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कांदिवली (मुंबई) : राष्ट्र एवं धर्मप्रेमियों का ईश्वरीय राज्य स्थापना हेतु कार्यरत रहने का निर्धार !

कांदिवली (मुंबई) में ‘हिन्दू राष्ट्र संगठक कार्यशाला’ !

कार्यशाला में उत्स्फूर्तता से घोषणाएं देते हुए उपस्थित राष्ट्र एवं धर्मप्रेमि साथ में मान्यवर

मुंबई : देश एवं विश्वभर में हिन्दू, हिन्दू धर्म और देवी-देवताओं पर हो रहे आघातों के कारण ईश्वरीय राज्य स्थापना की आवश्यकता बढ गर्इ है। ईश्वरीय राज्य की संकल्पना एक प्राकृतिक संकल्पना है और वह हिन्दुओं का संवैधानिक अधिकार भी है ! हम ऐसे विश्वकल्याणकारी ईश्वरीय राज्य हेतु नित्य कार्यरत रहेंगे ! कांदिवली में २१ एवं २२ सितंबर को आयोजित हिन्दू राष्ट्र संगठक कार्यशाला में उपस्थित धर्म एवं राष्ट्रप्रेमियों ने ऐसा निर्धार किया।

इस अवसर पर ‘हिन्दू राष्ट्र की मुलभूत संकल्पना’, ‘सुराज्य अभियान’, ‘हिन्दू राष्ट्र हेतु प्रसारमाध्यमों का प्रभावशाली पद्धति से उपयोग’ एवं ‘स्वभावदोष निर्मूलन प्रक्रिया के कारण व्यक्तिगत एवं सामाजिक कार्य में मिलनेवाले लाभ’ इन विषयों पर मार्गदर्शन किया गया। श्री. आशिष घनघाव ने इस कार्यशाला का सूत्रसंचालन किया तो हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. बळवंत पाठक ने प्रस्तावना की।

सनातन संस्था की प्रवक्ता श्रीमती नयना भगत ने ‘साधना एवं स्वभावदोष निर्मूलन’ इस विषय पर मार्गदर्शन किया। हिन्दू जनजागृति समिति के मुंबई प्रवक्ता वैद्य उदय धुरी ने ‘हिन्दू राष्ट्र की संकल्पना एवं आवश्यकता’ इस विषय पर मार्गदर्शन किया।

समिति के श्री. वसंत सणस ने ‘सुराज्य अभियान के अंतर्गत समाज में हो रही अप्रिय घटनाएं, खाद्य पदार्थाें में की जानेवाली मिलावट, भ्रष्टाचार और राष्ट्र पर हो रहे आघातों को रोकने का कार्य’ इस संदर्भ में मार्गदर्शन किया।

अभिप्राय

१. श्रीमती पूजा बडेकर एवं श्री. दिनेश बडेकर, सांताक्रूज : हमने नामजप की शक्ति का अनुभव किया है ! नामस्मरण के कारण हमारे पारिवारिक और सामाजिक जीवन में सकारात्मक अनुभव आए !

२. डॉ. सुजित यादव, विरार : प्रत्येक व्यक्ति ने स्वभावदोष-निर्मूलन प्रक्रिया अपनाकर उसका लाभ उठाना चाहिए ! यहां समविचारी लोगों से मिलकर बहुत आनंदित हूं !

३. श्री. विनोद पागधरे, माहीम : इस शिविर में सिखने मिली जानकारी अमूल्य है ! बाहर कितने भी पैसे देकर ऐसा ज्ञान नहीं मिलेगा !

४. श्री. नीतेश पाल, दहिसर : सेक्युलैरिजम के दुष्परिणाम एवं ईश्वरीय राज्य की आवश्यकता ध्यान में आ गई !

५. श्री. सज्जन सरोज, गोरेगांव : इस शिविर में जीवन जीने की कला सिखने को मिली !

स्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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