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टीपू सुल्तान की जयंती मनाने को लेकर भड़की बीजेपी

पौष शुक्ल पक्ष पंचमी, कलियुग वर्ष ५११६

टीपू को ऐसा व्यक्ति नहीं माना जा सकता, जिसकी जयंती राज्य सरकार मनाए : बीजेपी

बेंगलुरु : अठारहवीं सदी के महान शासक टीपू सुल्तान की जयंती मनाने के कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के कदम से राज्य में विवाद छिड़ गया है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि यह सत्तारूढ़ पार्टी की अपने वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश है। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने २२ दिसंबर को घोषणा की थी कि सरकार ने टीपू जयंती मनाने का फैसला किया है और तारीख के बारे में जल्द ही फैसला कर लिया जाएगा।

उन्होंने इतिहासकार प्रो. बी शेक अली की पुस्तक टीपू सुल्तान : ए क्रूसेडर फॉर चेंज के विमोचन के मौके पर कहा था, ‘टीपू जयंती मनाने के लिए विभिन्न हलकों से काफी दबाव है। हमने इस पर विचार करने का फैसला किया है और हम जल्द ही तारीख की घोषणा करेंगे।’

लेकिन यह सब बीजेपी को नागवार गुजरा है और पार्टी के सीनियर नेताओं ने दावा किया है कि टीपू एक क्रूर शासक था जिसने कर्नाटक के कोडागु और दक्षिण कन्नड़ जिलों समेत पड़ोसी केरल में जबरन धर्मांतरण कराया था।

बीजेपी नेता सुरेश कुमार ने कहा कि टीपू को ऐसा व्यक्ति नहीं माना जा सकता जिसकी जयंती सरकार को मनानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मैसूर के शासक रहे टीपू ने कोडवा (कोडागु जिले के निवासियों) के खिलाफ बर्बरता बरती थी।

Tipu’s soldiers struck terror in the British, both in India and at home.

उन्होंने दावा किया, हमारा टीपू सुल्तान के प्रशासन के बारे में अपना विचार है। खासतौर पर तब, जब आप कुर्ग (कोडागु) और अन्य स्थानों पर जाते हैं, जहां लोगों को कुर्गवासियों के खिलाफ बरती गई बर्बरता अब भी याद है, जिन्होंने उनके फतवे को मानने से इनकार कर दिया था। इसलिए टीपू को ऐसा व्यक्ति नहीं माना जा सकता, जिसकी जयंती राज्य सरकार मनाए।

गौरतलब है कि टीपू मैसूर राज्य के शासक थे। उन्हें ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का कट्टर शत्रु माना जाता था। मई १७९९ में ब्रिटिश सैनिकों से श्रीरंगपटनम के अपने किले को बचाते हुए वह मारे गए थे।

स्त्रोत : नवभारत टाईम्स

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