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सूचना के अधिकार कानून के अंतर्गत मिली जानकारी से भ्रष्टाचार का खुलासा !
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दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई करने की हिन्दू जनजागृति समिति की मांग !

कारवार (कर्नाटक) – उत्तर कन्नड तालुका के कणसगिरी गांव में सर्वेक्षण क्रमांक ९५ में जिला निर्माण केंद्र की ओर से सरकारी गोशाला का निर्माण किया जा रहा है । इसमें लाखों रुपये का गबन होने की जानकारी सामने आई है । परियोजना प्रबंधक हर्ष शेट्टीगार और अभियंता कामराज ने अपने अधिकार क्षेत्र का दुरुपयोग कर अत्यंत घटिया गुणवत्ता का निर्माण करवाया है । इन अधिकारियों पर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें पद से निलंबित किया जाए, ऐसी मांग हिन्दू जनजागृति समिति के कर्नाटक राज्य प्रवक्ता श्री. मोहन गौडा ने यहां की । वे २३ जुलाई को यहां के जिला पत्रकार भवन में आयोजित पत्रकार परिषद में बोल रहे थे । इस अवसर पर ‘सनातन गोमाता चैरिटेबल ट्रस्ट’ के अध्यक्ष श्री. संदीप आर. गोकर्णकर, ‘सनातन राष्ट्रीय सेवा संघ’ के अध्यक्ष श्री. शरद, गोरक्षक और बजरंग दल के प्रमुख श्री. अमित माळशेकर और भगतसिंह सेना के अध्यक्ष श्री. सूर्यकांत भी उपस्थित थे ।
श्री. गौडा ने रखे महत्वपूर्ण सूत्र !
१. निर्माण की स्वीकृति मिली ही नहीं : निर्माण केंद्र ने यह निर्माण जनवरी २०२३ में शुरू किया; परंतु इसके लिए पशुसंवर्धन विभाग की तकनीकी स्वीकृति (Technical approval of the Department of Animal Husbandry), काम पूरा होने के पश्चात अर्थात अक्टूबर २०२४ में प्राप्त की गई ।
२. भुगतानों (बिल) में अंतर : गोशाला के निर्माण का अनुमानित खर्च ५० लाख रुपये है और अब तक हुए निर्माण की राशि ४२ लाख १२ हजार रुपये है; परंतु भुगतानों की राशि ३८ लाख ९० हजार रुपये दिखाई गई है ।
३. दीवारें बनाने में भी गडबडी : दीवारों के निर्माण के लिए अनुमानतः ५ हजार ३०० रुपये के कंक्रीट ब्लॉक्स की आवश्यकता है और दीवारों का काम पूर्ण हो चुका है; परंतु हमें मिले भुगतानों के अनुसार अब तक केवल ३ हजार १२० रुपये के कंक्रीट ब्लॉक्स खरीदे गए हैं ।
४. लगभग दोगुना लोहे की छडें (सरिए) इस्तेमाल की गईं: लोहे की छडों की मात्रा अनुमानित पत्रक में २ हजार ६०१.०५ किलो है; परंतु प्राप्त भुगतानों के अनुसार ४ हजार २४८.१० किलो लोहे की छडें (सरिए) खरीदी गईं ।
५. अन्य वस्तुओं की खरीद में भी अनियमितता: ऐसा ही प्रकार टाइल, पाइप, छत, चेन लिंक, इलेक्ट्रिक वायर, पेंट, प्लाइवुड, सीमेंट इन सभी वस्तुओं की खरीद प्रक्रिया में हुआ है ।








