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अब फिनाइल की बजाय गौमूत्र से होगी सरकारी दफ्तरों की सफाई!

माघ कृष्ण पक्ष चतुर्थी, कलियुग वर्ष ५११६

नई सरकार के आने के बाद से केन्द्र सरकार के दफ्तरों में ढेर सारे बदलाव हो रहे हैं लेकिन एक बड़ा बदलाव सफाई के मोर्चे पर देखा जा रहा है. अब वहां एक और नया परिवर्तन देखा जाएगा. अब वहां सफाई के लिए फिनॉयल की बजाय गौमूत्र का इस्तेमाल होगा. इसका नाम होगा गौनायल. एक अंग्रेजी अखबार ने यह खबर दी है.

अखबार के मुताबिक केन्द्र सरकार के दफ्तरों को चमकाने के लिए एक नया लिक्विड आ रहा है. यह प्राकृतिक गुणों से भरपूर है. यह गौमूत्र से बनेगा और इसे खुशबूदार बनाने के लिए इसमें नीम तथा अन्य जड़ी-बूटियां मिलाई जाएंगी. कहा जा रहा है कि इस तरह के उत्पाद के इस्तेमाल से हानिकारक रसायनों से बचाव होगा और इससे गौशालाओं को आर्थिक लाभ भी होगा. वे गायों को बेहतर ढंग से रख सकेंगी.

एक एनजीओ ने केन्द्रीय भंडार को इस आशय का प्रस्ताव दिया था जिसे मान लिया गया और अब भंडार सप्लाई का इंतज़ार कर रहा है. उसके एमडी जगदीश भाटिया ने पत्र को बताया कि यह न केवल सफाई कर्मचारियों बल्कि गायों के लिए भी शानदार उत्पाद है. रसायनों के इस्तेमाल से सफाई कर्मचारियों की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है.

बताया जाता है कि यह आइडिया शुरू में महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी का था. उन्होंने कहा कि इससे सभी को लाभ पहुंचेगा.

गौनायल बनाने वाले एनजीओ होली काउ फाउंडेशन की प्रमुख अनुराधा मोदी ने कहा कि कई महीनों तक देश भर की गौशालाओं को देखने के बाद उन्होंने यह प्रॉडक्ट तैयार किया है. इसे बहुत वैज्ञानिक ढंग से बनाया जा रहा है. इसके लिए मथुरा के निकट बरसाना को चुना गया है.

आईआईटी, दिल्ली के एक प्रोफेसर ने भी कहा कि गौमूत्र से बने उत्पाद के फायदे ज्यादा हैं और इसका साइड इफेक्ट नहीं होता. यह जैविक उत्पाद है और यह फिनॉयल का विकल्प बन सकता है.

स्त्रोत : आज तक

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