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घर वापसी : विकास मानसिक और भौतिक होने के साथ-साथ सोच और संस्कार से भी जुड़ा – जुगल किशोर

धर्मांतरण और घर वापसी पूरी तरह अलग है। धर्मांतरण राष्ट्रीय संकट है, देश को तोड़ने की साजिश है और

घर वापसी जड़ों से जुड़ने की प्रक्रिया : जुगल किशोर

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‘घर वापसी’ कार्यक्रम के प्रभारी जुगल किशोर

धर्मांतरण और घर वापसी को लेकर मचे बवाल और नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से विकास के एजेंडे से न भटकने के संकल्प के बीच विहिप व ‘घर वापसी’ कार्यक्रम के प्रभारी जुगल किशोर का विश्वास है कि ‘घर वापसी’ और विकास का मुद्दा जुड़ा हुआ है। यह विकास मानसिक और भौतिक होने के साथ-साथ सोच और संस्कार से भी जुड़ा है।

‘नईदुनिया’ के सहयोगी प्रकाशन ‘दैनिक जागरण’ के राष्ट्रीय उप ब्यूरो प्रमुख आशुतोष झा से हुई जुगल किशोर की बातचीत के अंश :

देश में नई सरकार का गठन हुआ है, प्रधानमंत्री भी विकास की राह पर चलने की बात कर रहे हैं। ऐसे में धर्मांतरण का विवाद क्या उचित है?

– विवाद तो कुछ ऐसे राजनीतिक दल पैदा कर रहे हैं जो विवादों के सहारे ही वोट बैंक संभालते हैं। रही बात विकास की तो “घर वापसी” इससे अलग तो नहीं है। यह भी विकास का रास्ता है। क्या किसी से छिपा है कि आज मुस्लिम समाज में अधिकांश घर के बच्चों, औरतों में शिक्षा कितनी कम है। या फिर मदरसा में जो पढ़ाया जाता है, वह उनके विकास में कितना सहायक हो सकता है। कारण कई हो सकते हैं, लेकिन यह सच्चाई है कि उनकी बच्चियां स्कूल का मुंह नहीं देख पाती हैं। हिंदू समाज में वापसी के साथ उनके लिए राह खुलती है। क्या यह उनके लिए विकास का माध्यम नहीं बनेगा।

लेकिन ईसाई समाज में शिक्षा का अभाव नहीं है।

मैं मानता हूं कि उस समाज में शिक्षा है। लेकिन संस्कार, राष्ट्रीयता की भावना का क्या? आप पता लगाइए कि बाहर से जो पेट्रो डालर आ रहे हैं, वे कहां जा रहे हैं। उसी पैसे से प्रभावित कर लाखों हिंदुओं का धर्मांतरण कराया गया है।

लेकिन हाल में आगरा में जो कुछ हुआ उसके बाद तो आप पर भी आरोप लगा कि मुस्लिमों को जबरन हिंदू बनाया गया था?

पैसे के बल पर लिए गए बयान पर मैं क्या बोलूं। लेकिन घर वापसी की भी व्यवस्था है। जो आते हैं, वे शपथपत्र भी देते हैं। उनके शपथपत्र कोर्ट मे दाखिल होते हैं। यह तो कानूनी प्रक्रिया है। उससे भी आगे की बात यह है आज भले ही मुस्लिम और ईसाई समुदाय की बड़ी संख्या हो, लेकिन मूलरूप से तो वे हिंदू ही हैं। हम तो उन्हें वापस पुरानी मिट्टी और जड़ से जोड़ रहे हैं। संविधान भी इसकी अनुमति देता है।

क्या पहले से इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दी जाती है?

पहले से सूचना देने का कोई प्रावधान नहीं है। लेकिन हां, अगर ऐसा कोई प्रावधान बनाया जाएगा तो हमें उससे भी इनकार नहीं है। पर होता यह है कि किसी और बहाने उसे रोकने की कोशिश होती है।

अगर आप अपनी निष्ठा की बात करते हैं तो फिर दूसरे समुदाय के धर्मांतरण पर विरोध क्यो?

संविधान अनुमति देता है कि कोई स्वेच्छा से अपना धर्म बदल सकता है। लेकिन दूसरी जगह जो हो रहा है, वह प्रलोभन से हो रहा है। हम कहते हैं कि धर्मांतरण विरोधी कानून बनाया जाए लेकिन वोट बैंक की राजनीति करने वाले लोगों को ये पसंद नहीं है।

धर्मांतरण विरोधी कानून बनने के बाद क्या घर वापसी कार्यक्रम रुक जाएगा?

धर्मांतरण और घर वापसी पूरी तरह अलग है। धर्मांतरण राष्ट्रीय संकट है, देश को तोड़ने की साजिश है और घर वापसी जड़ों से जुड़ने की प्रक्रिया।

घर वापसी का कार्यक्रम फिर कब से शुरू होगा?

यह तो एक अनवरत प्रक्रिया है।

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स्त्रोत : नई दुनिया 

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