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गुजरात : ईद-ए-मिलाद में इस्लामिक झंडे पर पाबंदी

अहमदाबाद – अहमदाबाद के बनासकांठा जिला प्रशासन ने मुस्लिमों को ईद-ए-मिलाद त्योहार के मौके पर जुलूस के दौरान इस्लामी हरे रंग के झंडों और बैनर्स का इस्तेमाल करने से मना किया है। ईद-ए-मिलाद का त्योहार रविवार को मनाया जाएगा और जुलूस पालनपुर शहर में निकाला जाएगा।

पालनपुर के एसडीएम जे.बी. देसाई ने जुलूस निकालने की अनुमति तो दे दी लेकिन इसके साथ ही 16 शर्तें भी रख दीं। इनमें से कुछ शर्तें हैं- जुलूस में हिस्सा लेने वाला कोई भी शख्स इस्लामी हरे रंग वाले झंडे या बैनर नहीं लेगा और न ही ‘हाथ’ का कोई सिंबल। जुलूस 2 घंटे में एक छोटे रास्ते पर पूरा करना होगा। इसमें कोई गाड़ी नहीं जाएगी। जुलूस में म्यूजिक का वॉल्यूम धीमा रखना और इसमें हिस्सा लेने वालों को यह ध्यान रखना होगा कि वे स्वच्छ भारत मिशन के मद्देनजर गलियों और सड़कों को गंदा न करें।

ईद-ए-मिलाद के जुलूस के लिए ये कड़ी शर्तें पिछले साल से लागू होने लगीं जब अथॉरिटी ने गुजरात हाईकोर्ट के निर्देशों के मद्देनजर जुलूस निकालने की अनुमति दी। पहले अधिकारियों ने जुलूस की अनुमति देने से मना कर दिया था। आरोप है कि अथॉरिटी ने सुन्नी कट्टरपंथियों के विरोध की वजह से जुलूस निकालने की मंजूरी नहीं दी थी। जुलूस में उत्सव मनाने वाले लोग अक्सर सूफी रिवाजों को मानते हैं।

हाल ही में कुछ मुस्लिम संगठनों ने इस दिन उत्सव मनाने का विरोध किया था क्योंकि पैगंबर मोहम्मद की पुण्य तिथि भी इसी दिन पड़ती है। साल 2009 में दारूल उलुम देवंबद ने कहा था कि इस दिन उत्सव मनाना और जुलूस निकालना उचित नहीं है।

पालनपुर के केजीएन चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रेजिडेंट बिस्मिलाह खान चौहान ने कहा,”प्रशासन ने जुलूस के लिए ऐसी कड़ी शर्तें रख दी हैं कि यह शव यात्रा निकालने जैसा होगा। एसडीएम ने ऐसा स्थानीय पुलिस के कहने पर किया है। पुलिस पर सुन्नी कट्टरपंथियों का दबदबा है।” वहीं बसकंठा के डीएम दिलीप कुमार राणा ने कहा कि वह मामले को देखेंगे और अल्पसंख्यक गुट की समस्या हल करने की कोशिश करेंगे।

स्त्रोत : नवभारत टाइम्स

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