हमारा उद्देश्य स्त्रियों को केवल शारीरिक ही नहीं, अपितु मानसिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से भी सशक्त करके एक निर्भय समाज की निर्मिति करना है ।’








