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अटल बिहारी वाजपेयी और पण्डित मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न

नर्इ देहली – पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और महामना मदन मोहन मालवीय को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है। केंद्रीय कैबिनेट ने दोनों को यह सम्मान देने का फैसला गुरुवार को वाजपेयी के 90वें जन्मदिन से एक दिन पहले किया है। मालवीय का जन्मदिन भी 25 दिसंबर को ही पड़ता है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान में कहा गया, ‘राष्ट्रपति बेहद हर्ष के साथ पंडित मदन मोहन मालवीय ( मरणोपरांत) और अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न से सम्मानित करते हैं।’

बीजेपी लंबे समय से वाजपेयी जो भारत रत्न देने की मांग करती रही थी। ऐसे में यह लगभग तय माना जा रहा था कि सत्ता में आने के बाद वह वाजपेयी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजेगी। वाजपेयी के साथ-साथ बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के संस्थापक मदन मोहन मालवीय को भी मरणोपरांत भारत रत्न दिए जाने का ऐलान किया गया है।

कल यानी 25 दिसंबर को अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मदिन है, जिसे मोदी सरकार ‘गुड गवर्नेंस डे’ के तौर पर मना रही है। संयोग से मदन मोहन मालवीय का जन्मदिन भी कल ही है। ऐेसे में भारत रत्न दिए जाने का यह ऐलान काफी अहम है। अब तक 43 लोगों को यह सम्मान दिया जा चुका है। इस तरह से वाजपेयी और मालवीय इस सम्मान को हासिल करने वाले वे 44वें और 45वें शख्स हैं।

कैबिनेट की तरफ से अटल और मालवीय को भारत रत्न देने की सिफारिश मिलने पर राष्ट्रपति के ऑफिशल ट्विटर हैंडल से ट्वीट आया, ‘पंडित मदन मोहन मालवीय(मरणोपरांत) और अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न से नवाजते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी प्रसन्नता महसूस कर रहे हैं।’

अटल भारत रत्न से सम्मानित होने वाले बीजेपी से जुड़े पहले नेता हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार अपने चुनाव क्षेत्र वाराणसी जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि वाराणसी के लिए निकलने से पहले वह अटल बिहारी वाजपेयी से मिलकर उन्हें जन्मदिन पर शुभकामनाएं देंगे।

भारत के सर्वाधिक करिश्माई नेताओं में से एक वाजपेयी को एक महान नेता और अक्सर बीजेपी का उदारवादी चेहरा बताया जाता है। पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे वाजपेयी को कई ठोस पहल करने का श्रेय दिया जाता है, जिनमें भारत और पाकिस्तान के बीच मतभेदों को कम करने का उनका प्रयास प्रमुख रूप से शामिल है। वाजपेयी ऐसे पहले प्रधानमंत्री बने जिनका संबंध कभी कांग्रेस से नहीं रहा। वाजपेयी के आलोचक उन्हें आरएसएस का ‘मुखौटा’ मानते हैं।

दूरदृष्टा और महान शिक्षाविद् मालवीय की मुख्य उपलब्धियों में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना शामिल है। 25 दिसंबर 1861 को जन्मे मदन मोहन मालवीय 1886 में कोलकाता में कांग्रेस के दूसरे सत्र में अपने पहले विचारोत्तेजक भाषण के तुरंत बाद ही राजनीति में आ गए थे। वह 1909 से 1918 के बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। मालवीय को स्वतंत्रता संग्राम में उनकी सशक्त भूमिका और हिंदू राष्ट्रवाद के प्रति उनके समर्थन के लिए भी याद किया जाता है।

वह दक्षिणपंथी हिंदू महासभा के शुरुआती नेताओं में से एक थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद राष्ट्रपति से इन दोनों महान हस्तियों को भारत रत्न से सम्मानित करने की सिफारिश की थी। इस पुरस्कार के लिए कोई औपचारिक सिफारिश आवश्यक नहीं है। पिछले साल जब यूपीए सरकार ने पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंडुलकर और वैज्ञानिक सीनआर राव को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा की थी तो राष्ट्र के प्रति वाजपेयी के योगदान को अनदेखा करने के लिए कांग्रेस की आलोचना की गई थी।

स्त्रोत : नवभारत टाइम्स

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