-
संत तुकाराम महाराज का सदेह वैकुंठ गमन अस्वीकारनेवाले लोग संत तुकाराम महाराज पालकी समारोह में सम्मिलित होेंगे !
-
‘संविधान समता दिंडी’में इससे पहले सम्मिलित हुए कुछ लोगों पर नक्सलवादी कार्यवाहियों में सम्मिलित होने से प्रविष्ट अपराध !
पुणे : हिन्दुओं के देवी-देवता, संत एवं श्रद्धास्थान की निरंतर निंदा करनेवाले, इतना ही नहीं अपितु भगवान का अस्तित्व ही न माननेवाले अंनिसवालों ने ‘संविधान समता दिंडी’ के लुभावने नाम से आषाढी-एकादशी वारी में घुस गए हैं ।

जगद्गुरु संत तुकाराम महाराजजी का सदेह वैकुंठगमन अस्वीकार करनेवाले, इसके साथ ही संत तुकारामगाथा पानी पर तैरने का चमत्कार अस्वीकार करनेवाली अंनिस के लोग संत तुकाराम महाराजजी के पालकी समारोह में सम्मिलित हुए हैं । यह ढोंगबाजी ध्यान में न आए, इसलिए ये नास्तिकतावादी और आधुनिकतावादी लोग ‘संविधान समता दिंडी’ के नाम से वारी में सक्रिय हैं । ‘संविधान समता दिंडी’में इससे पहले सम्मिलित हुए कुछ लोगों पर नक्सलवादी कार्यवाहियों में सम्मिलित होने से अपराध भी प्रविष्ट हुए हैं ।
‘संविधान समता दिंडी’ द्वारा २१ जून से ६ जुलाई २०२५ तक पुणे से पंढरपुर, इसप्रकार दिंडी में सम्मिलित होने के विषय की पत्रिका प्रसारित की गई है । इस पत्रिका पर ‘संयोजक’ के रूप में जिन्होंने नाम दिए हैं, उनमें से अधिकांश अंनिस के कार्यकर्ता हैं, तो कुछ अंनिस के कार्य से जुडे हैं । विशेष बात यह है कि ‘संविधान समता दिंडी’का प्रसार अंनिस के पदाधिकारी और कार्यकर्ता सामाजिक माध्यमों द्वारा कर रहे हैं । गत कुछ दिनों पहले कथित कीर्तनकार बाळकृष्ण वसंत गडकर ने कीर्तन में संत तुकाराम महाराजजी का सदेह वैकुंठ गमन, इंद्रायणी नदी में डूब चुकीं संत तुकाराम महाराजजी की गाथाएं पानी पर तैर गईं, इन पर प्रश्न उपस्थित किया । बाळकृष्ण गडकर अंनिस से जुडे हैं । उन्हीं के समान अंनिस से जुडे और स्वयं को ‘ह.भ.प.’ कहलवानेवाले लोग ‘संविधान समता दिंडी’ में सम्मिलित होकर संतों के अभंग (भक्तिगीत) अपनी सुविधानुसार उपयोग कर नास्तिकतावाद का ‘एजेंडा’ कार्यान्वित कर रहे हैं ।

यह लीजिए नक्सलवादियों के सहभाग का प्रमाण !
वारी में सम्मिलित ‘कबीर कला मंच’की कार्यकर्ता शीतल साठे के साथ उसके पति सचिन माळी
‘एक दिन तो अनुभव करें वारी’ इस घोषवाक्य की आड में संविधान के मूल्यों का प्रसार करने के लिए इस उपक्रम में वर्ष २०२२ में ‘कबीर कला मंच’ नामक वामपंथी विचारों के संगठन की कार्यकर्ता शीतल साठे सम्मिलित हुई थी । दिंडी में घुसकर संविधान के मूल्यों की ढींगें मारनेवाली शीतल साठे पर वर्ष २०१३ में ‘अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेन्शन) एक्ट’ (युएपीए) अंतर्गत माओवादियों से संबंध होने का आरोप लगाया गया था । इसमें उनके पति सचिन माळी का भी नाम था । इन दोनों ने न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण किया था । इस प्रकरण में उन्हें बंदी भी बनाया गया ।

अंनिसवालों ने ही वारी को अंधश्रद्धा घोषित करने का किया था प्रयत्न !
राज्य में काँग्रेस गठबंधन सरकार की सत्ता होने पर वर्ष २००४ से अंनिस के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र दाभोलकर ने राज्य में अंधश्रद्धा निर्मूलन कानून लाने के लिए प्रयत्न शुरू किए । इस कानून का प्रारूप काँग्रेस ने डॉ. दाभोलकर की सहायता से तैयार किया । इस कानून के विधेयक में ‘शारीरिक, आर्थिक और मानसिक’ बाधा पहुंचानेवाले कृति को अंधश्रद्धा निर्धारित करने के कानून का समावेश था । वारकरी शारीरिक कष्ट उठाकर, अर्थात पैदल चलते हुए पंढरपुर जाते हैं । यह ध्यान में रखकर ही अंनिसवालों ने जानबूझकर इस कानून में इस धारा का समावेश किया था । इसमें चमत्कारों को भी अंधश्रद्धा संबोधित किया गया था । इसलिए जगद्गुरु संत तुकाराम महाराजजी के अभंग इंद्रायणी से ऊपर आना, संतश्रेष्ठ ज्ञानेश्वर महाराजजी द्वारा भैंसे के मुख से वेद बुलवाए जाना और दीवार चलवाना, यह सब अंधश्रद्धा के अंतर्गत आता है । इसलिए समस्त वारकरी, हिन्दू जनजागृति समिति एवं सर्व हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों ने इस कानून के विरोध में राज्यव्यापी आंदोलन किए । इससे सरकार को इस कानून से ये आक्षेपजनक धारा हटानी पडी थी । इस कानून के माध्यम से वारकरियों की श्रद्धा पर अंकुश लगाने पर विफल हुए यही अंनिसवाले अब सीधे वारी में घुसकर यह काम करने का षंड्यंत्र रच रहे हैं ।
नक्सलवादियों से संबंध रखनेवाली अंनिस पर बंदी लगाएं ! – हिन्दू जनजागृति समिति
महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति, इस नाम से पहले ‘महाराष्ट्र मानवी नास्तिक मंच’ के नाम से अंनिसवाले कार्यरत थे । लोगों का प्रतिसाद नहीं मिल रहा था, इसलिए इन नास्तिकतावादियों ने ‘अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’, इसप्रकार लुभावना नाम रख लिया; परंतु फिर अनेक बातों में उनके घोटाले और भ्रष्टाचार सामने आए । गत महीने में उनके कार्यकर्ता रायगढ जिले के डोणगांव में नक्सलवादी कार्यवाहियों में पकडे गए हैं । इससे पहले गोंदिया एवं नागपुर में भी नक्सलवादी कार्यवाहियों से संबंधित अंनिस के कार्यकर्ताओं को बंदी बनाया गया था ।
नक्सलवादियों का समर्थन करनेवाले और ‘अर्बन नक्सलवाद’का कार्य करनेवाली इस संगठन पर बंदी लगानी चाहिए और संगठन पर हमेशा के लिए प्रशासक नियुक्त करना चाहिए, ऐसी मांग हिन्दू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ राज्य संगठक श्री. सुनील घनवट ने की है ।








