‘आदिपुरुष’ फिल्म की काल्पनिकता आक्षेपार्ह; पौराणिक फिल्म धर्मग्रंथों का अध्ययन कर बनाएं – हिन्दू जनजागृति समिति

‘आदिपुरुष’ नामक प्रभु श्रीराम पर आधारित आगामी फिल्म का टीजर प्रसिद्ध हुआ है और उस पर अनेक आक्षेप लिए जा रहे हैं । कुछ लोग इस फिल्म का समर्थन भी कर रहे हैं । वास्तव में प्रभु श्रीराम पर भव्य फिल्म बनाना प्रशंसनीय है; परंतु इसे बनाते समय यदि वास्तविकता से अलग काल्पनिकता को महत्त्व दिया गया, तो असत्य इतिहास समाज पर अंकित करने का पाप लगता है । ‘आदिपुरुष’ फिल्म के टीजर से यही विशेष रूप से प्रतीत होता है । इस फिल्म में पौराणिक संदर्भों को छोड़कर, जो काल्पनिक दृश्य दिखाए गए हैं, वे आक्षेपजनक हैं । हिन्दू जनजागृति समिति इसका निषेध करती है । प्रभु श्रीराम संपूर्ण हिन्दू समाज के आराध्य हैं । उन पर आधारित फिल्म अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर काल्पनिक न बनाए जाने चाहिए; अपितु धर्मग्रंथों का अध्ययन कर बनाने चाहिए, ऐसा मत हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने व्यक्त किया है ।

इस फिल्म के टीजर में हिन्दू समाज को जो दृश्य स्वीकार नहीं हुए, निर्माता जनमानस की भावनाएं समझकर उनका अध्ययन करें तथा उसमें आवश्यक परिवर्तन करें । टीजर के आक्षेपजनक सूत्र आगे दिए हैं ।

1. हनुमानजी को चमडे के वस्त्रों में दिखाना तथा उन्हें बिना मुकुट के दिखाना : : इसके विषय में मध्य प्रदेश के गृहमंत्री श्री. नरोत्तम मिश्रा ने भी आक्षेप उठाया है । हनुमान चालीसा में हनुमानजी के वस्त्रों का भी वर्णन है । उसके अनुसार हनुमानजी की वेशभूषा होनी चाहिए; परंतु यहां इस प्रकार की वेशभूषा नहीं की गई ।

2. हनुमानजी की दाढ़ी है; पर मूंछ नहीं : ऐसी वेशभूषा हिन्दुओं के किसी भी देवता की नहीं है । इसके विपरीत बिना मूंछों के दाढी रखना, मुसलमानों की पद्धति है । हिन्दू देवता को इस प्रकार दिखाना, हिन्दू समाज कभी भी सहन नहीं करेगा ।

3.  स्लीवलेस वस्त्रों में माता सीता : माता सीता जैसी भूदेवी को इस प्रकार दिखाना अत्यंत अनुचित है ।

4. मुगलों की भांति रावण का चरित्र चित्रण : रावण प्रकांड पंडित ब्राह्मण था । उसने तपस्या कर भगवान शंकर को प्रसन्न किया था । अहंकार और दुर्जन प्रवृत्ति के कारण उसका नाश हुआ । उसकी तुलना मुगलों से नहीं की जा सकती ।

5. रावण का पुष्पक विमान : इसे एनिमेटेड क्रूर पक्षी के समान दिखाया गया है । यह अत्यंत अनुचित है ।

निर्देशक ओम राऊत ने इससे पूर्व भी अच्छे फिल्म बनाए हैं । इसलिए हो सकता है कि इस फिल्म से भी उन्होंने अच्छा प्रयास किया हो; परंतु टीजर में तो उपरोक्त कुछ ही आक्षेप ध्यान में आए हैं । पूर्ण फिल्म में और भी आक्षेपजनक दृश्य हो सकते हैं, इस संभावना को नकारा नहीं जा सकता । तब भी हिन्दू जनजागृति समिति उनसे मांग कर रही है कि प्रदर्शन के पूर्व संत-महंत, इतिहास के अध्ययनकर्ता, हिन्दू संगठनों के प्रतिनिधि, इन्हें फिल्म दिखाएं । उनकी शंकाओं का समाधान करें; तदुपरांत ही फिल्म प्रदर्शित करें । आजकल फिल्म के विषय में विवाद निर्माण कर, अपना गल्ला भरनेवाले अनेक फिल्म निर्माता हैं, आपको उनके समान नहीं बनना चाहिए, ऐसी अपेक्षा भी समिति में व्यक्त की है ।

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