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हरियाणा स्थित कार्तिकेय मंदिर जहां महिलाओं के प्रवेशबन्दी की परंपरा का आज भी किया जाता है पालन !

  • हरियाणा के पिहोवा स्थित कार्तिकेय मंदिर में महिलाओं का प्रवेश है वर्जित
  • मान्‍यता है कि गर्भ-गृह में प्रवेश करने वाली महिला ७ जन्मों तक रहेगी विधवा
  • पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और देहली के लोग मंदिर में आते हैं पूजा करने

कुरुक्षेत्र : हरियाणा के पिहोवा में कार्तिकेय मंदिर है ! हिंदू मान्यताओं के अनुसार कार्तिकेय भगवान शिव के बड़े बेटे हैं। दरअसल, इस मंदिर में भी महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। ऐसा कहा जाता है कि जो भी महिला मंदिर के गर्भ-गृह में प्रवेश करेगी वह सात जन्मों तक विधवा रहेगी !

पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और देहली के लोग मंदिर में पूजा करने जाते हैं। यहां पर भी बोर्ड लगाकर महिलाओं को अंदर जाने से मना किया गया है। इस बारे में मंदिर के महंत सीता राम गिरि ने बताया, ‘जब भगवान शिव को अपने उत्तराधिकारी का नाम तय करने का वक्त आया, तब पार्वती ने कहा कि जो भी दुनिया का चक्कर लगाकर सबसे पहले वापस आएगा वह विजेता होगा। कार्तिकेय के छोटे भाई ने भगवान शिव और पार्वती के ही चक्कर लगा लिए और कहा कि वह पूरा संसार हैं। उन्हें विजेता घोषित कर दिया गया। इस पर कार्तिकेय नाराज हो गए और उन्होंने अपनी खाल और मां से मिला खून निकाल दिया और उन्हें श्राप दे दिया। उन्होंने उस वक्त कहा कि जो भी महिला उन्हें ऐसे देखने आएगी वह सात जन्मों तक विधवा रहेगी !’

महंत गिरि ने बताया कि इसके बाद कार्तिकेय पिहोवा आए जहां उन्हें शांत करने के लिए सरसों का तेल चढ़ाया गया। इस मंदिर के गर्भ-गृह में पत्थर के दो ब्लॉक हैं और भगवान कार्तिकेय की दो प्रतिमाएं हैं। इन पर दीये जलते रहते हैं। श्रद्धालु इनमें तेल चढ़ाते हैं। माना जाता है कि इससे पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। महंत गिरि ने बताया कि यह मंदिर ५वीं शताब्दी में बना था और उनका परिवार कई पीढ़ियों से यहां पुजारी है।

हालांकि, उन्होंने बताया कि मंदिर में महिलाओं को जाने की इजाजत है, वे भगवान कार्तिकेय के पिंड को देख नहीं सकतीं। मंदिर के सहायक महंत ने बताया कि कुछ महीने पहले हरियाणा मुख्यमंत्री के दफ्तर ने यह पूछा था कि क्या मंदिर में महिलाओं के जाने पर पूरी तरह से बैन लगाया गया है। उन्होंने बताया कि यह साफ कर दिया गया है कि गर्भ-गृह में जाने को लेकर महिलाओं चेतावनी दी जाती है।

स्त्रोत : नवभारत टाईम्स

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