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हिन्दु जनजागृति समितिद्वारा प्रविष्ट किए गए कुंभमेला मामले के जमीन अधिग्रहण मुद्दे पर हाईकोर्ट सख्त, मांगा हलफनामा !

मुंबई –  कुंभ मेले के आयोजन के लिए अब तक सिर्फ ५४ एकड़ जमीन का ही अधिग्रहण हो पाया है। अभी भी २६९ एकड़ जमीन का अधिग्रहण शेष है। सोमवार को नाशिक महानगर पालिका की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने बॉम्बे हाइकोर्ट को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अधिग्रहण की प्रक्रिया में देर होने से मेले के आयोजन के लिए जरूरी इंतजाम के काम में विंलब हो रहा है। इसलिए सरकार को जमीन अधिग्रहण की प्रक्त्रिया शीघ्रता से पूरा करने का निर्देश दिया जाए।

उन्होंने कहा कि अब तक हमें दो हजार तीन सौ करोड़ में से सिफ एक हजार ५२ करोड़ रुपए ही मिले हैं। इस बात को जानने के बाद मुख्य न्यायाधीश मोहित शाह की खंडपीठ ने सरकार को १९ जनवरी तक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। गौरतलब है कि इस मुद्दे को लेकर हिूंद जनजागृति समिति ने हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में दावा किया गया है कि जमीन अधिग्रहण में देरी होने से साधुग्राम के निर्माण देरी हो रही है।

श्रम न्यायालय की खस्ता हालत पर हाईकोर्ट नाराज

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि श्रम न्यायालय का काम अमानवीय स्थिति में नहीं होना चाहिए। हाईकोर्ट ने सोमवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। मामला महानगर के फोर्ट इलाके में स्थित एक श्रम न्यायालय का है। जहां की स्थिति दयनीय है। न्यायमूर्ति अभय ओक व न्यायमूर्ति एएस गड़करी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि कोर्ट कक्ष में जगह पर्याप्त नहीं है। कोर्ट रुम की छत टूटी हुई है। मरम्मत का काम ठीक से नहीं हुआ है। वकीलों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। मामले की सुनवाई के लिए पीठासीन अधिकारी भी नहीं है। पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने श्रम आयुक्त को इस संबंध में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था।

स्त्रोत : जागरण 

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