यावल (जिला जलगांव) में जिलास्तरीय ‘महाराष्ट्र मंदिर न्यास अधिवेशन’ को उत्तम प्रतिसाद

जलगांव, २८ मार्च (वार्ता.) – मंदिरों में हिन्दुओं को सनातन हिन्दू संस्कृति की शिक्षा मिलना आवश्यक है, ऐसा प्रतिपादन मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संगठक श्री. सुनील घनवट ने यहां किया । मनुदेवी, यावल (जिला जलगांव) में २७ मार्च को संपन्न हुई जिलास्तरीय ‘महाराष्ट्र मंदिर न्यास अधिवेशन’में वे बोल रहे थे । इस अवसर पर भूतपूर्व सहधर्मादाय आयुक्त श्री. दिलीप देशमुख, भूतपूर्व संपादक श्री. दिलीप तिवारी आदि मान्यवर उपस्थित थे ।
श्री. सुनील घनवट आगे बोले, ‘‘मंदिरों में चलनेवाले अपप्रकार हमें रोकने चाहिए । वास्तव में मंदिर सनातन हिन्दू संस्कृति के शिक्षा देनेवाले केंद्र हैं । इसलिए हमें ही ऐसे अपप्रकारों को रोकना होगा । देश में वक्फ बोर्ड ने भारी मात्रा में भूमि पर अतिक्रमण किया है । महाराष्ट्र में भी अनेक देवस्थानों की भूमि वक्फ बोर्ड द्वारा अतिक्रमित की गई है । इसलिए यह भूमि वक्फ बोर्ड से पुन: वापस लेना और उसके लिए संगठितरूप से कानूनी लडाई देना, यह काल की आवश्यकता है । देवस्थान की इंच-इंच भूमि पुन: पाने के लिए महाराष्ट्र मंदिर महासंघ महाराष्ट्र में विविध जिलों में जाकर मंदिर विश्वस्तों का प्रभावी संगठन कर रहा है ।’’

इनके साथ इस अवसर पर हिन्दू जनजागृति समिति के उत्तर महाराष्ट्र संगठक श्री. प्रशांत जुवेकर ने ‘भक्तों को मंदिरों से जोडना’, ‘सामूहिक आरती’ विषयों पर, एवं सनातन संस्था के श्री. वसंत पाटील ने ‘मंदिर धर्मशिक्षा के केंद्र कैसे बनाएं ?’, इस विषय पर उपस्थितों को संबोधित किया । श्री. नीळकंठ चौधरी ने मंदिर महासंघ के कार्य का ब्योरा प्रस्तुत किया ।
इस अधिवेशन का आरंभ वेदमूर्ति अथर्व बयाणी द्वारा किए वेदमंत्रपठन से हुआ । इस अवसर पर शंखनाद हिन्दुत्वनिष्ठ श्री. कमलेश शिर्के ने किया । इस अधिवेशन का प्रास्ताविक हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. विनोद शिंदे, सूत्रसंचालन रणरागिनी, हिन्दू जनजागृति समिति की कु. धनश्री दहिवदकर और आभारप्रदर्शन महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के जलगांव जिला संगठक श्री. यशवंत चौधरी ने किया । इस अधिवेशन के लिए जलगांव में विविध मंदिरों के विश्वस्त, प्रतिनिधि, पुरोहित, मंदिरों की रक्षा के लिए लडनेवाले अधिवक्ता, इसप्रकार १५० से भी अधिक लोग उपस्थित थे । अधिवेशन के समापन पर हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. निखिल कदम ने मंदिरों के संदर्भ में प्रस्तुत किए हुए विविध प्रस्तावों पर उपस्थितों ने ‘हर हर महादेव’ के जयघोष में अनुमोदन दिया ।

