धर्माधारित हलाल अर्थव्यवस्था का विरोध करें – रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दू जनजागृति समिति

‘इटर्नल हिन्दू फाऊंडेशन’ की ओर से फेसबुक लाईव के माध्यम से जागृति हेतु व्याख्यान

मुंबई : हलाल अर्थव्यवस्था अल्पसंख्यकों की बहुसंख्यकोंपर की जा रही तानाशाही है । अतः धर्मनिरपेक्ष भारत में स्थापित हो रही धर्माधारित हलाल व्यवस्था का विरोध करें । हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता रमेश शिंदे ने यह आवाहन किया । ‘इटर्नल हिन्दू फाऊंडेशन’ ने फेसबुक लाईव के माध्यम से श्री. शिंदे के ‘हलाल अर्थव्यवस्था एवं भारतवर्ष’ विषयपर व्याख्यान आयोजित किया था, उसमें वे ऐसा बोल रहे थे । ३५० से भी अधिक लोगों ने इस मार्गदर्शन को लाईव देखा । अनेक धर्मप्रेमियों ने कॉमेंट में विविध प्रश्‍न पूछकर अपनी शंकाओं का निराकरण करवाकर लिया ।

मार्गदर्शन में बताए गए अन्य महत्त्वपूर्ण सूत्र

१. भारत में इस्लामिक बैंकिंग चालू करने का प्रयास असफल होने के पश्‍चात उसके विकल्प के रूप में भारतपर हलाल इकॉनॉमी थोपना आरंभ हुआ ।

२. भारत जैसे निधर्मी देश में हिन्दुओं की संख्या अधिक होते हुए भी उनकी मांगपर विचार होता हुआ दिखाई नहीं देता । धर्मनिरपेक्ष भारत में विशिष्ट धर्मपर आधारित अर्थव्यवस्था खडी हो रही है, तो ऐसे में हिन्दुओं का उसका विरोध करना चाहिए ।

३. हलाल अर्थव्यवस्था ने पिछले १३ वर्षों में विश्‍वभर में अपना दबदबा बनाया है । इस अर्थव्यवस्था ने भारत की अर्थव्यवस्था जितना अर्थात २.१ ट्रिलियन अमेरिकन डॉलर्स (ट्रिलियन का अर्थ १ पर १२ शून्य अर्थात १००० अरब) का स्तर प्राप्त किया है । इसकी गंभीरता को जानकर हिन्दुओं को अपने अधिकारों के प्रति जागृत होना चाहिए ।

४. एअर इंडिया अथवा मैक्डोनाल्ड में जब हिन्दू जाते हैं, तब वे ‘हमें हलाल उत्पाद नहीं चाहिए, वो हमारे धर्म को स्वीकार्य नहीं है’, ऐसा दृढता से नहीं बोलते । उसके कारण हिन्दुओं को विवश होकर हलाल प्रमाणित खाद्यपदार्थ खाने पड रहे हैं । एक मुसलमान व्यक्ति उसे ‘जोमैटो’की ओर से हलाल प्रमाणित खाद्यपदार्थ न मिलनेपर उसकी शिकायत कर सकता है; परंतु मुसलमान डिलीवरी बॉय का विरोध करनेपर हिन्दू व्यक्ति के विरुद्ध प्राथमिकी प्रविष्ट की जाती है, यह कैसी धर्मनिरपेक्षता है ?

५. देहली के रविरंजन सिंह ने भी अब ‘झटका सर्टिफिकेट’ देना आरंभ किया है । हिन्दू समुदाय की अर्थव्यवस्था खडी रहने हेतु हिन्दुओं को जागृत होना आवश्यक है ।

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