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प्रतापगड के पास अफजलखान की कबर के आसपास किए गए अवैध निर्माण को गिराकर वहां ‘शिवप्रताप’ का भव्य शिल्प बनाएं

समस्त हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनोंद्वारा मुख्यमंत्री को ज्ञापन

कोल्हापुर (महाराष्ट्र) : प्रतापगड किले पर अफजलखान की कबर के आसपास किए गए अवैध निर्माण को तुरंत गिराकर वहां प्रतापगड युद्ध में छत्रपति शिवाजी महाराजद्वारा किया गया पराक्रम एक शिल्प के रूप में बनाया जाए, साथ ही अफजलखान की कबर की भूमि को ‘शिवप्रतापभूमि’ नाम दिया जाए !

समस्त हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों की ओर से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन प्रस्तुत किया गया है। जिलाधिकारी कार्यालय में निवासी उपजिलाधिकारी श्री. संजय शिंदे ने इस ज्ञापन का स्वीकार किया। इस अवसर पर शिवसेना के जिला उपप्रमुख श्री. संभाजीराव भोकरे, करवीर तहसिलप्रमुख श्री. राजू यादव, शिवसेना के सर्वश्री किशोर घाटगे, तानाजी पाटिल, अवधूत साळोखे, श्री शिवप्रतिष्ठान हिन्दुस्थान के श्री. शिवराज जाधव, अंबाबाई भक्त समिति के श्री. प्रमोद सावंत, हिन्दू महासभा के श्री. मनोहर सोरप एवं श्री. जयवंत निर्मळ, महिला मोर्चा की श्रीमती सुवर्णा पोवार, हिन्दू जनजागृति समिति के सर्वश्री शिवानंद स्वामी, मधुकर नाजरे एवं बाबासाहेब भोपळे उपस्थित थे।

निवासी उपजिलाधिकारी श्री. संजय शिंदे (दाईं ओर) को ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए हिन्दुत्वनिष्ठ

इस ज्ञापन में कहा गया है कि,

१. विगत अनेक दशकों से अफजलखान की कबर का खुलेआम उदात्तीकरण चल रहा था। मूल रूप से २५ चौरस फीट आकार के इस कबर के आसपास किए गए अवैध निर्माणकार्य का विस्तार अब लगभग ११ सहस्र फीट अर्थात मूल भूमि के ४४० गुना अधिक किया गया है !

२. आजकल उस परिसर में २ सहस्र चौरस फीट की भूमि में कक्षों का निर्माण किया गया है। कबर की आसपास के राजस्व विभाग की भूमि में भी ५ सहस्र ५०० चौरस फीट का अवैध निर्माण हुआ है। इस निर्माणकार्य के सामने ३ सहस्र ५०० चौरस फीट भूमि में बडे सभागार का निर्माण किया गया है !

३. मुंबई उच्च न्यायालयद्वारा १५ अक्टूबर २००८ एवं ११ नवंबर २००९ को दिए गए २ निर्णयों में कहा है कि किसी भी निर्माणकार्य को शासन वैध नहीं प्रमाणित कर सकता और स्पष्टता से यह आदेश दिया गया है कि शासन की ओर से दिए गए किसी भी ज्ञापन का कोई शास्त्रीय आधार नहीं है ! २ मार्च २०१२ को सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के इस निर्णय को वैध प्रमाणित किया। तत्पश्चात हुई कुछ सुनवाईयों में शासन एवं वन विभाग की ढीली कार्यपद्धति के कारण इन निर्माणकार्यों को तोडे जानेपर उच्च न्यायालय ने तात्कालीन रोक लगा दी है। अतः सरकार को इसकी ओर ध्यान देकर सरकार ने अपना पक्ष अधिक सक्षमता से रखना आवश्यक है !

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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