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मुंडाजे (कर्नाटक) में हिन्दू धर्म जागृति सभा सम्पन्न !

हिन्दू धर्म का अध्ययन कर धर्माचरण करें ! – श्री श्री मुक्तानंद स्वामीजी

karnatak_sabhaबार्इं ओर से रवीश तंत्री, श्री श्री मुक्तानंद स्वामीजी, श्री. काशिनाथ प्रभू और श्री. रमानंद गौडा

उजिरे (कर्नाटक) – श्री श्री मुक्तानंद स्वामीजी ने धर्मसभा में प्रतिपादित किया कि रामायण के काल में रावण ने सीता का अपहरण कर सफलता प्राप्त की परंतु अंत में राम की शक्ति के आगे रावण की पराजय ही हुई । उसी प्रकार सनातन के रामनाथी आश्रमपर आक्रमण करने वालों को दंड अवश्य मिलेगा । कुंटार के देवालय में गाय का मस्तक रखकर देवालय की पवित्रता भंग की गई । आगे जाकर ऐसा समय गांवों के देवालयों पर भी आ सकता है । इसलिए हम सभी को इन घटनाओं के विरुद्ध संघर्ष करना आवश्यक है । इसलिए सर्व हिन्दुओं को अपने धर्म का अध्ययन कर धर्माचरण करना चाहिए तथा संगठित होना आवश्यक है ।

४ जनवरी को मुंडाजे के श्री दुर्गामैदान में हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से हिन्दू धर्म जागृति सभा का आयोजन किया गया था । इस सभा में १ सहस्र से अधिक धर्माभिमानी उपस्थित थे ।

हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. रमानंद गौडा ने कहा कि हिन्दू धर्म अत्यंत प्राचीन धर्म है तथा वह विश्वभर में फैला हुआ था । हमारे प्राचीन देवालय भी पवित्र स्थान हैं; इसलिए नए देवालयों का निर्माण करने के स्थान पर जो देवालय अस्तित्व में हैं उन्ही की रक्षा का प्रयास करें ।

राष्ट्र के विकास के लिए हिन्दू राष्ट्र के अतिरिक्त अन्य विकल्प नहीं है ! – श्री. काशिनाथ प्रभू

हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. काशिनाथ प्रभू ने कहा कि, ‘‘आज देश में सर्वत्र अराजक पैâला हुआ है । हिन्दुओं के त्यौहार और उत्सवों के समय जातीय दंगे और हिंसाचार बढ रहे हैं । इसका कारण राज्यकर्ताओं की कथित धर्मनिरपेक्ष विचारधारा और अल्पसंख्यकों का तुष्टीकरण है । इसलिए राष्ट्रका सर्वांगीण विकास करना हो, तो हिन्दू राष्ट्र स्थापित किए बिना अन्य विकल्प नहीं है ।’’

प्रबोधन के कारण धर्म के प्रति हिन्दुओं में जागृति हुई है ! – श्री. रवीश तंत्री, कुंटारु

श्री. रवीश तंत्री ने कहा, ‘आज हिन्दू युवतियों का अपहरण कर उनका धर्मपरिवर्तन करने की घटनाएं बढ गई हैं । एक समय कासरगोड में धर्मांधों को लगता था कि वे कुछ भी कर सकते हैं, ऐसी स्थिति निर्माण हो गई थी; परंतु अब स्थिति पूर्णतः परिवर्तित हो गई है । प्रबोधन करने के कारण हिन्दू जागृत हो गए हैं । उनमें अपने धर्म एवं आचरण के विषय में अधिक परिवर्तन हो गया है ।’

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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