तीर्थक्षेत्र, देवता, संत, अभंग व पवित्र वारी का अपमान सहन नहीं करेंगे !

पुणे : महाराष्ट्र के सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन में पंढरपुर की वारी को एक विशेष महत्त्व प्राप्त है। संत ज्ञानेश्वर माउली, संत तुकाराम महाराज, संत एकनाथ महाराज, संत नामदेव महाराज, संत सोपानकाका और अन्य महान वारकरी संतों ने इस वारी के माध्यम से समाज को जीवन की सार्थकता का ज्ञान दिया। वर्तमान में कुछ गलत प्रवृत्तियां वारी की इस पवित्र परंपरा में घुसपैठ कर संत साहित्य, अभंग, धर्मग्रंथ और वारकरी श्रद्धास्थानों के संबंध में गलत प्रचार कर रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह तथा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शहरी नक्सलवाद के विरोध में कठोर भूमिका अपनाई है। समरसता और समभाव के नाम पर काम करने वाले तथाकथित संगठनों, तथा जिनके कार्यकर्ता नक्सली गतिविधियों में पकड़े गए हैं, जैसे कि अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति, कबीर कला मंच और अन्य प्रगतिशीलों ने इस वारी में प्रवेश किया है। उन पर अर्बन नक्सलवाद के अपराध दर्ज हैं। यह बात शासन-प्रशासन ने गंभीरता से लेकर उन पर कार्रवाई करनी चाहिए, ऐसी मांग की गई है। इसके लिए वारकरी संप्रदाय की ओर से इन अनुचित घटनाओं पर युवा वारकरी नजर रखेंगे ही; परंतु अर्बन नक्सलवाद का एजेंडा चलाने वालों पर सरकार ने गंभीरता से ध्यान देना चाहिए, ऐसा आह्वान वारकरी संप्रदाय के वरिष्ठ कीर्तनकार संतवीर बंडातात्या कराडकर सहित अन्य वारकरी संतों, ह.भ.प. और मान्यवरों ने किया।
समस्त वारकरी संप्रदाय, संस्थान, संगठन और हिंदू जनजागृति समिति की ओर से पुणे स्थित श्रमिक पत्रकार भवन में आयोजित पत्रकार परिषद में वे बोल रहे थे।
इंद्रायणी–चंद्रभागा इन पवित्र नदियों का प्रदूषण, वारकरियों के तीर्थस्थानों पर स्थायी रूप से मद्य-मांस विक्रय बंद किया जाए। नक्सलवाद का आरोप झेल रहे संगठनों के मुखौटे हटाकर उनके असली चेहरे उजागर किए हैं। रायगढ़ जिले में नक्सलवाद के आरोप में अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के कार्यकर्ताओं पर अपराध दर्ज हुए हैं। ये वारी के माध्यम से अंनिस, कबीर कला मंच, आधुनिकतावादीओ का छुपा एजेंडा चला रहे हैं। अर्बन नक्सलवाद का एजेंडा चलाने वालों पर सरकार ने कठोर कार्रवाई करनी चाहिए, ऐसी मांग इस अवसर पर हिंदू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ राज्य संघटक श्री. सुनील घनवट ने भी की।
इस अवसर पर महाराष्ट्र वारकरी महामंडल के सचिव ह.भ.प. नरहरी महाराज चौधरी, श्रीक्षेत्र देहू संस्थान के पूर्व अध्यक्ष ह.भ.प. नितीन मोरे महाराज और ह.भ.प. वैभव मोरे महाराज, संत सोपानकाका पालखी सोहळा दिंडी समाज अध्यक्ष ह.भ.प. राम महाराज कदम, अखिल भारतीय संत समिति के प्रदेश महामंत्री स्वामी भारतानंद सरस्वती महाराज, महाराष्ट्र वारकरी महामंडल के कोकण प्रांताध्यक्ष ह.भ.प. भगवान महाराज कोकरे, राष्ट्रीय वारकरी परिषद के कार्याध्यक्ष ह.भ.प. बापू महाराज रावकर, चिंतामणि प्रासादिक दिंडियों के ह.भ.प. दत्तात्रय चोरगे महाराज और अन्य संत-महंत उपस्थित थे।
वारकरी संप्रदाय का मुखौटा डालकर उसकी बदनामी करने वालों को वारी में प्रतिबंध लगाओ ! – संतवीर ह.भ.प. बंडातात्या कराडकर
