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धर्मान्तरण पर संसद में चर्चा होनी चाहिए : स्वामी

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पूर्वी देहली : कृष्णा नगर के रघुनाथ मंदिर मैदान में अखंड भारत मोर्चा का स्थापना दिवस मनाया गया। वहीं संस्थापक बीएल शर्मा प्रेम के जन्म दिवस पर एक समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महामडंलेश्वर अनुभूतानंद एवं महंत नवल किशोर द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने इस मौके पर धर्म परिवर्तन पर कहा कि स्वतंत्रता के तुरंत बाद ही धर्म परिवर्तन पर सख्त कानून बनाने की आवश्यकता थी, जिसे अब पूरा किया जाना चाहिए और संसद में बिल पारित कर चर्चा करवानी चाहिए। मुख्य वक्ता पूर्व सांसद बीएल शर्मा प्रेम ने कहा आजादी के ऐवज में हमें महजब के आधार पर बंटवारा झेलना पड़ा है, उसके बाद भी भारत में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण हुआ है। यदि धर्मांतरण पर रोक लगाने वाला कानून आजादी के बाद बन गया होता तो आज कश्मीर, केरल, असम, पश्चिमी उत्तर प्रदेश आदि क्षेत्रों में ¨हिंदू अल्पसंख्यक नहीं होता। प्रेम ने कहा कि धर्मांतरण को रोकने के लिए सख्त कानून बनना चाहिए।

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डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी

अखंड भारत मोर्चा के अध्यक्ष संदीप आहूजा ने कहा कि मजहब व मिशनरी को अपनाने वाले लाखों लोग घर-वापसी के लिए तैयार बैठे हैं। उनका कहना था कि आज समाज में धर्मांतरण और घर-वापसी का भेद बताने की आवश्यता है, जिसकी चर्चा संसद के अतिरिक्त समाज में भी होनी चाहिए। कार्यक्रम में स्वामी नर¨सहानंद सरस्वती, संघ सहसंचालक आलोक कुमार आदि वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।

इस अवसर पर मोर्चे के महामंत्री दीपक ¨सह, उपाध्यक्ष वीरेंद्र जरयाल, हरिनरायण सारस्वत, कोषाध्यक्ष कमल वासन, मंत्री भारतभूषण, राजश्री आहूजा, चेतना शर्मा, योगेश गोडिया, चन्द्रकांत अरोड़ा, विशाल अरोड़ा, शशि शर्मा, झब्बूलाल, अशोक चौधरी, राजेश गौड, दीपक कुमार, प्राणनाथ, विपिन शर्मा उपस्थित थे।

स्त्रोत : जागरण

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