मंदिर महासंघ का जलगांव से शुभारंभऔर २ वर्षों में राज्यभर विस्तार !
फरवरी २०२३ में जलगांव में संपन्न हुई पहली ‘मंदिर न्यास परिषद’में महाराष्ट्र मंदिर महासंघ का शुभारंभ हुआ था । अब मंदिर महासंघ के कार्य का संपूर्ण राज्य में विस्तार हो गया है । महासंघ के माध्यम से राज्य के ८०० से भी अधिक मंदिरों में वस्रसंहिता (वस्रसंहिता अर्थात मंदिरों में कपडे पहनकर आने के संदर्भ में नियमावली) लागू की गई है । इसके साथ ही संपूर्ण देशभर में १५ सहस्र से भी अधिक मंदिरों का संगठन हुआ है ।
मंदिरों में सभी व्यवहारों का लेखा-जोखा पारदर्शक रखना आवश्यक ! – दिलीप देशमुख, भूतपूर्व सहधर्मादाय आयुक्त
मंदिरों में नियमांनुसार सर्व व्यवहारों का पारदर्शक लेखा-जोखा रखना (रेकॉर्ड कीपिंग) अत्यंत आवश्यक है । किसी को भी मंदिर के किसी भी व्यवहार की ओर उंगली उठाने का अवसर नहीं मिलना चाहिए, इसप्रकार सर्व व्यवहारों का लेखा-जोखा हमें रखना चाहिए ।
देवताओं को न माननेवालों की दृष्टि मंदिरों में आनेवाले श्रद्धालुओं के पैसों पर ! – दिलीप तिवारी, भूतपूर्व संपादक
मैं महाराष्ट्र के अनेक स्थानों पर सुप्रसिद्ध मंदिरों में दर्शन के लिए गया था । वहां मैंने देखा मंदिर के बाहर लगभग ९० प्रतिशत से भी अधिक दुकानें अहिन्दुओं की थीं । जो हमारे भगवान को नहीं मानते, वे लोग मंदिरों में आनेवाले श्रद्धालुओं के पैसों पर अपनी दृष्टि गढाए रहते हैं । इस माध्यम से वे हिन्दुओं से करोडों रुपए कमा लेते हैं, यह अत्यंत धोकादायक है । इसलिए हमें ही जागृत होकर हिन्दू दुकानदारों से ही शुद्ध और पवित्र साहित्य लेना चाहिए ।
उपस्थित मान्यवर
प.पू. नारायण स्वामी, श्री रामेश्वर मंदिर; श्री नयन स्वामी, स्वामी नारायण मंदिर; महंत कन्हैयादास, श्रीराममंदिर, अमोदा, यावल; अधिवक्ता भरत देशमुख, भूतपूर्व अध्यक्ष, महाराष्ट्र एवं गोवा बार काउंसिल; श्री. प्रभाकर सोनावणे, अध्यक्ष, श्री नागाई-जोगाई मंदिर; श्री. विजय जैन, विश्वस्त, कण्व ऋषि आश्रम; श्री. नरेंद्र नारखेडे, अध्यक्ष, श्रीराममंदिर फैजपुर, यावल; श्री. शांताराम पाटील, अध्यक्ष, श्री मनुदेवी सेवा प्रतिष्ठान
मंदिरों की समस्या सुूलझाने के लिए विश्वस्तों द्वारा शिविर की मांग !
प्रश्नोत्तर के सत्र में अधिवेशन के लिए उपस्थित मंदिरों के विश्वस्तों ने विविध समस्याएं प्रस्तुत कीं । इसमें शासकीय निधि मंदिरों का ‘क’ और ‘ब’ वर्ग, इन गुटों में प्रविष्टि होने की समस्या से लेकर ग्रामपंचायत नगरपरिषद, वन विभाग, पुरातत्व विभाग से आनेवाली समस्याओं तक, ऐसे अनेक प्रश्न पूछे । उस विषय में श्री. दिलीप देशमुख ने अत्यंत समर्पक उत्तर दिए । इस अवसर पर उपस्थित मंदिर विश्वस्तों ने मांग की कि मंदिरों के विश्वस्तों के लिए एक प्रशिक्षण शिविर लिया जाए ।








