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शाही इमाम की दस्तारबंदी कानूनी दायरे में नहीं : हाई कोर्ट

मार्गशीर्ष अमावस्या, कलियुग वर्ष ५११६

शाही इमाम की दस्तारबंदी अवैधः हाई कोर्ट

नई देहली : देहली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी द्वारा अपने पुत्र को नायब इमाम नामित करने से जुड़ा समारोह ‘दस्तारबंदी’ आयोजित करने का मतलब उनकी नियुक्ति नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति आरएस ऐंड लॉ की पीठ ने यह टिप्पणी केंद्र, देहली वक्फ बोर्ड और याचिकाकर्ताओं की दलीलों को सुनने के बाद की और कहा कि ऐसी स्थिति में समारोह पर रोक लगाने की कोई जरूरत नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने इस समारोह के आयोजन को चुनौती दी थी।

अदालत ने यह भी कहा कि वक्फ बोर्ड अधिनियम १९९५ के तहत कानून में केवल वक्फ के एक मुतवल्ली (प्रबंधक) का प्रावधान है और इसमें वक्फ सम्पत्ति के इमाम की नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं है, चाहे वह मस्जिद ही क्यों न हो।

पीठ ने कहा, ‘हमारा यह मत है कि याचिकाकर्ताओं की ओर से यह दलील दिए जाने पर कि मौलाना सैय्यद अहमद बुखारी को कानून या अन्य बातों के तहत अपने पुत्र को नायब इमाम नामित करने का कोई अधिकार नहीं है और जिसका दिल्ली वक्फ बोर्ड ने समर्थन भी किया है, ऐसी स्थिति में २२ नवंबर २०१४ को निर्धारित दस्तारबंदी समारोह पर अगर रोक नहीं भी लगती है तब इसका आशय मौलाना सैय्यद अहमद बुखारी के पुत्र को जामा मस्जिद का नायब इमाम नामित या नियुक्त करना नहीं होगा।’

अदालत ने कहा, ‘इसलिए हम इस पर रोक लगाने की अंतरिम आदेश जारी करना जरूरी नहीं समझते हैं।’

स्त्रोत : नवभारत टाईम्स

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