मर्दनगढ संवर्धन समिति का फोंडा में कार्यक्रम संपन्न !

फोंडा – छत्रपति संभाजी महाराज ने अंत्रुज महाल के हिन्दुओं एवं मंदिरों की रक्षा के लिए पुर्तगालियों के विरुद्ध निर्भयतापूर्वक संग्राम किया । इस संघर्ष में मर्दनगड का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा । २८ जून १७५६ को ही पुर्तगालियों ने मर्दनगड पर आक्रमण किया, जिसमें मराठों के हाथों लुईस मास्कारेन्हस काउंट द अल्वा नामक पुर्तगाली वायसरॉय मारा गया । इस पराजय का रोष तथा बारंबार मराठों से उत्पन्न होनेवाले संकट से बचने के लिए, आगे पुर्तगालियों ने इस मर्दनगड किले को पूर्णतः ध्वस्त कर दिया । अतः अपने पूर्वजों के इतिहास को स्मरण में रखने हेतु मर्दनगड को पुनः जागृत अवस्था में लाना आवश्यक है ।


अपने पूर्वजों का शौर्य आनेवाली पीढी तक पहुंचाने के लिए किले का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है, ऐसा आवाहन इतिहासकार श्री सचिन मदगे ने किया । मर्दनगढ संवर्धन समिति की ओर से किड्स नेस्ट स्कूल सभागृह, फोंडा में ‘छत्रपति संभाजी महाराज एवं मर्दनगढ का इतिहास’ इस विषय पर श्री मदगे मार्गदर्शन किया ।
मर्दनगढ का संरक्षण होने तक वैध मार्ग से संघर्ष करना होगा ! – श्री रमेश शिंदे

मर्दनगढ संवर्धन समिति की आगामी कार्यदिशा स्पष्ट करते हुए श्री रमेश शिंदे ने कहा, ‘‘अब हमें संगठित होकर मर्दनगढ के संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए और जब तक यह संकल्प पूर्ण नहीं होता, तब तक शांत नहीं बैठना है । पुराने गोवा में शवप्रदर्शन समारोह के लिए ३०० करोड दिए जाते हैं, फर्मागुडी में जहां वास्तविक किला नहीं है, वहां डिजिटल संग्रहालय के लिए १०० करोड स्वीकृत होते हैं, तो फिर छत्रपति संभाजी महाराज द्वारा निर्मित एकमात्र ऐतिहासिक मर्दनगढ के संरक्षण हेतु निधि क्यों नहीं मिल सकती ? मर्दनगढ के संरक्षण होने तक हमें वैध मार्ग से संघर्ष करना ही होगा । इस अभियान की आगामी दिशा तय करने हेतु १ जुलाई को सायं ७ बजे श्री केशव देवस्थान, पंडितवाडा, फोंडा में बैठक आयोजित की गई ।’’
कार्यक्रम के प्रारंभ में श्री मनोज गावकर ने कार्यक्रम का उद्देश्य स्पष्ट किया और कार्यक्रम के अंत में आभारप्रदर्शन श्री राजेंद्र देसाई ने किया । इस कार्यक्रम में लगभग ११० नागरिक उपस्थित थे ।