वर्तमान में वारकरी संप्रदाय महाराष्ट्र का सबसे बड़ा संप्रदाय है। वारकरी संप्रदाय किसी का द्वेष, तिरस्कार या ईर्ष्या नहीं करता। वारकरी संप्रदाय किसी की आलोचना की ओर ध्यान नहीं देता। फिर भी कुछ भेड़िए शेर की खाल ओढ़कर वारकरियों को धोखा देने का कार्य कर रहे हैं। यह हम किसी भी परिस्थिति में सहन नहीं करेंगे। इस प्रकार छुपे तौर पर अनुचित बातें वारकरी संप्रदाय पर थोपने का जो प्रयास किया जा रहा है, उसका वारकरी संप्रदाय को विरोध करना चाहिए। हमारी मांगों के संदर्भ में हम आषाढ़ी तक प्रतीक्षा करेंगे, अन्यथा इसके पश्चात हम अपनी भूमिका स्पष्ट करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा है कि बूचड़खाना नहीं होने देंगे, ऐसा आश्वासन भले दिया हो, लेकिन प्रशासन ने उसका लिखित आदेश तत्काल देना चाहिए, तभी हम मानेंगे कि यह बूचड़खाना नहीं होगा। वारकरी संप्रदाय का मुखौटा पहनकर बदनामी करने वालों को वारी में प्रतिबंध लगाओ।
देहू की तरह वारकरियों के सभी तीर्थक्षेत्रों को स्थायी रूप से मद्य-मांस मुक्त किया जाए ! – ह.भ.प. नितीन महाराज मोरे
कुछ लोग संतों-महाराजों की आलोचना कर रहे हैं। आगामी काल में साधु-संतों पर कोई टिप्पणी करेगा, तो शासन ने उस पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। कुछ संस्थाएँ आकर यहाँ अनुचित कार्य कर रही हैं। उन्हें भी रोका जाना चाहिए। जहाँ पालखी जाती है, वहाँ के मद्य-मांस की दुकाने बंद होनी चाहिए।
वारकरी संप्रदाय की विचारधारा के विरोध में कार्य करने वालों को जैसे को तैसा उत्तर देने में वारकरी सक्षम ! -ह.भ.प. नरहरी महाराज चौधरी
वारकरी संप्रदाय शांतिप्रिय है। कोई यदि हमारे साथ आनंद लेने आता है, तो हम उसका स्वागत करेंगे; परंतु कोई संप्रदाय में आकर, वारी में आकर धर्मांतरण जैसे प्रयास करेगा, तो उसे जैसे को तैसा उत्तर दिया जाएगा। इन बातों को रोकने के लिए प्रशासन को प्रयास करने चाहिए। तीर्थक्षेत्र हमारे अनुष्ठानों के स्थान हैं। इसलिए वे मद्य-मांसमुक्त होने ही चाहिए ! यात्रा काल में ही दुकाने बंद की जाती हैं। ऐसा न होकर तीर्थक्षेत्रों की पवित्रता बनाए रखने और समाजहित में ये दुकाने स्थायी रूप से बंद होनी चाहिए।
संत-महापुरुषों पर टिप्पणी करने वालों के विरुद्ध तत्काल कानून बनाया जाए ! -ह.भ.प. राम महाराज कदम
वारकरी संप्रदाय के ग्रंथों और संतों पर छींटाकशी करने का कार्य किया जा रहा है। शासन ने इसके विरुद्ध कानून बनाना चाहिए। इस संदर्भ में 7 पालखी प्रमुख और अन्य प्रमुख दिंडी प्रमुखों को एकत्र कर पुनः बैठक की जानी चाहिए। संत-महापुरुषों पर टिप्पणी करने वालों पर सरकार ने ईशनिंदा विरोधी तत्काल कानून बनाना चाहिए।
अन्यथा जन आंदोलन खड़ा करेंगे ! – स्वामी भारतानंद सरस्वती महाराज
सरकार को इंद्रायणी, आळंदी जैसे तीर्थों का महत्त्व समझाना पड़े और पत्रकार परिषद लेकर विरोध करना पड़े यह दुर्भाग्यपूर्ण है। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति, कबीर कला मंच जैसे जो देवता को नहीं मानते, ऐसे संगठन वारकरियों को धोखा दे रहे हैं। प्रबोधन के नाम पर अनुचित लाभ उठाते हैं। सरकार ने इस पर अंकुश लगाना चाहिए, अन्यथा जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
वारी में जातिवाद फैलाने वालों का मुखौटा फाड़ने का प्रयास करते रहेंगे !-ह.भ.प. भगवान महाराज कोकरे
वारी में जातिवाद फैलाने का मुखौटा फाड़ने का हम प्रयास करते रहेंगे। जिन पर नक्सलवाद के अपराध हैं, उन्हें आगे कर भ्रम फैलाने का कार्य किया जाता है। इसलिए प्रदूषण, धर्मांतरण, ईशनिंदा के विषयों पर सरकार ने कठोर कानून बनाना चाहिए।








