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देश को ‘संघी तालिबानियों ‘ से खतरा : आजम

आज यदि संघ प्रत्यक्षमें ‘तालिबानी’ होता, तो क्या आजम राष्ट्रप्रेमी संघकी एेसे कडक शब्दोंमें निंदा करनेका दु:साहस करते ?

लखनऊ (उत्तर प्रदेश) : उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आजम खां ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना तालिबानियों से की और कहा कि ‘संघी तालिबानी ‘ देश के सबसे बड़े दुश्मन हैं। इन लोगों पर अंकुश लगाने की जरूरत है।आज अल्पसंख्यक अधिकार दिवस पर यहां एक कार्यक्रम में आजम खां ने प्रधानमंत्री पर भी निशाना साधा। बोले, ‘देश के बादशाह दुनिया में इंसानियत का संदेश दे रहे हैं और देश में अल्पसंख्यकों को जलील करने की खुली छूट दे रखी है। साध्वी, योगी आदित्यनाथ, साक्षी महाराज और एक दिन के सजायाफ्ता कल्याण सिंह, सब उनका ‘मिशन ‘ कामयाब करने में लगे हैं। ‘ आजम ने चेतावनी के अंदाज में कहा कि ‘यदि घर मेरा जलेगा तो उसकी आंच से पड़ोसी बच नहीं पायेगा। आग न धर्म देखती है और न जाति। बादशाह ने सवा सौ करोड़ हिन्दुस्तानियों को बारूद के ढेर पर बैठा रखा है, इसमें चिंगारी लगी तो बहुत दूर तक जाएगी। ‘ धर्म परिवर्तन पर पलटवार में उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को चुना गया जो कमजोर और लाचार थे। अब दावा किया जा रहा है कि २०१७ तक सबका धर्म परिवर्तन करा देंगे।आजम ने कहा कि अब संघी तालिबानी देश की दूसरी बड़ी आबादी को यह सोंचने को मजबूर कर रहे हैं कि जब बापू, पटेल, नेहरू ने रोका तो संविधान पर चलने वाले अपने देश में रहना क्यों चुना? १९४७ में अल्पसंख्यकों ने मजहब के आधार पर बने देश जाना नहीं चुना था। वहीं नगर निगम के स्कूल के वार्षिकोत्सव में भी आजम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘संघी तालिबानियों ‘ को बुद्धि देना होगा। मोदी को फिल्म प्रोड्यूसर व निर्देशक बताते हुए कहा कि उनकी टीम में अच्छे अदाकार है। वह टीवी पर झाड़ू लगाते दिखते हैं, जिन्हें घर में लगे इलेक्ट्रानिक्स झाड़ू का बटन दबाना भी नहीं आता है। उन्होंने बादशाह (मोदी) व मीडिया के बीच गुप्त समझौता होने का आरोप लगाया।

हर जिले में अल्पसंख्यक समिति

विभागीय राज्यमंत्री चितरंजन स्वरूप ने कहा कि हर जिले में अल्पसंख्यक वर्ग की पांच सदस्यीय समिति बनेगी और उसे डीएम के साथ बैठक कर योजनाओं की निगरानी का अधिकार मिलेंगे। कार्यक्रम में राज्यमंत्री वसीम अहमद, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष शकील अहमद, सदस्य शफी आजमी, मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। इस दौरान कक्षा आठ तक उर्दू भाषा को अनिवार्य करने, निजी जमीन पर बनी कालोनियों में मस्जिद बनाने की इजाजत, सरकारी नौकरियों में मुसलमानों की भागीदारी बढ़ाने, मदरसों की मान्यता मे तेजी लाने और मदरसा मार्डन शिक्षकों की समस्याएं दूर करने, अल्पसंख्यक विकास बोर्ड बनाने या अल्पसंख्यक आयोग को विकास योजनाओं की निगरानी का हक देने की मांगें उठीं।

शिक्षकों का हंगामा

अल्पसंख्यक वर्ग के साथ ज्यादती और उनकेअधिकारों पर चर्चा के दौरानआल इंडिया मदरसा मार्डन टीचर एसोसिएशन ने अपनी समस्याओं को उठाकर हंगामा कर दिया। इससे नाराज मंत्री आजम खां ने कहा कि ‘अपना मुकदमा खराब मत करो, अगर वह उनके पैरोकार नहीं तो फिर कोई नहीं हो सकता। उन्होंने हंगामा करने वालों पर कई तल्ख जुमले कसते हुए उन्हें ‘मीर जाफर और मीर सादिक ‘ की संज्ञा तक दे डाली। हालांकि बाद में हंगामा करने वालों को माफ करते हुए समस्याएं दूर करने का भी भरोसा दिलाया। दरअसल, शिक्षक प्रति माह भुगतान एवं केंद्रीय मानदेय के साथ अतिरिक्त अंशदान से संबंधित शासनादेश जारी करने, नियुक्ति, निष्कासन व छुट्टी संबंधी नियमावली बनाने और केंद्र सरकार की स्टेट कंसल्टेटिव कमेटी बनाने की मांग कर रहे थे।

स्त्रोत : जागरण

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