मंदिर संस्कृति रक्षा एवं मंदिरों की समस्या सुलझाने के लिए विश्वस्तों के संगठित प्रयत्नों की आवश्यकता ! – रमेश कडू, मंदिर सहसंयोजक

खेड – अनेक देवस्थानों की भूमि एवं देवराई (पवित्र उपवन) पर ’सरकार’ ऐसी प्रविष्टी है । वक्फ बोर्ड के माध्यम से देवस्थानों की जमीन हडपने के प्रकार राज्य में शुरू हैं । ऐसी समस्याएं केवल अन्यत्र हैं, ऐसा न समझें । वे हम तक कभी भी पहुंच सकती हैं । ‘लव जिहाद’के माध्यम से हिन्दू लडकियों को फांसा जाता है, हिन्दुओं का धर्मांतरण किया जाता है । हिन्दुओं को धर्मशिक्षा न होने से ऐसी समस्याओं का हिन्दुओं को सामना करना पड रहा है । इसीलिए हिन्दुओं को धर्मशिक्षा देने के लिए मंदिरों को आगे आना आवश्यक है ।
धर्म एवं संस्कृति की रक्षा के लिए यदि आज हमने कार्य नहीं किया, तो कल अनेक आवाहन सामने होंगे । ऐसी समस्याओं के संदर्भ में मंदिर महासंघ गत २ वर्षों से अधिवक्ताओं की सहायता से संतों के मार्गदर्शन में कार्य कर रहा है । इस दृष्टि से मंदिर संस्कृति रक्षा के लिए एवं मंदिरों की समस्या सुलझाने के लिए हम सभी को संगठित प्रयत्न करने की आवश्यकता है, ऐसा प्रतिपादन जालगाव (तालुका दापोली) में श्री महालक्ष्मी देवस्थान के अध्यक्ष एवं मंदिर महासंघ के दापोली सह संयोजक श्री. रमेश कडू ने किया । मंदिर महासंघ की ओर से मंदिर विश्वस्त संपर्क अभियान अंतर्गत तालुका के चिंचघर में श्री हनुमान मंदिर एवं कोरेगाव के श्री विठ्ठल रखुमाई मंदिर में बैठकें हुईं । वे इन बैठकों में बोल रहे थे ।
मंदिरों का चैतन्य टिकाने के लिए वस्त्रसंहिता आवश्यक ! – परेश गुजराथी, हिन्दू जनजागृति समिति
मंदिर चैतन्य के स्रोत हैं । मंदिरों के चैतन्य के कारण व्यक्तिगत जीवन, सामाजिक- राष्ट्रीय स्वास्थ्य टिकता है । मंदिर ऊर्जास्रोत हैं, मंदिर हिन्दू धर्म का सामर्थ्य हैं; इसलिए मंदिर का चैतन्य-सात्त्विकता टिकाने के लिए मंदिरों में मंदिर महासंघ की ओर से वस्त्रसंहिता (ड्रेस कोड), सामूहिक आरती जैसे उपक्रम कर रहे हैं । महासंघ की ओर से अब तक राज्य में ८०० से भी अधिक मंदिरों में, जिले में ७० से भी अधिक मंदिरों में वस्त्रसंहिता फलक लगाए गए हैं ।
चिंचघर एवं कोरेगाव में हुई बैठकों में पंचक्रोशी के मंदिर के विश्वस्त एवं प्रतिनिधि उपस्थित थे । इस अभियान प्रसार में हिन्दू जनजागृति समिति के सर्वश्री विलास भुवड, शिवाजी सालेकर के साथ ही कोरेगाव के श्री विठ्ठल मंदिर के विश्वस्त श्री. प्रकाश मोरे ने सहभाग लिया ।
मंदिरों के लिए संगठितरूप से कार्य करने का और महासंघ के कार्य में सम्मिलित होने का उपस्थित मंदिर विश्वस्तों ने अभिप्राय व्यक्त किया ।








