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लोकतंत्रकी निरर्थकता एवं हिन्दू राष्ट्र-स्थापित करनेकी आवश्यकता !

sandeepdada
(पू.) श्री. संदीप आळशी

‘प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीके गुजरातमेें ‘गोहत्या प्रतिबन्धक कानून’ लागू  है । अब भाजपाशासित हरियाणामें भी उसे लागू किए जानेकी सम्भावना है । ऐसी स्थितिमें पूरे देशमें यह कानून क्यों नहीं लागू किया जाता ? अन्य राज्योंमें उसे लागू कराने हेतु गोप्रेमियोंको आन्दोलन करने पडते हैं एवं अवसर आनेपर लाठियां भी खानी पडती है !

१. धर्मके तत्व सर्वत्र सभी समयपर समान ही होते हैं । कश्मीरसे  कन्याकुमारीतक षोडशोपचार पूजा, देवपूजाके मन्त्र तथा देवी-देवताओंका नामजप इत्यादि समान ही है ।

२. अपना देश विविध घटक राज्योंसे मिलकर बना है । राज्यकी शासनव्यवस्था कुछ मूलभूत तत्त्वोंके अनुसार चलती है । प्रदेशके अनुसार राज्यकी शासनव्यवस्थामें न्यून-अधिक मात्रामें अन्तर हो सकता है; परन्तु तत्त्वोंमें अन्तर नहीं रह सकता । ‘गोहत्या सबसे बडी  धर्महानि है, जिसका पाप पूरे समाज एवं देशको भुगतना पडता है’, यदि यह तत्त्व एक राज्यको लागू होता है, तो वही तत्त्व दूसरे राज्यको क्यों नहीं लागू होता ?

हिन्दुओे, इस पाश्र्वभूमिपर हास्यजनक एवं निरर्थक लोकतन्त्रके दर्शन होते है । ऐसे लोकतन्त्रके कारण हो रहा राष्ट्रका विनाश क्या आप केवल देखते रहेंगे अथवा इसपर कुछ करेंगे ? सभी बातोंपर ‘हिन्दू राष्ट्र-स्थापना’ ही एकमात्र उपाय है ! इसलिए हिन्दू राष्ट्र स्थापित करनेके कार्यमें साqम्मलित होकर धर्मकर्तव्यका पालन करें !!’

– (पू.) श्री. संदीप आळशी (३.१.२०१५)

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