देवरहाटी की भूमि तत्काल देवस्थान के नाम न करने से जनआंदोलन छेडेंगे ! – सुनील घनवट, राष्ट्रीय संगठक, मंदिर महासंघ

चिपळूण – ‘वर्तमान स्थिति में देशभर में १५ सहस्र मंदिरों का संगठन है । अब हमें मंदिर सरकारीकरण के विरोध में आंदोलन का शंखनाद करना है । रत्नागिरी में अनेक देवरहाटी (पवित्र उपवनों को देवराई या देवराहाटी कहा जाता है) की भूमि सरकार ने अपने नियंत्रण में ले ली है । यह संपूर्ण भूमि सरकार यदि देवस्थान के नाम नहीं करेगी तो जनआंदोलन छेडेंगे । मंदिरों की संगठनात्मक रचना और कार्य का एक आदर्शवत ‘रत्नागिरी पैटर्न’ तैयार करेंगे’, ऐसा आवाहन मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संगठक और हिन्दू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ राज्य संगठक श्री. सुनील घनवट ने यहां आयोजित ‘रत्नागिरी जिलास्तरीय मंदिर-न्यास अधिवेशन’में किया ।

यह अधिवेशन पावस के स्वामी स्वरूपानंद सेवामंडल, हिन्दू जनजागृति समिति एवं महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के संयुक्त विद्यमान में २४ फरवरी को ‘स्वामी मंगल हॉल’, पुष्कर कॉम्प्लेक्स, बहादुरशेख नाका, चिपळूण में संपन्न हुआ । अधिवेशन का शुभारंभ सनातन संस्था के धर्मप्रचारक सद्गुरु सत्यवान कदम, पावस के स्वामी स्वरूपानंद सेवामंडल के कार्याध्यक्ष श्री. जयंतराव देसाई, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के उत्तर रत्नागिरी जिला संयोजक ह.भ.प. अभय महाराज सहस्रबुद्धे, निवृत्त सहधर्मदाय आयुक्त श्री. दिलीप देशमुख, अधिवक्ता श्री. जनार्दन करपे एवं श्री. सुनील घनवट के हस्तों दीपप्रज्वलन से हुआ । अधिवेशन के लिए रत्नागिरी जिले के मंदिरों के विश्वस्त, पदाधिकारी एवं पुजारी, इसप्रकार कुल ४०० से भी अधिक लोग उपस्थित थे ।
प्रारंभ में श्री. ज्ञानदेव पाटील ने शंखनाद किया । तदुपरांत वेदमूर्ति श्री. सुरेंद्र जोशी एवं श्री. सौरभ गोंधळेकर ने वेदमंत्रपठन किया । सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी द्वारा अधिवेशन के निमित्त से भेजे गए संदेश का वाचन श्री. परेश गुजराथी ने किया । श्री. सुरेश शिंदे ने उपस्थितों का स्वागत और कार्यक्रम की प्रस्तावना की ।
श्री. घनवट आगे बोले, ‘‘मंदिरों की अडचनें सुलझाने के लिए भक्तों को एकत्र आकर एक जागृत ‘नेटवर्क’ तैयार करना होगा । वर्तमान में कोई भी सरकार मस्जिद अथवा चर्च नियंत्रण में लेने का साहस नहीं करती, फिर हिन्दुओं के मंदिरों को ही क्यों लक्ष्य बनाया जा रहा है ? हम ऐसा संगठन बनाएंगे कि मंदिर नियंत्रण में लेना तो दूर की बात है; मंदिरों की ओर वक्रदृष्टि से देखने का भी किसी में साहस नहीं होगा ! मंदिर संस्कृति की रक्षा करने के लिए मंदिर महासंघ व्यासपीठ है । मंदिर सरकारीकरण के कारण तमिळनाडु में अनेक मंदिर बंद हो गए हैं । मंदिरों के विषय में आधुनिकतावादियों के ‘गलत कथानक’ (फेक नैरेटिव) निरस्त कर देंगे ।

धर्मशिक्षा द्वारा निर्माण होनेवाली सक्षम राष्ट्रभक्त पीढी राष्ट्रनिर्मिति के कार्य में योगदान देगी ! – सद्गुरु सत्यवान कदम
इस अवसर पर सद्गुरु सत्यवान कदम बोले, ‘हमारे धर्म और संस्कृति को जीवित रखने का कार्य, इन मंदिरों के माध्यम से ही समय-समय पर हुआ है । जन्महिन्दुओं को कर्महिन्दू बनाने के लिए यह मंदिर अधिवेशन प्रभावी माध्यम है । मंदिर संस्कृति का देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है । मंदिर में आनेवालों को धर्म की कोई जानकारी नहीं होती । इसलिए उन्हें मंदिरों के प्रति आत्मीयता नहीं लगती । तीर्थक्षेत्र अब पर्यटनक्षेत्र हो गए हैं । इसलिए आनेवालों को वहां की आध्यात्मिक शक्ति का लाभ नहीं होता । यदि मंदिरों से धर्मशिक्षा दी जाने लगे, तो श्रद्धा बढेगी । इससे राष्ट्रभक्ति करनेवाली सक्षम पीढी निर्माण होगी, जो राष्ट्र के नवनिर्माणकार्य में योगदान देगी । मंदिरों द्वारा धर्मशिक्षा देनेवाले ग्रंथ भेटस्वरूप दिए जाने चाहिए । इससे श्रद्धालु धर्म के अनुरूप कृति करेंगे ।
पुजारियों को मंदिर आदर्श बनाने के लिए लगन से प्रयत्न करने चाहिए ! – जयंत देसाई

हमारे धर्म की, मंदिरों की रक्षा हो, ऐसा राजाश्रय मिलना चाहिए । मंदिरों के लिए हम एकत्र आए हैं, इसलिए मंदिरों की ओर टेढी दृष्टि से कोई देखने का साहस नहीं करेगा । हममें एकता न होने से अनेक बार आक्रमण हुए हैं; परंतु अब मंदिरों की रक्षा करने के लिए सनातन संस्था आगे आई है । हम पूरे मन से मंदिरों से जुडेंगे, तब ही मंदिरों का व्यवस्थापन अच्छा होगा । पुजारियों को मंदिर आदर्श बनाने के लिए प्रयत्न करने चाहिए । मंदिरों के लिए हमारा त्याग होना चाहिए । मंदिर में आनेवाले भक्तों में आत्मीयता की भावना निर्माण होनी चाहिए और मंदिर में सेवा देने के लिए भी तत्पर रहना चाहिए । इससे मंदिर में एक अलग ही वातावरण निर्माण होगा । मंदिर में उपासना न हो रही हो, तो वहां भगवान कैसे रहेंगे ? मंदिर में भगवान का वास होगा, तो मानसिक आधार मिलता है ।
मंदिर में सामूहिकरूप से उपक्रम कर संगठित होंगे ! – संजय जोशी

मंदिर धर्म की आधारशिला हैं । मंदिर तोडकर वहां की पवित्रता नष्ट की जा रही है । मंदिर ही देश को विश्वगुरु बनाने के मुख्य केंद्र हैं; परंतु मंदिरों की पवित्रता टिकाने की दृष्टि से प्रयास नहीं हो रहे हैं । वहां का चैतन्य टिकाए रखने के लिए अनेक कुप्रथाएं बंद होनी चाहिए । मेलों में जुए के अड्डे बंद कर मंदिर संस्कृति की रक्षा करेंगे । आरती, गदा पूजन, गुढीपूजन जैसे उपक्रम सामूहिकरूप से मनाकर मंदिर एवं धर्म रक्षा के लिए संगठित होंगे ।








