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आईएस का मकसद यूरोप पर भी कब्जा !

पौष शुक्लपक्ष तृतीया, कलियुग वर्ष ५११६

नई दिल्ली –  इराक और सीरिया के बड़े हिस्से पर काबिज आतंकी संगठन इस्लामिक इस्सेट (आईएस) का खतरा पश्चिमी देशों के लिए अब तक के अनुमान से कहीं अधिक भयावह है।

आतंकी संगठन के शिविरों तक पहुंचे एक पत्रकार के मुताबिक आईएस का अहम मकसद पूरे यूरोप पर कब्जा जमाना है। ये आईस लड़ाके सिर कलम करने, बच्चों के दिमाग में जहर भरकर उन्हें लड़ाई के मैदान में उतारने से लेकर यूरोप पर जीत हासिल करने को आमादा हैं।

आईएस के आतंकी शिविरों का दौरा करके लौटे ७४ वर्षीय जर्मन पत्रकार जर्गन टोडेनहॉफर ने बताया कि आईएस के शिविरों में आने वाले आतंकियों का कहना है कि वह इस्लामी सीमाओं का विस्तार करके इसे यूरोप तक ले जाएंगे।

उनकी तैयारी दुनिया में अब तक के सबसे बड़े धार्मिक सफाए के अभियान की है। इस्लामी साम्राज्य की स्थापना का मंसूबा बांधे ये लोग इस्लाम के नाम पर लोगों को गुलाम बनाते हैं। इस्लाम कुबूल करने के बाद कुछ को छोड़ भी दिया जाता है।

आईएस आतंकी इन शिविरों में प्रशिक्षण लेने के लिए ज्यादातर यूरोप और अमेरिका से आ रहे हैं। इसका मकसद भी इस्लाम की रक्षा के लिए जिन लोगों से युद्ध करना है उन्हीं के बीच के लोगों को उतारकर पश्चिमी देशों पर जीत हासिल करना है।

पत्रकार ने बताया कि एक जेहादी अमेरिका के न्यूजर्सी से आया था। वह कानून की पढ़ाई कर चुका है और नौकरी के कई बड़े ऑफर ठुकराकर आतंकी बनने आया है। कई लड़ाके यूरोप से भी आए थे। पत्रकार टोडेनहॉफर ने बताया कि वह जिस आतंकी शिविर में रुके थे वहां ५० नए लड़ाके रह रहे थे। वहां हर दिन ऐसे ५० नए लड़ाके आते हैं।

उन्होंने आतंकी शिविर में एक बच्चे को भी देखा। वह भी आइएस के लिए लड़ाई करने आया है। उसने अपनी उम्र १३ साल बताई हालांकि वह देखने में इससे भी छोटा लग रहा था |
सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार इस्लामिक इस्सेट (आईएस) के कब्जे वाले इलाकों में अंदर तक गए जर्मन पत्रकार जर्गन टोडेनहॉफर ने इन आतंकियों के शिविरों में दस दिन बिताए हैं। इराक के मोसुल और सीरिया के रक्का में इन आतंकी शिविरों में पहली बार जिस पश्चिमी पत्रकार को रहने की इजाजत मिली वह जर्मन पत्रकार टोडेनहॉफर ही हैं।

ये मौका भी उन्हें आईएस सरगनाओं से महीनों की मान-मनौव्वल के बाद मिला। उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर कुछ फोटो पोस्ट की हैं जिनमें आइएस आतंकियों के हाथों में अत्याधुनिक जर्मन हेकलर और एमजी-3 मशीन गन हैं।

स्त्रोत : नर्इ दुनिया

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